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ई-वेस्ट इकट्‌ठा करने 5 लाख में खरीदे 12 डस्टबिन सिर्फ 2 जगह लगाए, एजेंसी भी काम छोड़कर भागी

एक वर्ष पहले
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शहर में स्मार्ट सिटी के तहत बनाए गए प्रोजेक्ट्स का हाल बेहाल है। हालात ऐसे हैं कि शहर से निकलने वाले ई-वेस्ट के निपटारे के लिए पांच करोड़ रुपए प्रोजेक्ट जमीन पर नहीं उतर पाया है। इतना ही नहीं, निगम के जिम्मेदारों ने सर्वे कर 12 जगहों पर ई-डस्टबिन लगाने का लक्ष्य रखा था, जो कि सालभर में नहीं लग पाए हैं।

डीबी स्टार को जानकारी मिली कि शहर से निकलने वाले ई-वेस्ट का निपटारा नहीं किया जा रहा है। टीम ने इसकी पड़ताल की तो सामने आया कि इस प्रोजेक्ट के लिए डेढ़ करोड़ रुपए की राशि स्वीकृत की गई है। साथ ही निगम के जिम्मेदारों ने इसके तहत शहर की 12 जगहों में ई-डस्टबिन रखने का निर्णय लिया था। वहीं, डस्टबिन की खरीदी के लिए जिम्मेदारों ने पांच लाख रुपए खर्च कर डस्टबिन तो खरीद लिए हैं, लेकिन इन्हें अब तक चयनित जगहों में लगाया नहीं गया है। इसकी वजह से न तो शहर से निकलने वाला ई-वेस्ट इकट्‌ठा हो पा रहा है और न ही इसका निपटारा किया जा रहा है। इतना ही नहीं, यहां से निकलने वाले वेस्ट के निपटारे के लिए अनुबंधित की गई एजेंसी भी काम छाेड़ कर भाग निकली है।

सीधी बात

एसके सुंदरानी, जीएम,
स्मार्ट सिटी, रायपुर

{ ई-वेस्ट के निपटारे की व्यवस्था अब तक दुरुस्त नहीं हो पाई है?

– यह हमारा प्रोजेक्ट नहीं था। नगर निगम द्वारा लगवाया गया होगा। ऐसा कोई प्रोजेक्ट हमारा नहीं था।

{ तो जब यह प्रोजेक्ट अपना नहीं है, तो फिर स्मार्ट सिटी का लोगो कैसे लगा है?

– यह पूर्व आयुक्त रजत बंसल के समय का कार्यक्रम था। उस समय जो भी काम किया होगा उसमें स्मार्ट सिटी का लोगो लगाया गया है।

शहर से प्रतिदिन 150 क्विंटल ई-वेस्ट की रिपोर्ट


पर्यावरण विभाग की रिपोर्ट के अनुसार शहर से रोजाना 150 क्विंटल ई-वेस्ट निकलने की रिपोर्ट सौंपी गई थी। इसके बाद प्लानिंग के तहत इन्हें इकट्‌ठा करने और इनके निपटारे के लिए रिसाइकलिंग प्लांट लगाने की योजना बनाई गई थी। इसके बावजूद अब तक यह योजना धरातल पर नहीं पहुंच सकी है।

DB star investigation

निगम के अधिकारियों ने सर्वे के बाद स्मार्ट सिटी कार्यालय, निगम मुख्यालय, कलेक्टोरेट परिसर, गोल बाजार व जय स्तंभ चौक समेत कई जगहों पर इन्हें लगवाया। इसके बाद वहां से इन्हें हटा दिया गया है। इतना ही नहीं कई ई-वेस्टबिन अब भी निगम मुख्यालय में ही डंप हैं।

टोल फ्री नंबर भी बंद

प्रोजेक्ट की शुरूआत में वेस्ट बिन भर जाने या ज्यादा मात्रा में वेस्ट होने की सूचना देने के लिए टोल फ्री नंबर 1800-200-1990 नंबर जारी किया। जो अब कॉल करने पर बंद बता रहा है। इस पर निगम के अधिकारियों का कहना है कि कंपनी ने यह नंबर जारी किया था, जो अब काम छोड़कर जा चुकी है।

मेरी जानकारी में नहीं है मैं चेक करवा लेता हूं

- सौरभ कुमार, आयुक्त, नगर निगम, रायपुर

दस डस्टबिन कहां गए जिम्मेदारों को भी नहीं पता
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