सॉफ्टवेयर से नहीं जुड़े 123 पीयूसी सेंटर, कंट्रोल रूम भी अधूरा, इसलिए 20 हजार से ज्यादा वाहनों की जांच अटकी

News - रायपुर

Bhaskar News Network

Nov 11, 2019, 07:45 AM IST
Raipur News - chhattisgarh news 123 puc center control room not connected to software also incomplete so investigation of more than 20 thousand vehicles stuck
रायपुर
डीबी स्टार टीम को जानकारी मिली कि प्रदेश समेत रायपुर में (पीयूसी) पॉल्यूशन अंडर कंट्रोल के लिए सेंटर बनाया गया है, लेकिन यहां वाहनों की जांच के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति ही हो रही है।

वहीं परिवहन विभाग को वाहन फोर सॉफ्टवेयर से जोड़ा जाना था, ताकि प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों की जानकारी भी ऑनलाइन सर्वर के माध्यम से मिल सके, लेकिन सालभर बाद भी सॉफ्टवेयर से जोड़ा नहीं गया है, जबकि सारे कामकाज वहां ऑनलाइन कर दिए गए हैं। इतना ही नहीं, इसकी कमांडिंग भी कंट्रोल रूम से की जानी थी, लेकिन कमांडिंग का कार्य पूरा नहीं किया जा सका है। यही वजह है कि शहर में बिना पीयूसी वाले ज्यादातर वाहन चल रहे हैं। इन पर कार्रवाई ट्रैफिक विभाग और आरटीओ भी नहीं करता है।

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सांकेतिक चित्र

जानिए, क्यों सॉफ्टवेयर से नहीं जुड़ पाए सेंटर और किस तरह की गड़बड़ियां नहीं सुधार पाए

नंबरों का डेटा और टेंडर में देरी : वाहनों के नंबर ऑनलाइन किए गए हैं, लेकिन उसका डेटा जुटाकर एजेंसियों को दिया जाएगा। लिहाजा टेंडर में भी देरी होने की वजह से फोर सॉफ्टवेयर से नहीं जोड़ा गया। न ही उसकी कमांडिंग के लिए सेंटर बनाया गया।

20 हजार गाड़ियां बिना पीयूसी के : रायपुर शहर में दौड़ने वाले वाहनों का पहले पीयूसी टेस्ट करवाया गया। इस दौरान रायपुर शहर में 123 सेंटर खोले गए। इसी तरह प्रदेश में 250 सेंटर बनाया गया, लेकिन गाड़ियों की होने वाली जांच की जानकारी डेटा रिकॉर्ड में दर्ज नहीं है।

प्रदूषण प्रमाण पत्र देने की जानकारी भी ऑनलाइन नहीं

वाहनों के प्रदूषण की जांच सेंटर्स में कराई जाती है, लेकिन प्रदूषण प्रमाण पत्र गलत या सही दिए जा रहे हैं। उसकी जानकारी नहीं मिल पाती है। यही वजह है कि फोर सॉफ्टवेयर से सभी सेंटर्स को जोड़ा जा रहा है, ताकि समय पर जानकारी मिल सके। फिर भी प्रदूषण प्रमाण की मानकता की जांच नहीं हो पाती है।

यह वजह... जिसके चलते वाहनों की पीयूसी फेल

जिन सेंटर्स में जांच होती है, वहां रोज 10 से 15 वाहनों की जांच के दौरान 4 से 5 वाहनों के पीयूसी फेल हो जाते हैं। जांच करने वालों ने बताया कि ज्यादातर गाड़ियों की सर्विसिंग समय पर नहीं हो रही है। सर्विसिंग नहीं होने की वजह से गाड़ियों में कार्बन आने की शिकायत होती है।

प्रक्रिया जल्द पूरी कर ली जाएगी

 सॉफ्टवेयर से जोड़ने की प्रक्रिया चल रही है। इससे प्रदूषण फैलाने वाली गाड़ियों का पता चल सकेगा। फिर इसके बाद कार्रवाई भी शुरू होगी। - शैलाभ साहू, आरटीओ, रायपुर

वेबसाइट पर सिर्फ 4 डीलर्स की जानकारी

राजधानी रायपुर में चार डीलर्स को ही पीयूसी जांच की जिम्मेदारी दी गई है। इसमें ऑनलाइन वेबसाइट में जानकारी दी गई, उसमें चार सेंटर्स का जिक्र किया गया है लेकिन इन चार सेंटर्स पर भी 10 से 15 गाड़ियां पहुंच रही हैं। इनमें भी कुछ सेंटर्स में दोपहिया वाहनों के पीयूसी की जांच नहीं हो रही है।

सबसे ज्यादा वाहन रायपुर में

प्रदेश में सबसे ज्यादा वाहन रायपुर में ही हैं। यहां तीन लाख से ज्यादा दोपहिया वाहन हैं। इसके अलावा बस, ट्रक और चारपहिया वाहनों की संख्या भी हजारों में है। इन सभी गाड़ियों की पीयूसी जांच होती है, लेकिन इनके जांच के नाम पर भी खानापूर्ति की जा रही है। जिसके चलते प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों पर लगाम नहीं लग पा रही है।

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