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लुटेरों के डर से 36 घंटे बाद भी वृद्धा घर नहीं लौटीं, बेटे के साथ जाएंगी भोपाल

3 वर्ष पहले
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ग्वालियर.    लक्ष्मीबाई कॉलोनी में रहने वालीं बुजुर्ग महिला विनीता उपाध्याय (68)दूसरे दिन भी खौफ की वजह से अपने घर नहीं लौटीं। वह कुशल नगर में अपने जेठ के यहां पर रह रही हैं और अब बेटे के साथ भोपाल जाएंगी। इस घर से पति की यादें जुड़ी होने की वजह से वह इसे छोड़कर बेटे के साथ रहने नहीं गई थीं। रविवार की रात लुटेरे उनके घर में घुस आए थे और बंधक बनाकर 15 तोला वजन के जेवरात और 2 लाख रुपए लूट ले गए थे। लेकिन पुलिस के हाथ अभी तक कोई सुराग नहीं लगा है। सोमवार की शाम उनके बेटे अमित भी भोपाल से यहां आ गए।


अकेले रहने वाले बुजुर्गों की सुरक्षा के लिए 3 साल पहले प्लानिंग हुई थी, अब थाने में रजिस्टर नहीं मिल रहे हैं

शहर में अकेले रहने वाले बुजुर्गों की सुरक्षा के लिए 3 साल पहले योजना बनाई गई थी। तब शहर के आउटर इलाकों में अकेले रहने वाले बुजुर्गों के साथ ठगी की वारदातें हुई थीं। तत्कालीन एसपी हरिनारायणचारी मिश्रा ने  प्रत्येक थाने में एक रजिस्टर रखवाया था। बीट के पुलिसकर्मियों से कहा गया था कि वह अपने क्षेत्र में अकेले रहने वाले बुजुर्गों के नाम-पते रजिस्टर में नोट करें तथा प्रति सप्ताह उनके घर जाकर हाल-चाल जानें। बुजुर्गों की सुरक्षा के लिए बनाई गई इस योजना पर अब पुलिस ने काम करना बंद कर दिया। पड़ाव थाना क्षेत्र में बुजुर्ग महिला के साथ वारदात होने के बाद यह रजिस्टर थाने में तलाश किया गया तो पता चला कि रजिस्टर बना तो था लेकिन अब कहां है पता नहीं ? वारदात का शिकार हुईं विनीता अग्रवाल  के घर भी पिछले दो साल से  कोई पुलिसकर्मी उनका हाल-चाल जानने के लिए नहीं पहुंचा था।

 

डर तो लग रहा है लेकिन शुक्र है जान बच गई, मंदिर जाकर शुक्रिया अदा किया, अब बेटे के साथ जाऊंगी  

उस रात की घटना को सोचकर अब भी डर लग रहा है। लेकिन इतना सब होने के बाद भी जान बच गई, यह भगवान का शुक्र है। घटना के बाद से ही मैं अपने जेठ के घर आ गई हूं। घर जाने की हिम्मत ही नहीं कर पा रही हूं। सुबह काली माता मंदिर गई थी, भगवान का शुक्रिया अदा करना था कि इतना सब होने के बाद भी जान बच गई। 
-जैसा कि विनीता उपाध्याय ने दैनिक भास्कर को बताया।

 

खिड़कियाें में जंगले लगवाने हैं, मां को साथ लेकर जाऊंगा
मैं कल शाम को घर आ गया था। मां को ठीक देखकर सुकून मिला। घटना ऐसी थी कि कुछ भी हो सकता था। दिनभर घर में बदमाशों द्वारा फैलाए गए सामान को व्यवस्थित किया, अलमारियाें को जमाया।  खिड़कियों में जंगले लगवाना है ताकि घर सुरक्षित रहे। घर में सुरक्षा के सारे इंतजाम करके मां को अपने साथ भोपाल ले जाऊंगा। अब उन्हें किसी भी हालत में अकेला नहीं छोड़ूंगा। आठ दिन पहले ही यहां आया था। मां से चलने के लिए भी कहा था। मां ने कहा कि कुछ दिन बाद भोपाल जाएंगी। 
-जैसा कि अमित उपाध्याय ने दैनिक भास्कर को बताया।

 

 

बदमाशों से पूछताछ कर रहे हैं
पड़ाव टीआई संतोष सिंह ने बताया कि आसपास रहने वाले पुराने बदमाशों से पूछताछ की जा रही है। बुजुर्ग लोगाें के नाम-पते रखने के लिए रजिस्टर तो बनाया गया था लेकिन उसमें विनीता उपाध्याय की एंट्री नहीं है। समय-समय पर अकेले रहने वाले बुजुर्गों के घर बीट के पुलिसकर्मी जाते हैं।

 

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