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िकसानों का लगातार विरोध, मोहड़ जलाशय का निर्माण शुरू करने में हो रहा है विलंब

6 वर्ष पहले
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डौंडीलोहारा ब्लॉक के ग्राम मोहड़ में प्रस्तावित बांध परियोजना का क्रियान्वयन होने में और देरी होने की संभावना है, क्योंकि हुच्चेटोला के किसान असंतुष्ट नजर आ रहे है। उन्हें जमीन के बदले अब तक न नौकरी मिली है और न ही मुआवजा। किसानों का कहना है कि नौकरी बाद में चाहिए, फिलहाल पैसा चाहिए।

किसानों ने गांव में सामूहिक बैठक लेकर निर्णय लिया है कि जब तक शासन, प्रशासन विभिन्न मांगों पर सहमति नहीं देती है, तब तक मोहड़ जलाशय निर्माण का विरोध जारी रहेगा। हालांकि संबंधित विभागीय अधिकारी असंतुष्ट किसानों की संख्या इक्का-दुक्का बताकर परियोजना के क्रियान्वयन पर असर नहीं पड़ने की बात कह रहे है। लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही दिख रही है। भले ही वर्तमान अधिकारी अपनी ओर से योजना का क्रियान्वयन जल्द कराना चाह रहे है, लेकिन तात्कालीन अधिकारियों की लापरवाही से ऐसा होता नहीं दिख रहा है। हुच्चेटोला के सभी किसानों को मुआवजा नहीं ं मिल पाया है।

किसानों को मुआवजा मिला जाना था
डेम के लिए 2011-12 में सर्वे होने के तीन साल बाद एवार्ड पारित होने के साथ ही किसानों को मुआवजा मिल जाना चाहिए था पर नहीं हो सका, अब विरोध हो रहा है।

आंकडों में ही योजना
स्वीकृत वर्ष 2009

लागत 228 करोड़, 121 करोड़ कंस्ट्रक्शन,107 करोड़ मुआवजा

क्षमता- 1.5 टीएमसी

143 वर्ग किमी क्षेत्र में भराव

50 एमसीएफटी पानी एनएचपीसीएल पुरैना भिलाई को

दो हजार एकड़ में सिंचाई सुविधा देने का दावा

मांग पूरी होने तक चलता रहेगा जलाशय का विरोध
हुच्चेटोला के ग्रामीणों ने सामूहिक बैठक में यह निर्णय लिया कि जब तक शासन ग्रामीणों की मांगों पर सहमति नहीं देती तब तक मोहड़ जलाशय निर्माण का विरोध जारी रहेगा, ग्रामीणों का कहना है कि विरोध नहीं करने की स्थिति में उनका जीवन ही दांव पर लग जाएगा।

सिंचिंत असिंचित का मुआवजा एक समान
ग्राम पटेल ठेमनलाल देशमुख, जगदीश राम, सांतुराम ने कहा कि व्यवसाय करने के लिए चाही गई स्थान पर निशुल्क जमीन देकर दुकान प्रशिक्षण तथा राशि उपलब्ध कराया जाए। सभी प्रकार के कृषि जमीन भर्री, धनहा, बाड़ी, सिंचित, असिंचित का एक समान मुआवजा दिया जाए।

75 प्रतिशत डूबान पुनर्वास के अंतर्गत
सुग्रीव राम, मनीराम, प्रीतराम, सावतराम ने कहा कि डूबान क्षेत्र में आने वाले किसी भी ग्राम के व्यक्तिगत किसान की भूमि यदि 75 प्रतिशत डूबान में आता है, उसे पुनर्वास के अंतर्गत लिया जाए। पेड़ पौधों का मुआवजा वन विभाग द्वारा निर्धारित दर से दोगुना के हिसाब से दिया जाए। बांध से प्रभावित प्रत्येक भूमिहीन परिवार को पुनर्वास नीति के तहत व्यवस्थापन किया जाए ताकि उनका भविष्य सुरक्षित रह सके।

ज्यादातर किसानों को मिल चुका है भूमि का मुआवजा
नियमानुसार कार्रवाई कर रहे हैं। हुच्चेटोला के कुछ ही किसान विरोध कर रहे होंगे, अधिकांश किसानों को मुआवजा मिल चुका है। जो किसान विरोध कर रहे हंै, उनके लिए भी शासन द्वारा मुआवजा राशि जारी हो चुकी थी, लेकिन विरोध के चलते कुछ किसानों ने मुआवजा अभी तक नहीं लिया है। एसके गुप्ता, भूअर्जन अधिकारी व एसडीएम

