पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर
डाउनलोड करेंअमृतसर/बटाला. कीड़ी अफगाना स्थित चड्ढा शुगर मिल से निकला शीरा ब्यास दरिया में मिलने से हजारों मछलियां मर गईं। वहीं, जंडियाला गुरु के चिट्टा शेर इलाके में 30 गायों की मौत हो गई। माना जा रहा है कि मौत दरिया के पानी से हुई। 83 किलोमीटर दरिया के पानी रंग गहरा भूरा हो गया। मंगलवार को मिल में टैंक आेवरफ्लो हो गया था। बुधवार को शीरा दरिया में मिल गया। इससे गुरुवार सुबह हजारों मछलियां मारी गईं। पर्यावरण मंत्री ओपी सोनी ने जांच होने तक मिल को बंद करवा दिया है। ब्यास दरिया हरिके में सतलुज से मिलता है। ये पानी राजस्थान फीडर और फिरोजपुर फीडर को जाता है।
ऑक्सीजन की कमी से घुटा दम
अमृतसर के डीसी कमलदीप सिंह के अनुसार शीरा की मात्रा ज्यादा होने से पानी में ऑक्सीजन कम हो गई। यह जहरीला केमिकल नहीं है। दम घुटने से मछलियों की मौत हुई है। वहीं, अभी तक न कोई मरी हुई और न ही काेई जिंदा डाल्फिन मिली है।
बचाव: मछली न खाएं
- गुरदासपुर, अमृतसर और तरनतारन में असर। पानी इस्तेमाल न करने की अपील और मछलियां भी न खाने को कहा गया है।
- जांच होने तक मिल बंद रहेगी।
- पौंग डैम से 1000 क्यूसिक और पानी छोड़ा। ताकि शीरे का असर कम हो सके।
- इस पानी से पशुओं को भी न नहलाएं।
ऐसे समझें: क्या है शीरा
ये एक बायो प्रोडक्ट है, जो गन्ने से चीनी बनाते हुए निकलता है। गन्ने को जब चीनी में बदला जाता है तो शुगर क्रिस्टल के रूप में तैयार हो जाती है। इस दौरान निकले लिक्विड को ही शीरा कहा जाता है। देसी शराब बनाने में भी इसका इस्तेमाल होता है।
83 किमी. एरिया से मरीं मछलियां निकालने का काम जारी
- मशहूर शराब व्यापारी पौंटी चड्ढा के परिवार के स्वामित्व वाली कीड़ी अफगान स्थित चड्ढा शुगर मिल से बुधवार रात जो शीरा ब्यास दरिया में मिलना शुरू हुआ, उसे गुरुवार दोपहर बंद करवाया जा सका। इस शीरा के कारण श्री हरगोबिंदपुर से लेकर 83 किलोमीटर दूर हरिके तक पानी में ऑक्सीजन की कमी हो जाने से हजारों मछलियां और दूसरे जलीय जीव मर गए, जिन्हें निकालने का काम जारी है।
- बता दें कि ब्यास में मछलियों की कई प्रजातियां जैसे डगरा, गौद, सोल, मल्ली, संगाड़ा पाई जाती हैं। मरने वाली मछलियों में सबसे अधिक संख्या इन्हीं प्रजातियों की है।
- मौके पर पहुंचे अमृतसर के डीसी कमलदीप सिंह संघा ने बताया कि फारेंसिक विभाग ने मरी हुई मछलियों का पोस्टमार्टम किया है और शुरुआती जांच के अनुसार, पानी मे ऑक्सीजन की कमी से मछलियां मरी हैं। संघा के अनुसार, वन विभाग के डीएफओ चरणजीत सिंह के नेतृत्व में कर्मचारी मरी हुई मछलियों को पानी से निकालने में जुटे हैं।
ब्यास दरिया में डॉल्फिन-घड़ियाल को लेकर चिंता
- ब्यास दरिया में इंडस रीवर प्रजाति की डॉल्फिन भी हैं। 3 से 6 मई तक किए गए सर्वे में इनकी संख्या 12 से ज्यादा पाई गई थी। वर्ल्ड वाइड फंड फाॅर नेचर इंडिया (डब्ल्यूडब्ल्यूएफ-इंडिया) के सहयोग से वन एवं जीव सुरक्षा विभाग के विशेषज्ञों ने 185 किलोमीटर स्ट्रेच में तलवाड़ा हेडवर्क्स से हरिके नोज तक यह सर्वे किया था।
- पानी में शीरा मिलने से इन डॉल्फिन को कोई नुकसान पहुंचा है या नहीं, गुरुवार शाम तक इसकी जांच जारी थी। फॉरेस्ट विभाग का कहना है कि फिलहाल उन्हें कोई मरी हुई डॉल्फिन नहीं मिली। हालांकि जिंदा डॉल्फिन भी नजर न आने से अधिकारी चिंतित हैं। कुछ महीने पहले दरिया में 47 घड़ियाल भी छोड़े गए थे। किसी घड़ियाल के मरने की भी कोई जानकारी नहीं है।
Copyright © 2021-22 DB Corp ltd., All Rights Reserved
This website follows the DNPA Code of Ethics.