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डाउनलोड करेंचंडीगढ़/जालंधर. बटाला के कीड़ी अफगाना स्थित चड्ढा शुगर मिल से 17 मई को लीक हुए लाखों लीटर शीरे के ब्यास में मिलने से लाखों मछलियों और जीवों के मरने के तीसरे दिन भी मिल प्रबंधकों के खिलाफ केस दर्ज नहीं हुआ है। इस मामले में प्रशासन प्रबंधकों को बचाता दिख रहा है। हालांकि, वाइल्ड लाइफ के अफसरों ने पुलिस को रिपोर्ट भेज दी है, लेकिन जिला प्रशासन की ओर से पुलिस कार्रवाई से पहले मांगी गई कानूनी राय में इस रिपोर्ट पर 21 आॅब्जेक्शन लगाए गए हैं, जिससे कार्रवाई में देर हो रही है। हालांकि, वाइल्ड लाइफ के प्रिंसिपल चीफ कंजर्वेटर कुलदीप कुमार का कहना है कि वह इन 21 ऑब्जेक्शन्स को दूर करेंगे। ताकि इस मामले में जल्द कार्रवाई हो सके।
तीसरे दिन कर्मोवाल के पास दिखीं 2 डाॅल्फिन
शनिवार शाम गांव कर्मोवाल के पास दो डाॅल्फिन दिखीं। पानी प्रदूषित होने के बाद से 12 से ज्यादा डाॅल्फिन लापता थीं। 35 गोताखोर लगातार इनकी तलाश कर रहे थे। प्रिंसिपल चीफ कंजर्वेटर का कहना है कि डाॅल्फिन इतनी आसानी से नहीं मरती। ये पानी से बाहर आकर सांस लेती है।
कानून: 3 साल कैद संभव
वाइल्ड लाइफ प्रोटेक्शन एक्ट के तहत पर्यावरण खराब करने, पानी में जहरीला पदार्थ छोड़ने (जिससे जीव-जंतुओं को हानि पहुंचे) के तहत केस दर्ज होता है। इसमें 3 साल कैद, 25 हजार जुर्माना हो सकता है।
ये लगाए गए आॅब्जेक्शन...
- मिल मालिक व जिम्मेदार अफसरों के रजिस्टर्ड दस्तावेज सौंपे जाएं।
- साबित किया जाए कि 17 मई को जब नुकसान हुआ, तब मिल चल रही थी।
- वाइल्ड लाइफ के जिन अफसरों ने शिकायत की है, क्या उनके पास ऐसा करने की पावर है।
- साफ किया जाए कि सैंपल किस अफसर ने सील किए और किसके पास जमा कराए गए।
- सैंपल अगर जांच के लिए भेजे हैं तो उस लैब का डिस्पैच नंबर साथ लगाया जाए।
- वाइल्ड लाइफ के जिन अफसरों ने शिकायत की है, उनके पोस्टिंग ट्रांसफर आॅर्डर दिखाए जाएं।
- डैमेज रिपोर्ट में स्पष्ट नहीं है कि दरिया में कितना नुकसान हुआ और कितनी दूरी तक हुआ।
- कानून के अनुसार जहरीले पानी की रिपोर्ट पेश करना जरूरी है।
- शिकायत रिपोर्ट की तारीख के बारे में बताएं।
- फोटोग्राफर और फोटो डेवलपर को गवाह बनाया जाए और उससे पक्की रसीद ली जाए।
- शिकायत के साथ जो फोटो अटैच हैं, उनसे साबित नहीं होता कि काले रंग का पानी चड्ढा शुगर मिल से ही निकला है। इसे स्पष्ट किया जाए।
- इसकी विडियोग्राफी जरूरी थी। यह की गई है या नहीं।
- चड्ढा शुगर मिल के खिलाफ पहले भी वन विभाग या पाॅल्यूशन कंट्रोल बोर्ड की ओर से कोई कार्रवाई की गई, यह स्पष्ट किया जाए। रिपोर्ट में यह बात अधूरी है।{शेष | पेज 7
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