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डाउनलोड करेंबारां (कोटा). जिले के छोटा बाजार बालापुरा मोहल्ला के कुएं में सवा महीने से एक बिल्ली गिरी हुई थी। गांव के लोग उसे बचाने के लिए रोजाना उसे कुएं के अंदर दूध रोटी और पानी पहुंचाकर उसको जिंदा रखे हुए थे। ताकि बिल्ली की मौत होने के बाद कुएं का पानी खराब ना हो। सुबह 11 बजे ही जगह पर पहुंचे...
- गांव वालों ने बिल्ली को बाहर निकालने के लिए ग्राम पंचायत से भी मदद मांगी, लेकिन वहां से निराशा मिली। ग्राम पंचायत वन विभाग पर जिम्मेदारी डाल रही थी। इसको लेकर जीवप्रेमियों में निराशा बनी हुई थी।
- भास्कर की ओर से बिल्ली की कहानी को शुक्रवार को प्रमुखता से उठाया गया था। भास्कर में जानकारी मिलने पर पाठक शिवशंकर सोनी और एक दोस्त सत्यनारायण 18 मई को पहुंचे।
- रस्से मंगवाकर शिवशंकर सुरक्षित तरीके कुएं में पहुंचे। वहां से बिल्ली को बाहर निकालकर सुरक्षित छोड़ दिया। पूरे रेस्क्यू में करीब एक घंटे का समय लगा। इसके बाद बिल्ली को जिंदा बाहर निकालकर खुले में छोड़ दिया। इस दौरान सवा माह से परेशान हो रहे ग्रामीणों ने भी राहत की सांस ली।
बारिश में काम लेते हैं कुएं का पानी...मरने से दूषित हो जाता कुआं
- ग्रामीण कन्हैयालाल सुमन ने बताया कि बारिश के बाद कुएं में पानी भर जाता है। उस समय नल सप्लाई नहीं होने पर लोग इस कुएं का पानी उपयोग में लेते हैं। इसके चलते कुएं में बिल्ली की मोत नहीं हो, इसका प्रयास कर रहे थे। बिल्ली की कुएं में मौत को गांव के लिए अशुभ भी माना जाता है।
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