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Alert : कहीं जहरीली तो नहीं है आपके आम की मिठास !

कार्बाइड के जरिए बनने वाली जहरीली मिठास आपके पेट, लिवर को नुकसान पहुंचाने के साथ ही कैंसर को भी न्यौता दे सकती है।

Dainik Bhaskar

Apr 25, 2018, 03:57 PM IST
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हेल्थ डेस्क। गर्मियों की दस्तक के साथ रसीले आम का जिक्र आते ही हर किसी के मुंह में पानी भरना स्वाभाविक है। पीले-पीले और पल्प से भरपूर चौसा, बदामी, अलफांजो, दशहरी, लंगडा, देसी, बंबईया की लंबी फेहरिस्त शौकीनों के स्वाद के हिसाब से बाजार से निकलकर घर के फ्रिज की शेल्फ में सजने लगी है। लेकिन जुबां पर घुलकर, गले से उतरते हुए पेट तक को संतुष्ट करने वाली आम की यह मिठास कहीं जहरीली तो नहीं है। इस बारे में बता रहे हैं मदर डेरी फूड एंड वेजीटेबिल प्राइवेट लिमिटेड के बिजनेस हैड (सफल) शान्तनु भट्टाचार्यजी

कितना हानिकारक है कार्बाइड से पका आम

कार्बाइड के जरिए बनने वाली जहरीली मिठास आपके पेट, लिवर को नुकसान पहुंचाने के साथ ही कैंसर जैसी घातक बीमारी को भी न्यौता दे सकती है। सीजन शुरू होते ही यह मांग-आपूर्ति की चुनौतियों से जूझने लगता है और इसकी बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए अनैतिक तरीके अपनाए जाते हैं। बाज़ार की मांग के अनुसार आम की पर्याप्त मात्रा समय पर पक कर तैयार नहीं हो पाती। ऐसे में इसे एक रसायन कैल्शियम कार्बाइड की मदद से पकाया जाता है। इसे आमतौर पर ‘मसाला’ भी कहा जाता है, जो आम को जल्दी पकाने में मदद करता है। इससे आम में आर्सेनिक एवं फॉस्फोरस के अंश रह जाते हैं। यह बेहद प्रतिक्रियाशील रसायन है, जो नमी के सम्पर्क में आने पर एसीटिलीन गैस पैदा करता है। एसीटिलीन मनुष्य के तंत्रिका तंत्र को प्रभावित करता है और मस्तिष्क को होने वाली ऑक्सीजन की आपूर्ति कम कर देता है। यह मुंह में अल्सर, पेट में जलन और यहां तक कि फूड पॉइज़निंग का कारण भी बन सकता है।

फल पकाने के लिए इस तरह के रसायनों के इस्तेमाल की भारतीय कानूनों में अनुमति नहीं है। कुछ ही घंटों में आम को पकाने वाले ये रसायन दुनिया के ज़्यादातर हिस्सों में प्रतिबंधित हैं। हालांकि ये हमारे देश में आसानी से मिल जाते हैं। कई अध्ययनों में पाया गया है कि कैल्शियम कार्बाइड कार्सिनोजैनिक (यानि कैंसर कारक) है और सामान्य मानव शरीर में कई विकारों का कारण बन सकता है।

कैसे करें अच्छे आम का चयन?

- सबसे अच्छा तरीका यह है कि अधपके या कच्चे आम को खरीदा जाए और इसे घर पर प्राकृतिक तरीकों से पकाया जाए।

- आम जांचने का सबसे आसान तरीका यह है कि आम के उपरी हिस्से को ठीक तरीके से परखा जाए। यह थोड़ा उभरा हुआ होना चाहिए।

- आप जिस भी आम का चयन करते हैं वो कीट से मुक्त होना चाहिए। कटा-फटा नहीं होना चाहिए।

ऐसे पकाएं प्राकृतिक तरीकों से आम

जब आप एक बार ठीक तरीके से उपयुक्त आम का चयन कर लेते हैं तो उनको घर ले जाकर प्राकृतिक तरीकों से पकाया जा सकता है। इसके लिए चारों ओर से बंद और सामान्य तापमान वाले कमरे में आम को कागज में लपेटकर एक तश्तरी या डिब्बे में रख देना चाहिए। इसके बाद इसको चारों तरफ से पुराने अखबार या कपडे से ढक देना चाहिए। तीन दिनों तक आम को इसी अवस्था में रखने के बाद आप सुरक्षित और प्राकृतिक तरीकों से पकाए गए आम का स्वाद चख सकते हैं।

सुरक्षित उपभोग को सुनिश्चित करने के लिए खाद्य सुरक्षा प्राधिकरण फल पकाने के नैतिक तरीकों जैसे ‘एथीलीन’ के इस्तेमाल की अनुमति देता है जो फलों को पकाने वाला प्राकृतिक कारक है। एथीलीन का स्वास्थ्य पर कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं होत। इससे पका फल आम जनता के उपभोग के लिए पूरी तरह से सुरक्षित है।


कितना पोषक है आपका आम

आम पोषक तत्वों जैसे विटामिन ए से परिपूर्ण और प्राकृतिक रूप से डिटाक्सीफाई एजेंट यानि फलैवनाईडस, करोटीन्स और पॉलीफेनोल्स से युक्त है। इस फल में रेशेदार पाचक फाइबर और शर्करा का सही मात्रा में संतुलन होता है। इसके अलावा आम में फाईटोन्यूटिशन और विटामिन सी भी भरपूर मात्रा में पाया जाता है। इन पोषक तत्वों के अलावा आम 25 तरीके के विभिन्न कारीटोनाईड से युक्त है जो हमारी रोग प्रतिरोधक क्षमता को दुरुस्त रखते हैं और रोगों को जन्म देने वाले कीटाणुओं से सुरक्षा भी प्रदान करते हैं।


कार्बाइड आम के पीछे मुनाफाखोरी है अहम कारण
आइए इसके पीछे मुख्य कारणों को भी जान लें। इस अनैतिक प्रकिया से न केवल मांग और आपूर्ति के बीच का अंतराल दूर हो जाता है बल्कि श्रृंखला में शामिल लोगों का मुनाफा भी बढ़ जाता है। इसके अलावा एक और महत्वपूर्ण पहलू यह है कि आम जब प्राकृतिक तरीके से पकता है तो इसमें नमी की मात्रा तकरीबन 7-10 फीसदी तक कम हो जाती है और आम का वज़न भी कम हो जाता है। इस नुकसान से बचने के लिए भी अनैतिक प्रथाओं का इस्तेमाल किया जाता है जो आपके स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचा रही हैं। इसके अलावा प्राकृतिक रूप से फल पकने में समय भी ज़्यादा लगता है। साथ ही इसके लिए कुछ अतिरिक्त बुनियादी संरचना एवं निवेश की आवश्यकता होती है। इन सब का असर प्रक्रिया में शामिल लोगों के मुनाफे पर पड़ता है।

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