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सैटेलाइट कोचिंग के 300 एजुसेट सेंटर 10 करोड़ में बनाए, इनमें से 82 बंद, हर साल 20 लाख खर्च लेकिन उपलब्धि का कोई रिकार्ड नहीं

News - देश के नामी इंजीनियरिंग संस्थानों जैसे आईआईटी, ट्रिपल आईटी और एनआईटी में प्रवेश के लिए इम्तिहान (जेईई मेंस)...

Feb 15, 2020, 07:40 AM IST
Raipur News - chhattisgarh news 300 edusat centers of satellite coaching built for 10 crores out of which 82 closed 20 lakhs spent every year but no record of achievement

देश के नामी इंजीनियरिंग संस्थानों जैसे आईआईटी, ट्रिपल आईटी और एनआईटी में प्रवेश के लिए इम्तिहान (जेईई मेंस) जनवरी में खत्म हो गए, दूसरा चरण अप्रैल के शुरू में होगा लेकिन स्कूल शिक्षा विभाग ने अब भी कोचिंग शुरू करने का वक्त अप्रैल के अंत में ही रखा है, सारी परीक्षाएं खत्म होने के बाद। लाइव कोचिंग ही नहीं, सरकारी स्कूलों में सैटेलाइट से कोचिंग की 10 साल में स्थिति इतनी खराब हो चुकी है कि 82 सेंटर दो-दो साल से बंद हैं क्योंकि 300 एजुसेट सेंटर बनाए तो 10 करोड़ रुपए खर्च करके, लेकिन मेंटेनेंस ही नहीं किया। इन सेंटरों पर अब भी सालाना करीब 20 लाख रुपए खर्च किए जा रहे हैं। दिलचस्प बात ये है कि शिक्षा विभाग ने चाहे हायर सेंटर्स की कोचिंग हो या एजुसेट सेंटरों की, यह रिकार्ड ही नहीं रखा कि इतना खर्च करने के बावजूद इनसे कितने चयनित हुए हैं।

सैटेलाइट से पढ़ाई की योजना दस साल पहले यह ध्यान में रखकर बनाई गई थी कि सरकारी स्कूलों के छात्र भी बड़े इंजीनियरिंग व मेडिकल संस्थानों में पहुंचे। राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद यानी एससीईआरटी में एजुसेट का मुख्य केंद्र है। इसके तहत राज्य के सभी जिला और ब्लाक के कई विद्यालयों में सेंटर बनाया गया। बड़े संस्थानाें की प्रवेश परीक्षा खत्म होने के बाद यहां कोचिंग की शुरुआत होती है। इससे यह साफ है कि सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले जो भी बड़े संस्थानों में पहुंच रहे हैं उनमें इस कोचिंग से कोई मदद नहीं मिली। इसलिए ही एजुसेट के पास ही एेसा कोई आंकड़ा नहीं है कि अब तक कोचिंग से कितने छात्रों को फायदा मिला।

ज्यादातर सेंटरों में प्रसारण बंद

एजुसेट के माध्यम सेंटर बनाकर लाखों रुपए खर्च किए जा रहे हैं लेकिन अधिकांश सेंटरों में प्रसारण ही बंद है। इसकी वजह सिस्टम का खराब होना है, जो दो-दो साल से सुधारे नहीं जा सके हैं। भास्कर की पड़ताल में यह सामने आया कि करीब 80 से अधिक एजुसेट सेंटर महीनों से बंद हैं। कई सेंटर तो दो-तीन साल से बंद हैं। सिस्टम खराब हुआ तो उसे सुधारा नहीं गया। कवर्धा के जिला शिक्षा अधिकारी केएल. महिलांगे ने बताया कि यहां तीन-चार एजुसेट सेंटर खराब है। इसे ठीक करने के लिए एजुसेट के अफसरों को कहा गया लेकिन महीनों बाद भी सुधार नहीं हुआ। बजरंग दास शासकीय स्कूल, अभनपुर के प्राचार्य एम.मिंज ने बताया कि इस स्कूल में एजुसेट का सेंटर है लेकिन प्रसारण नहीं होता, क्योंकि महीनों से इसमें खराबी है।

बोर्ड परीक्षा के बाद ही कोचिंग : एजुसेट

एजुसेट के प्रभारी दीपांकर भौमिक का कहना है कि राज्य इंजीनियरिंग कॉलेज व मेडिकल कॉलेज की प्रवेश परीक्षा को ध्यान में रखते हुए कोचिंग दी जाती है। इसलिए बोर्ड परीक्षा खत्म होने के बाद कोचिंग शुरू होती है। इस बार भी बोर्ड परीक्षा खत्म होने के बाद एजुसेट की कक्षाएं लगेंगी। कोचिंग का फायदा कितने छात्रों को मिला, कितने छात्र बड़े संस्थानों में पहुंचे इसका आंकड़ा है।

किसी सरकारी एजेंसी को नहीं पता कि इतनी कोचिंग के बावजूद 10 साल में चयनित कितने?

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सैटेलाइट कोचिंग में छात्रों की दिलचस्पी कम

एजुसेट की सैटेलाइट काेचिंग में छात्राें की दिलचस्पी भी लगातार कम हो रही है। पड़ताल में पता चला कि अक्टूबर से प्रसारण शुरू होता है। इसके तहत बीच-बीच कक्षाएं लगती हैं। इस बार चुनाव की वजह से ज्यादातर कक्षाएं नहीं लगी। जिन स्कूलों में प्रसारण हो रहा है, वहां भी गिनती के छात्र ही रहते हैं। अमूमन ज्यादातर सेंटर खाली ही रहते हैं। इसलिए स्कूल भी इसके प्रति दिलचस्पी नहीं दिखा रहे हैं।

हजारों इंजीनियरिंग सीटें खाली
उसी के लिए दे रहे हैं कोचिंग


राज्य के इंजीनियरिंग कॉलेजों की अधिकांश सीटें खाली रहने लगी हैं। पिछले साल 8 हजार से ज्यादा इंजीनियरिंग सीटें खाली थीं, चार-पांच साल से हालत यही है, इसके बावजूद सरकारी एजेंसियां राज्य पीईटी के लिए धड़ल्ले से कोचिंग चला रही हैं। दिलचस्प बात ये है कि पीईटी मई में होती है और शिक्षा अफसरों का कहना है कि अप्रैल अंत में कोचिंग इसीलिए शुरू की जा रही है ताकि छात्रों को इंजीनियरिंग में दाखिले के लिए होने वाले इस एंट्रेंस टेस्ट में सीटें पाने के लिए टिप्स दे सकें।

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