साल की अरदास के बाद पूरी हुई सीमाओं में जकड़ी आस, सिख समाज की खुशियां दोगुनी

News - गुरुनानक देव जी के 550वें प्रकाश पर्व पर करतारपुर कॉरीडोर खुलने से सिख समाज की खुशियां दोगुनी हो गई हैं। यही वजह है...

Nov 10, 2019, 07:50 AM IST
गुरुनानक देव जी के 550वें प्रकाश पर्व पर करतारपुर कॉरीडोर खुलने से सिख समाज की खुशियां दोगुनी हो गई हैं। यही वजह है कि छत्तीसगढ़ से करतारपुर जाने वाले श्रद्धालुओं की संख्या 250-300 से बढ़कर अब डेढ़ हजार के करीब पहुंच गई है। 15 अक्टूबर के बाद से ही अलग-अलग जत्थों में सिख समाज के लोग पाकिस्तान जा रहे हैं। रविवार शाम 4.30 बजे भी 21 बोगियों में प्रदेशभर से लोग करतारपुर साहिब के दर्शन के लिए रवाना होने वाले है। इनमें ओड़िशा से भी श्रद्धालु शामिल हैं।

करतारपुर कॉरीडोर खुलने को लेकर सिखों में इसलिए उत्साह ज्यादा है क्योंकि इससे उनकी 72 साल पुरानी अरदास पूरी हो गई है। दरअसल, देश की आजादी यानी साल 1947 से ही पूरा सिख समाज अपनी रोज की अरदास में ईश्वर से यह मांगता आया है कि पंथ से बिछड़े सभी दर्शनीय स्थलों के दर्शन का सौभाग्य मिले। आखिरकार भारत और पाकिस्तान के बीच करतारपुर कॉरीडोर खुलने के बाद यह अरदास पूरी हो गई। यानी, सिख अब बिना वीजा सीधे करतारपुर साहिब गुरुद्वारे के दर्शन कर सकता है। हालांकि, पासपोर्ट अनिवार्य होगा। गुरुनानक देव जी के 550वें प्रकाश पर्व पर मिले इस तोहफे ने सिख समाज की खुशियां दोगुनी कर दी है। गुरुद्वारा प्रबंधन कमेटी के उपाध्यक्ष प्रीतपाल सिंह चंडोक का कहना है कि करतारपुर कॉरीडोर की सौगात दोनों देशों के बीच अमन-शांति बढ़ाने के मकसद से नेक पहल है। वीजा बनवाकर गुरुद्वारा दर्शन करने में लोगों को काफी परेशानी होती थी, लेकिन अब सभी सीधे जा सकेंगे। यह पूरे सिख समाज के लिए बड़ी खुशखबरी है।

भारत-पाकिस्तान की सीमा पर मौजूद डेरा बाबा नानक और सुल्तानपुर लोधी में चहल-पहल काफी बढ़ गई है। करतारपुर गुरुद्वारे के दर्शन के लिए हर घंटे सैकड़ों-हजारों की संख्या में श्रद्धालुओं का जत्था पहुंच रहा है। भारतीय श्रद्धालुओं के रहने-खाने की व्यवस्था इन्हीं दो जगहों पर ही की गई है। शनिवार को डेरा बाबा नानक में एक लाख तो सुल्तानपुर में लगाए गए कैंप में 3 लाख श्रद्धालु ठहरे थे। 13 नवंबर तक यहां आने वाले भक्तों की संख्या और बढ़ेगी क्याेंकि दुनियाभर से सिख भाई-बहन यहां पहुंच रहे हैं। गुरुनानक देव जी ने अपने जीवन के 17 साल यहीं बिताए थे और अंत में यहीं समाधि भी ली थी। इसी वजह से सिखों के लिए पवित्र स्थान है। पाकिस्तान सरकार सुबह 9 से शाम 6 बजे तक गुरुद्वारे का दर्शन करने दे रही है। इसके बाद भारत से आए लोगों को भारतीय बार्डर पर स्थित डेरा बाबा गुरुद्वारा और सुल्तानपुर पहुंचा दिया जा रहा है। वीजा लेकर आए श्रद्धालुओं को ही पाकिस्तान में रात रूकने की इजाजत दी गई है। करतारपुर गुरुद्वारे के दर्शन होने से भारतीय सिखों में इतनी खुशी है कि छुट-पुट बंदिशों से उन्हें कोई परेशानी नहीं। पंजाब सरकार ने भी इस उत्सव को खास बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ी है। पूरे पंजाब में 15 सौ बसें चलवाई जा रहीं हैं जिस पर निशुल्क यात्रा करके कोई भी श्रद्धालु कॉरीडोर तक पहुंच सकता है। ये पूरे सिख समाज के लिए बहुत सुनहरा मौका है। हमने पूरी जिंदगी इस लम्हे का इंतजार किया है। जीवन में इससे बेहतर समय कुछ और नहीं हो सकता क्योंकि अब हम उस गुरुद्वारे के दर्शन कर पा रहे हैं, जिसे 72 साल से अपनी इबादत में मांगते आए हैं।

(रायपुर निवासी गुरमीत सिंह अमृतसर की शिराेमणि गुरुद्वारा प्रबंधन कमेटी में छत्तीसगढ़, ओडिशा और आंध्रप्रदेश के प्रतिनिधि हैं। छत्तीसगढ़ सिख मिशन का संचालन भी करते हैं।)

इसलिए सिखों के लिए महत्वपूर्ण है करतारपुर

करतारपुर गुरुद्वारा साहिब के दर्शन के हर साल बड़ी संख्या में हिंदुस्तान से श्रद्धालु पाकिस्तान जाते हैं। इसका संबंध सिखों के पहले गुरु गुरुनानक देव जी से जुड़ा है। गुरुनानक जी ने रावी नदी के किनारे एक नगर बसाया और यहां खेती कर उन्होंने ‘नाम जपो, किरत करो और वंड छको’ (नाम जपें, मेहनत करें और बांट कर खाएं) का संदेश दिया था। जानकारी के मुताबिक गुरुनानक देव ने भाई लहणा जी को गुरु गद्दी भी इसी जगह सौंपी थी। उन्हें दूसरे गुरु अंगद देव के नाम से जाना जाता है और आखिर में गुरुनानक देव जी ने यहीं समाधि भी ली।

करतारपुर से गुरमीत सिंह की कलम से...

रोज पढ़ी जाने वाली अरदास की लाइन ये...

सिख समाज में रोज की पूजा के बाद जब अरदास की लाइनें पढ़ी जाती है तो उसकी आखिरी पंक्तियां होती हैं... हे अकाल पुर्क! जिन गुरुधामों से हमारे को बिछोड़ा गया है, उनके खुले दर्शन-दीदान और सेवा संभाल का दान अपने खालसा को बख्शो। यानी बंटवारे के वक्त जो गुरुद्वारे पाकिस्तान में छूट गए हैं उनकी सेवा और देखरेख का जिम्मा हमें दीजिए। उनके दर्शन करने का माैका दीजिए। देश के लाखों गुरुद्वारों में रोज समाज के करोड़ों लोग ये प्रार्थना करते हैं।

करतारपुर साहिब, पाकिस्तान

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