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डाउनलोड करेंइंदौर. शहर के मध्य क्षेत्र के लिए मास्टर प्लान में कई संशोधन का नोटिफिकेशन जारी हो गया है। स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत होने वाले इन बदलावों से शहर के 22 से ज्यादा बाजारों और यहां रहने वाले डेढ़ लाख से ज्यादा लोगों का जीवन आसान हो सकेगा। अब तक यहां 4 से 5 मंजिला बिल्डिंगें बनती थीं, नए प्रावधानों से 15 मंजिल तक बिल्डिंग बन सकेंगी। टीएंडसीपी डायरेक्टर गुलशन बामरा ने टीएंडसीपी एक्ट 1973 के मुताबिक इंदौर के मास्टर प्लान में बदलाव का नोटिफिकेशन रविवार को जारी किया। 15 दिन में दावे-आपत्तियां और सुझाव मांगे गए हैं। इसके बाद इन नियमों को लागू कर दिया जाएगा।
भूमि उपयोग अब ऐसा भी
- अब तक आवासीय, वाणिज्यिक, सार्वजनिक एवं अर्द्ध सार्वजनिक, आमोद-प्रमोद, सार्वजनिक सेवा सुविधाएं, यातायात एवं जल क्षेत्र शामिल था। अब यातायात एवं हरित संरक्षित क्षेत्र, ऐतिहासिक धरोहर क्षेत्र भी शामिल किए हैं, जो धरोहरों को बचाने के लिए जरूरी था।
- इसका बड़ा फायदा उन रहवासियों को होगा, जिन्होंने स्मार्ट सिटी की सड़क के लिए अपनी पुश्तैनी जमीन अौर मकान का हिस्सा सड़क चौड़ीकरण के लिए दिया है। नए नियमों में चौड़ी सड़कों से मिलने वाला फायदा भी इस संशोधन में शामिल है।
भवनों की ऊंचाई 9 से 45 मी.
अभी सड़क की चौड़ाई का 1.5 गुना या 15 मीटर तक की अनुमति थी। अब 9 मीटर से कम सड़क पर 9 मीटर, 12 और 15 मीटर सड़क पर 18 मीटर, 18 में 24, 24 में 30, 30 मीटर सड़क पर 45 मीटर ऊंचाई तक मिल सकेगी। अब बड़ा गणपति से राजमोहल्ला जैसी सड़कों में 15 मंजिल तक की अनुमति मिल सकेगी।
मकान के आगे ओपन स्पेस
अभी 400 वर्ग मीटर तक के प्लॉट में फ्रंट एमओएस 6 मीटर था। अब यह प्लॉट की चौड़ाई के हिसाब से होगा, लेकिन एक समान। अभी 400 वर्ग फीट तक के प्लॉट में किसी तरह की जमीन नहीं छोड़ना पड़ती था, इससे सड़क टेड़ी-मेढ़ी हो जाती थी। नए प्रावधानों के बाद ऐसा नहीं हो सकेगा।
ओपन एरिया 70% तक बढ़ा
शहर की शान राजबाड़ा के आसपास 22 से ज्यादा बाजार है। इनके लिए भी अब तक ऊंचाई तय थी। इसलिए इतना फैले हुए थे। अब सड़क चौड़ाई के हिसाब से ये ऊंची बिल्डिंग बना सकेंगे। ओपन एरिया जो अभी 50 प्रतिशत छोड़ना पड़ता था, वह 70 प्रतिशत कर दिया है। इससे आम जनता को राहत मिलेगी।
मैकेनाइज्ड पार्किंग का लाभ
सार्वजनिक पार्किंग के लिए हजार वर्ग मीटर जमीन जरूरी थी। अब 400 वर्गमीटर कर दिया है। इससे छोटे-छोटे पार्किंग स्पॉट बन सकेंगे, जिससे मध्य क्षेत्र में पार्किंग की समस्या का बड़ा समाधान हो सकेगा। पार्किंग के लिए भी अभी आरसीसी बिल्डिंग में रैंप का प्रावधान था। अब मैकेनाइज्ड पार्किंग का लाभ मिलेगा। ग्रीन बेल्ट में तलघर पार्किंग को लेकर कोई प्रावधान नहीं था, अब हो सकेगी पार्किंग। मतलब किसी बगीचे के नीचे पार्किंग बनाना हो तो वह भी हो सकेगा।
पीएसपी लैंड यूज : सार्वजनिक और अर्द्ध सार्वजनिक उपयोग की जमीनों में अभी इस क्षेत्र के लिए कोई नियम तय नहीं थे कि कितना क्षेत्र खुला छोड़ना है। अब सरकारी बिल्डिंगें बनेंगी तो ऊंचाई वाली बन सकेगी।
प्लॉटों का संयुक्तिकरण : अभी इस क्षेत्र में प्लॉटों के संयुक्तिकरण की अनुमति नहीं थी। अब यह हो सकेगा। पार्किंग फीस, एफएआर पर प्रीमियम का फायदा भी नागरिकों को मिलेगा।
यह बदलाव भी : एबीडी एरिया में अब कई सड़कें नो-व्हीकल जोन होंगी
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