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डाउनलोड करेंरायपुर. सदर बाजार में कारोबारी विपुल चतवानी के घर सनसनीखेज लूट करने वाले गिरोह में एक महिला भी शामिल थी। उसने भी अपना चेहरा नकाब से ढांक रखा था। चतवानी परिवार में एक माह पहले एक दिन के लिए युवती काम करने आई थी। उसी पर शक जा रहा है। वारदात के तरीके से पुलिस को साफ संकेत मिल गए हैं कि लूट करने वालों में ऐसा कोई शामिल है, जिसे घर में बारे में पूरी जानकारी थी। लुटेरे अच्छी तरह जानते थे कि मकान के निचले हिस्से में रात के समय केवल बुजुर्ग दंपत्ति ही रहते हैं।
पुलिस के अनुसार पक्की जानकारी के कारण ही लुटेरे पीछे के रास्ते से आए। उन्हें उसके बारे में जानकारी थी। ये भी मालूम था कि पिछले हिस्से में चैनल गेट है, जिसमें छोटा ताला रहता है। यहां से मकान में एंट्री करना ही सेफ था। लुटेरे उसी रास्ते से आए। किसी तरह की आवाज किए बिना उन्होंने ताला तोड़ा और उसके बाद भीतर घुसने में उन्हें दिक्कत नहीं हुई। वारदात के बाद उसी रास्ते से निकल भागे। विपुल चतवानी के पिता प्रकाश चतवानी को शक है कि उनके यहां एक महीना पहले काम के लिए आई नौकरानी घटना में शामिल हो सकती है। वह एक दिन काम करने के बाद चली गई थी। उसकी गतिविधियां ठीक नहीं थी। उसने एक दिन में पूरा घर देख लिया था। घर के पीछे दरवाजे की जानकारी ज्यादा लोगों को नहीं है। केवल घर के लोग और करीबी ही जानते थे। पुलिस के अनुसार कारोबारी के मकान के पिछले हिस्से में पतली गली है, जो बूढापारा की ओर खुलती है।
एक्टिवा में आई थी काम करने
चतवानी परिवार में एक दिन काम करने आने वाली नौकरानी हाईटेक थी। वह काम करने भी एक्टिवा में अाई थी। उसके पास एनरायड फोन था। उसे किसी ने नहीं भेजा था। वह खुद से पता करते हुए आई थी कि किसके घर काम करने वाली बाई की जरूरत है। चतवानी परिवार के सदस्यों ने मामूली पूछताछ के बाद उसे काम पर रख लिया। उसने अपने आप को रायपुर की रहने वाली बताया था।
थाना सौ मीटर दूर पर चीखने का मौका नहीं दिया
लुटेरे सावधानी से मकान में घुसे और भीतर पहुंचते ही उन्होंने एक झटके में बुजुर्ग दंपती को काबू कर लिया जिससे उन्हें चीखने का मौका नहीं मिला। हालांकि उनके मकान के सामने वाले हिस्से में सुरक्षा के लिए गार्ड तैनात था। कोतवाली थाना भी सौ मीटर दूर है, लेकिन न तो गार्ड को भनक लगी और न ही पुलिस को। इसी का फायदा उठाकर लुटेरे चुपचाप भाग निकले।
सीने पर चढ़कर बैठ गए और गर्दन में रख दिया चाकू, मेरे होश उड़ गए
71 साल के बुजुर्ग प्रकाश चतवानी ने भास्कर को बताया- उस समय रात के सवा तीन बज रहे थे। उन्हें दरवाजा खोलने की आवाज आई। उनकी नींद टूट गई। उन्हें लगा सामने वाले कमरे में कोई है। वे बिस्तर से उठकर दरवाजे की ओर गए तो देखा चेहरे पर कपड़ा बांधे तीन-चार लोग खड़े हैं। वे हड़बड़ा गए। इसके पहले कि वे कुछ बोल पाते दो युवक उनकी ओर लपके। उनका मुंह दबा दिया और अंदर की ओर ले गए। उन्हें बिस्तर पर गिराया और एक युवक मेरे सीने पर सवार हो गया। उसका एक हाथ मेरे मुंह पर था। मुझे बिस्तर पर गिराते ही उसने चाकू गर्दन पर टिका दिया और धीरे से फुसफुसाते हुए कहा- जरा भी आवाज की तो चाकू गर्दन के अंदर कर दूंगा।
इस दौरान दूसरा युवक उनकी पत्नी को बंधक बना चुका था। वह भी मेरी स्थिति देखकर चीखने चिल्लाने की स्थिति में नहीं थी। फिर एक ने मुझसे पूछा जेवर कहां हैं, मैंने थोड़ा विरोध करने की कोशिश की तो वह मारपीट पर उतर आया। उसके बाद पत्नी ने कहा- जो मांग रहे हैं दे दो, मैंने उससे कहा पैसे उनके बेटे के पास है। वह ऊपर रहता है। फिर वह आलमारी की चाबी मांगने लगा। मैंने कहा कि चाबी मेरे पास नहीं है। बहु-बेटे रखते है। उसने फिर मारपीट शुरू कर दी। आलमारी को खंगालने लगे। उसमें रखे कपड़े को फेंक दिया। कापड़ो के नीचे लॉकर की चाबी थी। वह लुटेरों को मिल गई। उन्होंने लॉकर से पैसे और जेवर निकाल लिए।
कमरे से निकलने के पहले कहा अगर शोर मचाया तो जान से मार देंगे। हम लोग अभी कुछ देर बाहर रहेंगे। उसके बाद मुझे धक्का देकर गिरा दिया। कमरे में रखे तीनों मोबाइल अपने साथ ले गए। जाते-जाते लैंडलाइन का तार काट दिया। बाहर से दोनों दरवाजे बंद करने के बाद वहां से भाग निकले। प्रकाश चतवानी ने बताया कि आधे घंटे तक वे और उनकी पत्नी चुपचाप अंदर बैठे रहे। मुंह से आवाज तक नहीं निकाली। उन्हें डर था कि आरोपी बाहर खड़े होंगे।
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