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भोपाल : 3 माह में दहेज प्रताड़ना के 52 केस... अधिकांश में महिलाएं लिखा रहीं रिश्तेदारों के नाम

3 वर्ष पहले
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भोपाल.   शहर में पिछले तीन महीनों में परिवार कल्याण समिति में पहुंचे दहेज प्रताड़ना के प्रकरणों में इस बात का खुलासा हुआ है कि 49% से अधिक महिलाएं द्वेष भावना के चलते सास-ससुर सहित अन्य रिश्तेदारों का नाम लिखा देती हैं। कोलार और महिला थानों से पहुंचे 52 मामलों में समिति ने काउंसलिंग और स्क्रीनिंग के बाद 25 मामलों से सभी रिश्तेदारों का नाम हटाकर केवल पति के खिलाफ एफआईआर करने के आदेश दिए हैं।


कुछ मामले ऐसे भी जिनमें लिखा दिए बच्चों के नाम

सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन के अनुसार गठित समिति में अब तक 52 दहेज प्रताड़ना की शिकायत पहुंची। समिति ने जब शिकायतों की स्क्रीनिंग की और दोनों पक्षों को बुलाकर आमने-सामने किया, तो पता चला कि कुछ महिलाओं ने उन रिश्तेदारों के भी नाम शिकायत में दर्ज करा दिए जो दूसरे राज्यों, जिलों में रहते हैं। इसमें सास-ससुर तो छोड़ो, शादीशुदा ननद, जेठानी, मौसी सास, दादी सास तक के नाम लिखा दिए। तीन ऐसे मामले पहुंचे, जिसमें महिलाओं ने बच्चों तक के नाम लिखा दिए। तीन सदस्यीय समिति ने 25 शिकायतों से सब रिश्तेदारों के नाम काटकर केवल पति के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के निर्देश दिए हैं। महिला थाना और कोलार थाना के सभी मामलों में प्रकरण दर्ज हो गए हैं।

 

अधिकतर मामलों में गुस्से में आकर लिखवा देती हैं नाम

समिति के अध्यक्ष सेवानिवृत्त जज राकेश सक्सेना ने बताया कि शिकायतों की स्क्रीनिंग, काउंसलिंग और दोनों पक्षों का आमना-सामना किया गया। इसमें महिलाओं ने स्वीकार किया उन्होंने गुस्से और बदला लेने के कारण सबके नाम लिखवाए। समिति को महिलाओं ने बताया कि वास्तव में पति ही मारपीट करता है। खाना खर्चा नहीं देता। सदस्य मीरा सिंह का कहना है कि वास्तव में 40 प्रतिशत महिलाएं घरेलू हिंसा से पीड़ित हैं। उनका कहना है कि महिलाओं को घरेलू हिंसा के तहत ही प्रकरण दर्ज कराना चाहिए, लेकिन ऐसा नहीं होता। वे  दहेज प्रताड़ना की शिकायत करती हैं। सदस्य रीता तुली का कहना है कि 11 प्रतिशत दंपती के बीच अहम की लड़ाई होती है। जो बढ़कर दहेज प्रताड़ना में बदल जाती है। यदि दोनों की काउंसलिंग की जाए तो झगड़ों को खत्म किया जा सकता है। ऐसे ही दो मामलों में समिति की पहल पर समझौता भी हुआ है।

 

 

पहले सुलह की कोशिश...

सभी थानों में दहेज प्रताड़ना के प्रकरण दर्ज करने से पहले शिकायत को  परिवार कल्याण समिति भेजना अनिवार्य है। इसमें समिति दोनों पक्षों को बुलाकर पहले सुलह कराने का प्रयास करती है। सुलह न हो पाने की स्थिति में समिति केे निर्देश पर पुलिस केस दर्ज करती है।

 

अब यह है व्यवस्था
अभी तक महिलाएं घरेलू हिंसा और दहेज प्रताड़ना के मामलों में सास-ससुर  के अलावा अन्य रिश्तेदारों के नाम लिखवा देती थीं, लेकिन अब वे ऐसा नहीं कर सकतीं। पिछले साल आईं सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन के बाद अब पुलिस घरेलू हिंसा और दहेज प्रताड़ना के मामलों को पहले परिवार कल्याण समिति को भेजती है। समिति मामले की जांच करती है और जांच में पाए गए आरोपियों के नाम पुलिस को भेजती है फिर पुलिस प्रकरण दर्ज कर कार्रवाई करती है। 

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