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संघर्षों से लड़कर शोभा ने बच्चों को बनाया काबिल, नशे के खिलाफ आवाज बुलंद कर रही हैं पार्वती, मिला सम्मान

एक वर्ष पहले
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on women\\\'s day

नशे से बिखर गया था परिवार

मेरा हंसता-खेलता परिवार सिर्फ नशे की भेंट चढ़ गया। नशे के कारण पति का व्यवहार ठीक नहीं रहता था। फिर भाई-बहनों और बच्चों की जिम्मेदारी मैंने खुद उठाई। फिर सोचा कि नशे के कारण कई परिवार इसी तरह बिखर जाते हैं। तय किया महिलाओं को नशे के खिलाफ आवाज उठाने और महिलाओं के उत्थान के लिए काम करूंगी। ये सिलसिला 25 सालों से जारी है। इसमें पारिवारिक वजहों से पीड़ित महिलाओं को कानूनी हक दिलाने, सुरक्षा से जुड़े कार्य कर रही हूं।- पार्वती शर्मा

अकेले लड़ी जिंदगी की लड़ाई

मैं गवर्नमेंट स्कूल में लाइब्रेरियन हूं। पति के गुजर जाने के बाद दो बेटे और दो बेटियों की जिम्मेदारी मुझपर आ गई। पति का साथ छूटते ही अपनों से कम ही मदद मिली। ऐसे में बच्चांे को काबिल बनाना संघर्षभरा था। हिम्मत नहीं हारी और मुसीबतों से लड़कर उन्हें सक्षम बनाया। सब ठीक चल रहा था लेकिन दो साल पहले बड़े बेटे की मृत्यु ने मुझे दोबारा तोड़ दिया। अब बहू को बेटी मानकर उसकी दोबारा शादी करना चाहती हूं ताकि उसका घर फिर बस सके।- शोभा शर्मा

अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर अावाम-ए-हिंद सोशल वेलफेयर कमिटी ने मेडिकल, लॉयर, टीचर, जर्नलिज्म, सोशल वर्क जैसी फील्ड में बेस्ट वर्क करने वालीं महिलाओं को सम्मानित किया। 15 साल पहले कैंसर के कारण अपने पति को खो चुकीं शोभा शर्मा ने संघर्षों का सामना कर दो-दो बेटे और बेटियों को पढ़ा-लिखाकर काबिल बनाया है। समारोह में उन्हें सम्मानित किया गया। उनके अलावा नशे के खिलाफ महिलाओं को आवाज बुलंद करने की हिम्मत देने वालीं गुढ़ियारी निवासी पार्वती शर्मा को भी शॉल और श्रीफल से नवाजा गया। समारोह में अपनी-अपनी फील्ड में बेहतर काम करने वालीं 30 से ज्यादा महिलाओं ने अपने अनुभव साझा किए। पढ़िए दो महिलाओं के संघर्ष की कहानी।
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