पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें
  • Hindi News
  • National
  • Chhattisgarh And Odisha Government Face To Face For Mahanadi River Water

पानी के लिए ओडिशा सरकार आंदोलन पर उतारू, यहां महानदी इतनी सूख गई कि लोग पलायन कर रहे हैं

3 वर्ष पहले
  • कॉपी लिंक

रायगढ़/सरिया.   महानदी के पानी को लेकर ओडिशा सरकार ने एक बार फिर छत्तीसगढ़ सरकार का विरोध शुरू कर दिया है। पश्चिमी ओडिशा में पहले चरण का आंदोलन हो चुका है। अगले साल चुनाव हैं, ऐसे में मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने दूसरे चरण का आंदोलन शुरू किया है। दूसरी तरफ रायगढ़ जिले में ही महानदी लगभग सूख चुकी है। पुसौर, सरिया के सैकड़ों को गांव पर इसका असर है। जल स्तर घटने से खेती पर असर पड़ा है। छोटे किसान और मछुआरे काम की तलाश में गांव छोड़कर जा रहे हैं।


गांव में दो बस्तियां हैं, जहां मछली पकड़कर जीवनयापन करने वाले 300 से  अधिक लोग रहते है। माझी समुदाय के लोगों के सामने नदी में पानी नहीं होने के कारण रोजी-रोटी की समस्या खड़ी हो गई है। ग्राम सरपंच सुदर्शन सिदार ने बताया कि मांझी समुदाय के 200 से ज्यादा लोग पलायन कर चुके हैं। पिछले सालों के मुकाबले इस साल पानी बिल्कुल ही कम हो गया है। इससे मछुआरों के साथ छोटे किसान भी काम की तलाश में ओडिशा, झारखंड व उत्तर प्रदेश चले गए हैं।

घुटनों तक भी पानी नहीं बचा महानदी में 

छत्तीसगढ़ पर महानदी से ज्यादा पानी लेने का आरोप लगाकर ओडिशा सरकार आंदोलन शुरू कर रही है। भास्कर ने महानदी की स्थिति देखने के लिए बुधवार को सरिया, पुसौर के गांवों पहुंचकर नदी का हाल देखा, लोगों से बात की। आम दिनों पर लबालब भरी रहने वाली महानदी में अब घुटने भर पानी भी नहीं है। वहीं ज्यादातर हिस्से में रेत नजर आ रही है। पानी बीच में टापू की तरह दिखाई देता है। भास्कर की टीम पुसौर ब्लाक के पोरथ पहुंची। दोपहर 2 बजे महानदी-मांड नदी के संगम वाली जगह पर हम पहुंचे। यहां किनारों पर नाव रखी होती थी। आर-पार जाने वाले ग्रामीण, नौका विहार करने वाले पोरथ मंदिर के दर्शनार्थियों का यहां आना जाना रहता है। अब यहां नाव तो रखी है पर नाविक नहीं हैं। कुछ लोग नदी में चलकर पार जाते दिखे।

 

 

पेयजल का संकट

 महानदी से लगे गांव के लोगों का कहना है कि गांव में पेयजल और निस्तारी की भी भारी समस्या है। नदी में पानी सूखने के कारण उन्हें नदी के बीच जाकर गंदा जमा पानी ही पीना पड़ता है। महानदी के किनारे बसे गांवों में पेयजल सप्लाई नहीं है। प्राकृतिक जलस्रोत के कारण कोई दूसरा विकल्प नहीं है।

 

ओडिशा के सीएम ने कहा-भविष्य के लिए आंदोलन करें 

रायगढ़ जिले से लगे  ओडिशा के सीमावर्ती गांव चिखली से बुधवार को आंदोलन शुरू किया गया। इसी गांव से महानदी छग से ओडिशा में प्रवेश करती है। मुख्यमंत्री पटनायक ने लोगों से कहा कि ओडिशा की भावी पीढ़ी के भविष्य के लिए आंदोलन करें। सीएम पटनायक की ये सभा राजनीतिक थी। श्री पटनायक ने कहा कि महानदी के मामले में कोर्ट से ओडिशा को राहत मिली है। सुप्रीम कोर्ट में अपील के बाद एक ट्रिब्यूनल का  गठन किया गया है।

 

 

महानदी के पानी पर ओडिशा में तीन सालों से चल रहा है आंदोलन- पश्चिमी ओडिशा के सम्बलपुर में हीराकुद डेम महानदी के पानी पर ही निर्भर है। यहां बड़ा हाइड्रो प्रोजेक्ट है। इसके साथ ही बरगढ़, सम्बलपुर जिले के सैकड़ों गांव महानदी के पानी पर आश्रित हैं। खेती, निस्तारी, मछलीपालन, पेयजल के लिए ओडिशा को महानदी का पानी चाहिए। महानदी बचाओ महाभियान का नारा देकर बुधवार को ओडिशा सरकार ने आंदोलन का दूसरा चरण शुरू किया है। 

 

जल स्तर 50 फीट तक गिरा

पोरथ के राजकुमार प्रधान बताते हैं कि पहले महानदी के आसपास गांव में 50 फीट तक पानी होता था। किसान ट्यूबवेल से नदी से पानी लेने के साथ ही बोर के जरिए खेती करते थे। महानदी सूखने के बाद यहां जल स्तर 95 फीट तक हो गया। कई किसानों के बोर बेकार हो गए हैं।  63 वर्षीय सीताराम प्रधान कहते हैं, इसी नदी के किनारे उनका जीवन बीता है। लोग पीने के पानी से लेकर खेती तक के लिए नदी पर ही निर्भर रहते थे। पहले तक गर्मी में भी नांव चलती थी, नाव से ही ग्रामीण लोग नदी किनारे स्थित गावों में घूमने जाते थै। नदी में पानी तीन-चार सालों से कम हुआ है।

 

खबरें और भी हैं...