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7 वर्ष पहले
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नई दिल्‍ली। मुख्‍यमंत्री अरविंद केजरीवाल की अध्‍यक्षता में आज हुई कैबिनेट की बैठक में जनलोकपाल बिल पास नहीं हो सका। शिक्षा और पीडब्‍ल्‍यूडी मंत्री मनीष सिसोदिया ने कहा है आज बिल पास नहीं हो सका। सोमवार को होने वाली कैबिनेट की बैठक में जनलोकपाल बिल को पास कर दिया जाएगा। कैबिनेट से मंजूरी मिलने के बाद इसे 16 फरवरी को रामलीला मैदान की बजाए इंदिरा गांधी स्‍टेडियम में विधानसभा का विशेष सत्र बुलाकर जनलोकपाल बिल को पास करेगी। दिल्‍ली विधानसभा का सत्र 13 फरवरी से शुरू होगा।

दिल्‍ली पुलिस ने सुरक्षा कारणों से रामलीला मैदान में विधानसभा के विशेष सत्र को बुलाने की मंजूरी नहीं थी। सरकार के सूत्रों के मुताबिक दिल्ली सरकार दिल्ली पुलिस को जनलोकपाल बिल के दायरे में लाना चाहती है। इसके अलावा डीडीए और नगर निगम को भी जनलोकपाल बिल के दायरे में लाया जाएगा।

अरविंद केजरीवाल सरकार के प्रस्तावित दिल्ली लोकपाल बिल-2014 के दायरे मुख्यमंत्री, मंत्री, एमएलए, पार्षद और दिल्ली सरकार में काम करने वाले सभी आईएएस, आईपीएस व दानिक्स अधिकारी सहित सभी वरिष्ठ नौकरशाहों को रखा गया है। इसके दायरे में सभी सरकारी कर्मचारियों के अलावा उनके परिजनों को भी शामिल किया गया है। इसमें ठेका कर्मचारी, अस्थाई, आकस्मिक व तदर्थ कर्मचारियों को रखा गया है। यहां यह जानना दिलचस्प होगा कि इसका नाम जनलोकपाल बिल नहीं है, जिसके लिए अरविंद, अन्ना हजारे के साथ आंदोलन कर चुके हैं।

भ्रष्टाचार के मामलों की छह महीने में जांच और छह महीने में सुनवाई पूरी करनी होगी। जनलोकपाल लोगों की शिकायतों का निपटारा करेगा और व्हिसल ब्लोअर की सुरक्षा की जिम्मेदारी उस पर ही होगी। शुरुआती दो साल अधिकारी दूसरे विभागों से आएंगे, बाद में जनलोकपाल का अपना एक अलग तंत्र होगा। एंटी करप्शन ब्यूरो जनलोकपाल में मिल जाएगा। दोषियों को न्यूनतम छह महीने और अधिकतम उम्रकैद की सजा दी जा सकेगी।

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