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चंद्रगुप्त मौर्य के महामंत्री थे आचार्य चाणक्य, लेकिन महल में नहीं छोटी सी झोपड़ी में रहते थे, यूनान का राजदूत ईमानदारी देखकर हो गया था नतमस्तक

चाणक्य के अनुसार हमेशा ध्यान रखें कि अभी समय कैसा है, सही समय देखकर ही काम करना चाहिए।

Danik Bhaskar | Jul 12, 2018, 02:04 PM IST

रिलिजन डेस्क। पुराने समय में आचार्य चाणक्य ने अपनी नीतियों से खंड-खंड में विभाजित भारत को एक किया था और चंद्रगुप्त मौर्य को अखंड भारत का सम्राट बनाया था। चाणक्य ने नीति शास्त्र की रचना की थी। इस शास्त्र में सफल और धनवान बनने के सूत्र बताए गए हैं। चंद्रगुप्त मौर्य ने चाणक्य को अपने राज्य का महामंत्री नियुक्त किया था। महामंत्री होने के बावजूद चाणक्य एक छोटी सी झोपड़ी में आम लोगों की तरह रहते थे। इस संबंध में एक प्रेरक प्रसंग प्रचलित है। जानिए ये प्रसंग…

> एक बार यूनान का राजदूत उनसे मिलने राज दरबार पहुंचा। चाणक्य ने राजदूत को शाम को मिलने के लिए अपने घर बुलाया।

> राजदूत चाणक्य के व्यवहार से बहुत खुश था। शाम को वह चंद्रगुप्त के राजमहल में चाणक्य के बारे में पूछने लगा। तब पहरेदार ने बताया कि आचार्य चाणक्य नगर से बाहर रहते हैं।

> राजदूत ने सोचा चाणक्य महामंत्री हैं तो किसी बड़े महल रहते होंगे। राजदूत नगर के बाहर पहुंचा और एक नागरिक से चाणक्य के घर के बारे में पूछा।

> नागरिक ने एक कुटिया की ओर इशारा करते हुए कहा कि वह सामने महामंत्री का घर है।

> राजदूत आश्चर्यचकित हो गया। कुटिया में पहुंचकर चाणक्य के पैर छुए और कहा कि आप महामंत्री हैं, लेकिन कुटिया में रहते क्यों रहते हैं।

> चाणक्य ने कहा कि अगर मैं जनता की कड़ी मेहनत और पसीने की कमाई से बने महलों में रहूंगा तो मेरे देश के नागरिक को कुटिया भी नसीब नहीं होगी।

> चाणक्य की ईमानदारी पर यूनान का राजदूत नतमस्तक हो गया।

आप भी सफल और धनवान बनना चाहते हैं तो ध्यान रखें चाणक्य की ये 6 बातें...

चाणक्य कहते हैं कि-

क: काल: कानि मित्राणि को देश: कौ व्ययागमौ।

कस्याऽडं का च मे शक्तिरिति चिन्त्यं मुहुर्मुंहु:।।

ये चाणक्य नीति के चतुर्थ अध्याय का 18वां श्लोक है। इस श्लोक में चाणक्य ने बताया है कि हमें 6 बातों के जवाब हमेशा मालूम होना चाहिए।

# पहली बात: यह समय कैसा है

आचार्य के अनुसार वही व्यक्ति सफल है, समझदार व्यक्ति जानता है कि समय कैसा चल रहा है। अभी सुख के दिन हैं या दुख के। इसी आधार पर वह कार्य करता हैं।

# दूसरी बात: हमारे मित्र कौन-कौन हैं

हमें ये मालूम होना चाहिए कि हमारे सच्चे मित्र कौन-कौन हैं और मित्रों के वेश में शत्रु कौन-कौन हैं। अगर मित्रों में छिपे शत्रु को नहीं पहचान पाएंगे तो कार्यों में असफलता ही मिलेगी और धन हानि भी होगी।

# तीसरी बात: यह देश कैसा है

यह देश या शहर या जगह कैसी है, जहां हम काम करते हैं और रहते हैं। कार्यस्थल पर काम करने वाले लोग कैसे हैं। इन बातों का ध्यान रखते हुए काम करेंगे तो असफल होने की संभावनाएं बहुत कम हो जाएंगी।

# चौथी बात: हमारी आय और व्यय क्या है

समझदार इंसान वही है जो अपनी आय देखकर व्यय करता है। आय से कम खर्च करेंगे तो थोड़ा-थोड़ा ही सही पर धन संचय हो सकता है।

# पांचवीं बात: हमारा मालिक क्या चाहता है

इस बात का ध्यान रखें कि हमारा प्रबंधक, कंपनी, संस्थान या बॉस हमसे क्या चाहता है। हम ठीक वैसे ही काम करें, जिससे संस्थान को लाभ मिलता है।

# छठी बात: मुझमें कितनी शक्ति है

अंतिम बात सबसे जरूरी है, हमें ये मालूम होना चाहिए कि हम क्या-क्या कर सकते हैं। वही काम हाथ में लें, जिसे पूरा कर सकते हैं। शक्ति से ज्यादा बड़ा काम हम हाथ में ले लेंगे तो असफल होना तय है।

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