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केंद्रीस गृहमंत्री राजनाथ सिंह अंबिकापुर से रवाना, जल्द ही पहुंचेंगे रायपुर एयरपोर्ट

3 वर्ष पहले
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रायपुर। केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह नया रायपुर स्थित मंत्रालय में नक्सल मार्चे पर बैठक लेने के बाद पत्रकारों से रूबरू हुए। इस दौरान उन्होंने कहा कि तेलंगाना के ग्रे-हाउंड बटालियन की तर्ज पर छत्तीसगढ़ में भी ब्लैक पैंथर बटालियन तैयार कर ली गई है। इनका दो महीने का ट्रेनिंग भी पूरा हो चुका है। राजनाथ सिंह ने नक्सली फंडिंग पर एक बार फिर शकंजा कसने की बात की। उन्होंने कहा कि नक्सलियों ने भोले-भाले ग्रामीणों को गरीबी में डालकर खूब पैसा बनाया है। 

 

 

- उन्होंने कहा कि ''इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता है कि नक्सली नेताओं का पैसा विदेशों में भी जमा है। नक्सली फंडिंग रोकने की कोशिश की जा रही है। हमारी नजर उन पर है, उनकी फंडिंग रोकने की जो भी कोशिश होगी हम करेंगें। हम ये कह देना चाहते हैं कि अब ये आगे नहीं चलेगा। अगर जरूरत पड़ी तो हम उनकी संपत्ति को भी जब्त करेंगे।''  

- गृहमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार ने हाल के दिनों में नक्सल प्रभावित इलाकों में सिक्योरिटी वैक्यूम को खत्म किया है। जहां पहले जवान नहीं जा पाते थे, वहां जवान पहुंचते हैं। उन्होंने एक बात फिर से साफ किया किया कि आईबी और छत्तीसगढ़ पुलिस का कोआर्डिनेशन काफी बेहतर है।

 

अब शहीदों के परिजनों को मिलेगी 1 करोड़ की सहायता राशि

- केंद्र सरकार शहीद होने वाले जवानों के परिजनों को 1 करोड़ रुपए की सहायता राशि देगी। केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने यह घोषणा की। राजनाथ सिंह ने कहा, " कोई जवान शहीद होता है तो पैसों से उसकी भरपाई नहीं हो सकती, लेकिन उनके परिवार की जिम्मेदारी का दायित्व सरकार का है। इसलिए सरकार ने तय किया है कि जवान की शहादत पर कम से कम 1 करोड़ की सहायता राशि दी जाएगी।" उन्होंने अंबिकापुर स्थित सीआरपीएफ ट्रेनिंग कैंप में बस्तरिया बटालियन के पासिंग आउट परेड में हिस्सा लिया। इस दौरान सीएम रमन सिंह भी उनके साथ थे। राजनाथ सिंह दो दिवसीय प्रवास पर छत्तीसगढ़ आए हुए हैं। 

 

जवानों के शहीद होने में आई है कमी
- राजनाथ ने कहा कि केंद्र सरकार की दृढ़ इच्छाशक्ति और राज्य सरकारों के समन्वय, फोर्स की सक्रियता से नक्सलवाद, आतंकवाद, अलगाववाद से जवानों के शहीद होने की संख्या में 50 से 55 फीसदी में कमी आई है। भौगोलिक रूप से भी इनका दायरा कम हो गया है।

 

-नक्सली विकास के सबसे बड़े दुश्मन हैं। वे चाहते है कि गांवों में रहने वाली आदिवासी जनता जिंदगी भर गरीबी झेलते हुए विकास से दूर रहें। बस्तरिया बटालियन के जवानों की हौसला अफजाई करते हुए उन्होंने कहा कि इन बेटों- बेटियों ने यह साबित कर दिया है कि योग्यताएं सिर्फ शहरों की अट्टालिकाओं से नहीं, बस्तर जैसे दूरस्थ इलाकों से भी निकलती हैं।

 

 

नागा बटालियन की तर्ज पर बनाया गया है बस्तरिया बटालियन
-नक्सलियों से मोर्चा लेने के लिए सीआरपीएफ में पहली बार नागा बटालियन की तर्ज पर बस्तरिया बटालियन का गठन किया गया है। सीआरपीएम के अनुसार इस पहली बटालियन में 543 जवान हैं जिसमें 189 महिला जवान हैं। मुख्यमंत्री रमन सिंह ने 2016 में इस बटालियन के गठन का प्रस्ताव केंद्रीय गृह मंत्रालय को भेजा था। इसे स्वीकार कर लिया गया था। बटालियन में बस्तर संभाग के स्थानीय युवाओं की ही भर्ती होगी। इन्हें पहले पांच साल तक बस्तर में ही सेवा देनी होगी। केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल द्वारा बस्तर में विशेष भर्ती अभियान चलाकर 739 अभ्यर्थियों का चयन किया गया था। यह अभियान अक्टूबर 2016 से जनवरी 2017 के मध्य चलाया गया था । इसमें 189 महिला सहित कुल 534 रिक्रूट को एटीसी बिलासपुर और एटीसी अंबिकापुर में 44 सप्ताह का विशेष प्रशिक्षण दिया गया। इस प्रशिक्षण में गुरिल्ला युद्ध छद्म एवं स्वल्पाहार रहकर लड़ना और जंगल युद्ध की सभी तकनीकी शामिल किया गया है। 
 

 

बस्तर में नक्सली हमले के बाद सीआरपीएफ का बड़ा खाना कैंसिल

- सीआरपीएफ 62वीं बटालियन द्वारा केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह के अंबिकापुर प्रवास के दौरान रविवार को रखा गया बड़ा खाना का आयोजन आखिरी क्षणों में कैंसिल हो गया। पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के तहत रात में गृहमंत्री का भोजन सीआरपीएफ के अधिकारियों व जवानों के साथ 62वीं बटालियन में रखा गया था। बताया गया है कि बस्तर में रविवार को नक्सली हमले की घटना के मद्देनजर यह निर्णय लिया गया।

 

कंटेंट : जॉन राजेश पॉल/अपूर्व सिंह

फोटो : अपूर्व सिंह/भूपेश केसरवानी

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