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- Raipur News Chhattisgarh News 170 Years Ago The Soldiers Of Three Cantonments Were Guarding Raipur Only One Left After 1947
170 साल पहले तीन छावनी के जवान करते थे रायपुर की चौकसी,1947 के बाद एक ही बची
अंग्रेज अफसर लोगों की सुरक्षा को लेकर ज्यादा सजग रहे। यही कारण रहा कि 1857 के बाद रायपुर में तीन जगह छावनी बनवाईं, जहां से व्यापारियों के दस्तावेजों की जांच की जा सके।
राजधानी की ब्रिटिश काल में खास पहचान रही। इतिहासविद् डाॅ. प्रो. रमेन्द्रनाथ मिश्र बताते हैं कि 170 साल पहले रायपुर में प्रमुख बाजार स्थापित किए गए। जिसके चलते हर क्षेत्र के थोक व्यापारियों की सक्रियता यहां रही। उन दिनों फिरंगियों के खिलाफ क्रांतिकारियों ने शंखनाद किया। लिहाजा लोगों की सुरक्षा के साथ क्रांति की मशाल लेकर निकलने वाले युवाओं पर अंकुश लगाने के लिए तीन जगह पुलिस लाइन की स्थापना अंग्रेजों ने की। ताकि क्रांतिकारियों को आसानी से पकड़ा जा सके। इसके लिए उन्हें सैनिकों की जरूरत रही। उनके लिए बाजार और आबादी वाले इलाके में ही रहने और ड्यूटी की सुविधा दी गई। इस लिहाज से पुरानी बस्ती के टूरी हटरी, शारदा चौक और सिविल लाइन को छावनी बनाया गया।
सैनिकों की कई टुकड़ियां करती थीं गश्त
इतिहासविद् बताते हैं कि अंग्रेजों ने तीन जगह छावनी बनवाया। ताकि बाजार के साथ ही आबादी वाले क्षेत्रों में आसानी से निगरानी की जा सके। इसके लिए सैनिकों की टुकड़ी कोतवाली से लेकर आजाद चौक तक गश्त करती। बाजार से निकलने वाले व्यापारियों की निगरानी के लिए नाकों पर भी मुस्तैद किए जाता। इस दौरान वहां से निकलने वाले सभी कारोबारियों पर नजर रखी जाती। उनके द्वारा की गई खरीदी के दस्तावेजों की जांच करने व्यवस्था की गई।
आजादी के बाद किया व्यवस्था में बदलाव
1947 में देश को आजादी मिलने के बाद शहर की व्यवस्था में भी बड़ा बदलाव किया गया। जब कमिश्नरी लागू की गई तो रायपुर में नए थाने स्थापित किए गए। लिहाजा टूरी हटरी और शारदा चौक क्षेत्र में अंग्रेजों द्वारा बनवाई गई छावनी की व्यवस्था को भी खत्म किया गया। इनकी जगह थाना बनवा दिया गया। ताकि लोगों की समस्या और विवादों को आसानी से सुलझाया जा सके।
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