दिल के सरकारी अस्पताल में कार्डियोलॉजी विभाग को नए डॉक्टर नहीं मिले, भर्ती अटकी

News - एडवांस कार्डियक इंस्टीट्यूट (एसीआई) के कार्डियो थोरेसिक एंड वेस्कुलर सर्जरी (सीटीवीएस) विभाग के लिए 195 नए पद...

Bhaskar News Network

Oct 13, 2019, 07:26 AM IST
Raipur News - chhattisgarh news cardiology department did not find new doctors in the government hospital of the heart recruitment stuck
एडवांस कार्डियक इंस्टीट्यूट (एसीआई) के कार्डियो थोरेसिक एंड वेस्कुलर सर्जरी (सीटीवीएस) विभाग के लिए 195 नए पद स्वीकृत किए गए हैं। इनमें प्राध्यापक से लेकर पीडियाट्रिशियन, एनीस्थीटिस्ट, परफ्यूजिनिस्ट से लेकर नर्सिंग व पैरामेडिकल स्टाफ शामिल है। इधर कार्डियोलॉजी विभाग में एक भी पद को मंजूरी नहीं मिली है। इस विभाग ने सेटअप का प्रस्ताव बनाकर शासन को भेजा था।

एसीआई 1 नवंबर 2017 को अस्तित्व में आया और 31 अक्टूबर को दो साल पूरे हो जाएंगे। जुलाई में सीटीवीएस विभाग के लिए जब 195 नए पद की मंजूरी मिली तो लगा कि कार्डियोलॉजी विभाग के लिए भी नया सेटअप मंजूर हो जाएगा, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। 195 पदों में भर्ती के लिए पांच करोड़ खर्च होने की संभावना है। अभी सीटीवीएस विभाग में दो नियमित असिस्टेंट सर्जन सेवाएं दे रहे हैं। महीने भर पहले हार्ट लंग मशीन तो आ गई, लेकिन 102 उपकरण अभी तक नहीं आए हैं। इस वजह से बायपास व आेपन हार्ट सर्जरी नहीं हो पा रही है। एसीआई में सीटीवीएस व कार्डियोलॉजी विभाग संचालित हो रहा है, जहां गिनती के डॉक्टर, नर्सिंग व पैरामेडिकल स्टाफ काम कर रहा है। सीटीवीएस विभाग में पहले से 57 पद स्वीकृत है। अब नए पद को मिलाकर 252 हो गए हैं। सीटीवीएस विभाग के एचओडी डॉ. कृष्णकांत साहू ने बताया कि सेटअप में कार्डियक सर्जन व कार्डियक एनीस्थिसिया के प्रोफेसर, एसोसिएट व असिस्टेंट प्रोफेसर, सीनियर व जूनियर रजिस्ट्रार, आईसीयू स्पेशलिस्ट पीडियाट्रिशियन व कार्डियोलॉजिस्ट समेत फिजिशियन असिस्टेंट के पद शामिल हैं। कार्डियोलॉजी विभाग में एक एसोसिएट प्रोफेसर कार्यरत हैं। इस विभाग को भी सीटीवीएस जैसे फैकल्टी व स्टाफ की जरूरत है।

डीएम कोर्स शुरू करने का प्रस्ताव है, लेकिन जरूरी फैकल्टी व स्टाफ की संख्या नहीं बढ़ रही है। एसीआई में आईसीयू के साथ क्रिटिकल केयर यूनिट है। हार्ट के मरीजों के लिए 30 से 40 बेड वाला जनरल वार्ड की जरूरत पड़ेगी। इसके लिए अंबेडकर अस्पताल में वार्ड है, जिसे हार्ट के मरीजों के लिए उपयोग किए जाने की संभावना है।

सीजीएमएससी से नहीं मिली एनओसी : डीएमई कार्यालय ने बायपास सर्जरी के लिए 100 से ज्यादा उपकरण खरीदी में हो रही देरी की वजह से अब इसकी खरीदी खुद करने का फैसला लिया है। इसके लिए एक माह पहले सीजीएमएससी को एनओसी के लिए चिट्‌ठी लिखी गई है। फिलहाल इसका जवाब नहीं आया है। वहां संपर्क करने पर यही कहा जा रहा है कि उपकरणों की सूची बनाई जा रही है। एसीआई शुरू होने के दो महीने बाद हार्ट लंग मशीन आई है। जबकि इसके लिए बजट पहले ही मंजूर कर लिया गया था। मशीनें नहीं लगने की वजह से मरीज निजी अस्पतालों में बायपास सर्जरी कराने के लिए मजबूर हैं।

साढ़े पांच करोड़ की मशीन एक महीने से धूल खा रही

चार करोड़ की ईपी यानी इलेक्ट्रो फिजियोलॉजी मशीन एसीआई में एक माह पहले पहुंच चुकी है। इस मशीन का उपयोग असामान्य धड़कन को सामान्य करने के लिए किया जाता है। वहीं 1.34 करोड़ की हार्ट लंग मशीन भी एक माह पहले पहुंच चुकी है। बाकी मशीन नहीं आने के कारण बायपास सर्जरी शुरू नहीं हो पा रही है। डॉक्टरों का दावा है कि ईपी मशीन काफी एडवांस व बड़ी है। प्रदेश के किसी भी निजी अस्पताल में इतनी एडवांस मशीन नहीं है। इस मशीन को कैथलैब वाले कमरे में लगाया जाना है। कमरे का रिनोवेशन अभी अधूरा है। कैथलैब शिफ्टिंग के लिए मिला फंड लैप्स हो चुका है और नया फंड मिला नहीं है। इस वजह से यह मशीन नहीं लग पाई।


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