परियोजना को जल्द पूरा करना चाह रहा विभाग
कलेक्टर व उच्च अधिकारियों से सलाह लेकर मोहड़ बांध परियोजना का क्रियान्वयन जल्द करना चाह रहे हंै। इसके लिए लंबित विभागीय प्रक्रियाओं को जल्द पूरा कराने प्रयास कर रहे हंै। किसानों की मांग उनके हिसाब से जायज हो सकती है, लेकिन आगे की कार्रवाई नियमानुसार की जाएगी। डीएन गिरदौनिया, ईई, जलसंसाधन विभाग

जमीन लेनदेन पर स्टांप शुल्क माफ करें : ग्रामीण
डुनेश्वर प्रसाद, खुमान सिंह, नारायण सिंह ने कहा कि व्यवस्थापन के अंतर्गत दिए गए कृषि भूमि तथा राज्य के अंदर किसी भी स्थान पर कृषि जमीन या मकान व्यवस्थापन के तीन वर्ष के अंदर खरीदने पर स्टांप शुल्क माफ किया जाए। कृषि कार्य करने इच्छुक किसानों को कृषि योग्य भूमि उपलब्ध कराकर सिंचाई सुविधा का लाभ दिया जाए। चारागाह, घास, कब्रगाह, गौठान, आबादी, स्थान आदि के लिए अतिरिक्त जमीन निशुल्क दिया जाए।

युवाओं को नौकरी किसानों को स्थाई रोजगार दें
किसान रामदयाल, पल्टन सिंह, रामचरण का कहना है कि मोहड़ जलाशय का पानी एनएसपीसीएल के पुरैना स्थित पावर प्लांट को दिया जाएगा, इसलिए मोहड़ जलाशय को औद्योगिक परियोजना के अंतर्गत लिया जाए। चिमनसिंह, सेवाराम ने कहा कि डुबान क्षेत्र के 12 ग्रामों के युवाओं को नौकरी दी जाए। किसानों को भी स्थायी रोजगार दी जाए। 60 वर्ष से अधिक उम्र के महिला, पुरुष किसानों को आजीवन पेंशन दिया जाए तभी समस्या का समाधान हो सकेगा।

एक एकड़ की जमीन के लिए 25 लाख की मांग
3 मार्च को सूचना के अधिकार में खुलासा हुआ है कि हुच्चेटोला के किसानों को 32 हेक्टेयर जमीन के एवज में 77 लाख रुपए मुआवजा दिया जाना था, लेकिन 40 लाख रुपए ही मिल पाया। अब स्थिति ऐसी है कि किसान एक एकड़ जमीन के एवज में 25 लाख रुपए की मांग करने लगे है। वहीं दबी जुबान विभागीय अधिकारियों का कहना है कि हमसे पहले पदस्थ अधिकारी वर्ग इस दिशा में सार्थक प्रयास करते तो ऐसी नौबत ही नहीं आती।

मरसाकोला, नरसुटोला व मोहड़ को भी पुनर्वास नीति
किसान परमेश्वर, देवजीराम, तिलकराम देशमुख, मानसिंह, लखराम, पूरनलाल, रामलाल, जिन किसानों की दल्ली में जमीन है, लेकिन मकान नहीं है। उसे पुनर्वास के अंतर्गत लिया जाए। बांध में प्रभावित गांव मरसकोला, नरसुटोला तथा मोहड़ को भी पुनर्वास नीति के अंतर्गत व्यवस्थापित किया जाए। प्रभावित किसानों को सभी सुविधाएं उपलब्ध कराने के बाद ही बांध का निर्माण किया जाए।

गांव और रकबा
प्रभावित गांव रकबा हेक्टेयर में

हुच्चेटोला 33.14 हेक्टेयर

कुदारी 57.56 हेक्टेयर

मरसकोला 236.11 हेक्टेयर

करतुटोला 4.99 हेक्टेयर

दल्ली 184.20 हेक्टेयर

मंगचुवा 37.59 हेक्टेयर

डुमरटोला 1.47 हेक्टेयर

बालोद। ग्राम मोहड़ के इसी स्थान पर बड़ा जलाशय बनाने का प्रस्ताव है।

1 मार्च को प्रकाशित खबर