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चाणक्य नीतिः पैसा कमाते हैं तो दिमाग में रखें इस बात को, वरना धन नहीं आएगा आपके किसी काम

पैसा कमाना एक कला है लेकिन उसका उपयोग उससे भी बड़ी कला है।

Danik Bhaskar | Apr 24, 2018, 03:56 PM IST

रिलिजन डेस्क. पैसा कमाना एक कला है लेकिन उसका उपयोग उससे भी बड़ी कला है। अगर आप धन कमा रहे हैं तो चाणक्य की एक नीति को हमेशा दिमाग में रखें। अगर धन कमाने के साथ उसको लेकर कोई योजना नहीं है आपके पास या उसके उपयोग का कोई रास्ता नहीं है तो वो धन आपके लिए किसी काम का नहीं है।

पैसा या धन के महत्व को देखते हुए शास्त्रों में कई नियम बताए गए हैं। इन नियमों का पालन करने पर हर व्यक्ति को जीवन सुखी और शांति प्राप्त होती है। चाणक्य ने मगध से धनानंद के साम्राज्य को खत्म कर, चंद्रगुप्त मौर्य को सम्राट बनाया। लंबे समय भारत के महामंत्री के पद पर रहे चाणक्य ने अर्थशास्त्र की भी रचना की। उनके पिता आचार्य चणक अर्थशास्त्र के ही शिक्षक थे।

पैसों के संबंध में आचार्य चाणक्य ने एक महत्वपूर्ण बात बताई है कि-

उपार्जितानां वित्तानां त्याग एव हि रक्षणाम्।

तडागोदरसंस्थानां परीस्रव इवाम्भसाम्।। (चाणक्य नीति)

अर्थ - हमारे द्वारा कमाए गए धन का उपभोग करना या व्यय करना ही धन की रक्षा के समान है। इसी प्रकार किसी तालाब या बर्तन में भरा हुआ उपयोग न किया जाए तो सड़ जाता है।


आचार्य चाणक्य कहते हैं कि व्यक्ति धन या पैसा कमाता है तो उसका सदुपयोग करना चाहिए। कई लोग पैसे को बचा कर रखते हैं, उसका उपयोग नहीं करते हैं। आवश्यकता से अधिक धन की बचत अनुचित है। इसलिए, धन का दान करना चाहिए। सही कार्यों में धन को निवेश करना चाहिए। यही धन की रक्षा के समान है। यदि कोई व्यक्ति दिन-रात मेहनत करके पैसा कमाता है और उसका उपभोग नहीं करता है तो ऐसे पैसों का लाभ क्या है। हमेशा पैसों का सदुपयोग करते रहना चाहिए। इसी प्रकार किसी तालाब में भरा जल उपयोग न किया जाए तो वह सड़ जाता है। ऐसे पानी को बचाने के लिए जरूरी है कि उसका उपयोग किया जाए। यही बात धन पर भी लागू होती है।