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सरकारी काम में बाधा डालने के मामले में 10 अप्रैल को फैसला, गवाही को नहीं आए जांचकर्ता

3 वर्ष पहले
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रांची.   सरकारी कामकाज में बाधा डालने, धारा 144 का उल्लंघन करने और पुलिस-प्रशासनिक पदाधिकारियों पर हमला करने के आरोप में दर्ज क्रिमिनल केस में नगर विकास मंत्री चंद्रेश्वर प्रसाद सिंह शुक्रवार को कोर्ट में हाजिर हुए। इस दौरान उनके साथ सांसद अजय मारू, खादी ग्रामोद्योग बोर्ड के अध्यक्ष संजय सेठ और भाजपा नेता गामा सिंह भी हाजिर हुए। प्रथम श्रेणी के न्यायिक दंडाधिकारी आरपी बा ने चारों आरोपियों के बयान दर्ज किए। आरोपियों ने कोर्ट को बताया कि उनके खिलाफ झूठा मामला दर्ज कराया गया है। वे सभी निर्दोष हैं। इसके बाद कोर्ट ने मामले में फैसला सुनाने के लिए 10 अप्रैल की तिथि तय की।

 

यह मामला 22 मई 2008 का है। उस दिन दोपहर 2:30 बजे तत्कालीन विधायक सीपी सिंह के नेतृत्व में 1000 से अधिक लोग राजभवन और मुख्यमंत्री आवास का घेराव करने निकले थे। जुलूस को रोकने के लिए पुलिस बल  मौजूद थे। आरोप है कि जुलूस में शामिल लोगों ने धारा 144 का उल्लंघन किया, बैरिकेडिंग तोड़ी और लाठी-डंडे से पुलिस बल और प्रशासनिक पदाधिकारियों पर हमला किया। इस घटना को लेकर तत्कालीन दंडाधिकारी उमेश प्रसाद सिंह ने 23 मई को गोंदा थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई थी। मामले की जांच सहायक अवर निरीक्षक सिद्धनाथ दुबे ने की। जांच कर उन्होंने चारों भाजपा नेताओं के खिलाफ अदालत में चार्जशीट दाखिल की। अदालत में 10 साल मामले की सुनवाई चली।

 

तीन गवाहों ने कहा - घटना स्थल पर थे, लेकिन किसने घटना को अंजाम दिया, वे नहीं पहचानते हैं

 

अभियोजन पक्ष की ओर से तीन गवाहों अघोरी शशांक सिन्हा, के रवि कुमार और तत्कालीन सिटी डीएसपी महेश राम पासवान के बयान दर्ज कराए गए। जबकि मामले में चार और सरकारी गवाह थे, जिनमें तत्कालीन गोंदा थाना प्रभारी शैलेश प्रसाद सिंह, तत्कालीन एसडीओ मनोज कुमार, तत्कालीन सिटी एसपी रिचर्ड लकड़ा और इंस्पेक्टर बीएल मिश्र शामिल थे। कोर्ट की ओर से गवाही के लिए इन चारों सरकारी अधिकारियों को कई बार नोटिस भेजे गए। मामले के जांच पदाधिकारी तत्कालीन एएसआई सिद्धनाथ दुबे और प्रधान पूर्ति भी गवाही देने के लिए हाजिर नहीं हुए। तब कोर्ट ने गवाही की प्रक्रिया बंद कर दी और फैसला सुनाने के लिए 10 अप्रैल की तिथि निर्धारित की। मामले में तीन गवाह हाजिर हुए थे। तीनों ने कोर्ट में गवाही दी है कि वे घटनास्थल पर मौजूद थे, लेकिन किसने घटना को अंजाम दिया, वे नहीं पहचानते हैं।

 

जेपीएससी कार्यालय में तोड़-फोड़ मामले में बंधु तिर्की ने निचली अदालत में सरेंडर किया, मिली जमानत

 

राज्य के पूर्व मंत्री बंधु तिर्की ने जेपीएससी संस्थान मेंे तोड़फोड़ और सरकारी कामकाज में बाधा पहुंचाने के मामले में मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी स्वयंभू की अदालत में सरेंडर किया। अदालत ने आरोपी बंधु तिर्की को 10000 के दो मुचलके पर जमानत दे दी। बंधु ने इससे पहले न्याययुक्त की अदालत में अग्रिम जमानत याचिका दायर की थी। न्याय आयुक्त एसएस प्रसाद की अदालत ने 3 अप्रैल 2018 को उन्हें जमानत की सुविधा दी थी और कहा था कि निचली कोर्ट में जाकर सरेंडर करें और मुचलके भरें। पूर्व मंत्री के खिलाफ 27 मार्च 2017 को कोतवाली थाने में तत्कालीन कार्यपालक दंडाधिकारी संजीव कुमार लाल ने प्राथमिकी दर्ज कराई थी। मामले में मनोज यादव, अशोक चौधरी और अजय चौधरी को भी आरोपी बनाया गया है।

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