साइडिंग में कोयला खत्म, इसलिए नहीं हो रही डिमांड पूरी, पिछड़ रहा डिस्पैच

Korba News - कोरोना वायरस के संक्रमण व कोयले की कमी के बीच रेलवे के सामने टारगेट पूरा करना एक चुनौती बन गया है। स्टेशन के साथ...

Mar 27, 2020, 07:01 AM IST
Korba News - chhattisgarh news coal ends in siding so demand is not complete dispatch lagging behind

कोरोना वायरस के संक्रमण व कोयले की कमी के बीच रेलवे के सामने टारगेट पूरा करना एक चुनौती बन गया है। स्टेशन के साथ सभी कोल साइडिंग में 5 से 6 एमटी रैक खड़े हंै। कोयले की डिमांड भी है, जिसे पूरा करने की कोशिश में जुटा रेल प्रबंधन भी परेशान है। क्योंकि साइडिंग में कोयला नहीं होने के कारण डिस्पैच का ग्राफ डाउन हो रहा है। सबसे अधिक समस्या एसईसीएल के कुसमुंडा क्षेत्र से आ रही है। वहां कोयला उत्पादन तो हो रहा है, लेकिन रेलवे की डिमांड पूरा नहीं हो रही है। बीते कुछ दिनों का आंकड़ा यह बताता है कि एसईसीएल ने कितना उत्पादन किया और रेलवे को डिस्पैच के लिए कितना उपलब्ध कराया। जिसके कारण डिस्पैच में पिछड़ते जा रहा है। दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे के बिलासपुर जोन का कोरबा रेलखंड कोयला डिस्पैच के नाम से हमेशा सुर्खियों में रहता है। वित्त वर्ष के अंतिम पखवाड़े में डिस्पैच का आंकड़ा 55 रैक से अधिक करने की कोशिश में रेलवे का पूरा अमला जुटा हुआ है, लेकिन खदानों से उत्पादित कोयला साइडिंग तक डिमांड के अनुरूप नहीं पहुंचने से उनकी चिंता बढ़ गई है। बीते कुछ दिनों तक न्यू कुसमुंडा-2 साइडिंग में खदानों से कोयले का एक ढेला भी नहीं पहुंचा। ऐसे में रेल प्रबंधन परेशान है।

रॉ कोयले की डिमांड
नहीं हो रही पूरी


रेलवे के एक अधिकारी ने नाम नहीं छापने की शर्त पर बताया कि रॉ कोयले की डिमांड अधिक है। जो पूरा नहीं हो पा रही है। कोल उत्पादन कंपनियां अगर जरूरत के मुताबिक रॉ कोयला उपलब्ध कराएं तो डिस्पैच का ग्राफ तेजी से बढ़ सकता है। लेकिन ऐसा नहीं होने से हम पिछड़ रहे हैं। जबकि रॉ कोयला रोड सेल व वॉशरी को आसानी से सुलभ करा दिया जाता है। यह रेलवे तक नहीं पहुंच पा रहा।

मैन पावर की कमी के कारण बन रही स्थिति

22 मार्च को कुसमुंडा क्षेत्र की साइडिंग से मात्र 2 रैक कोयला ही मिला। जबकि 25 मार्च को ट्रांसपोर्टिंग शून्य हो गई थी। 22 मार्च से पहले यहां प्रति दिन 6-7 रैक कोयला डिस्पैच हो रहा था। कोयले व मैन पॉवर की कमी के कारण यह स्थिति निर्मित हो रही है। इतना ही नहीं जूनाडीह-1 नंबर साइडिंग से महज 2 रैक कोयला मिल पा रहा है, जबकि 5 दिन पहले तक वहां से 6 रैक कोयला डिस्पैच हो रहा था।

बीते 5 दिन का उत्पादन और रेलवे को डिस्पैच के लिए मिला कोयला

कुसमुंडा क्षेत्र (उत्पादन व डिस्पैच टन में)

दिनांक उत्पादन डिस्पैच (रेल मार्ग से)

25 मार्च 87200 51700

24 मार्च 95500 61200

23 मार्च 88400 59600

22 मार्च 115700 85400

21 मार्च 108700 76700

कोयले का उत्पादन तो हो रहा है, लेकिन रेलवे की डिमांड पूरी नहीं हो पा रही

हर आधे घंटे में साइडिंग से निकलने वाली लोड मालगाड़ी अब की स्थिति में 3 से 4 घंटे में भी बड़ी मुश्किल से निकल रहीं हैं। एआरएम मनीष अग्रवाल ने बताया कि विषम परिस्थिति के बाद भी रेलवे स्टाफ कोयला लदान बढ़ाने में जुटा हुआ है। साइडिंग में जैसे-जैसे कोयले का स्टाक बढ़ रहा है वैसे-वैसे डिस्पैच भी बढ़ता जा रहा है।


3-4 घंटे में निकल पा रही मालगाड़ी

नोट: शेष कोयला रोड सेल व वॉशरी को उपलब्ध कराया जाता है।

न्यू कुसमुंडा-2 साइडिंग में एमटी रैक, पर नहीं है कोयला।

गेवरा क्षेत्र (उत्पादन व डिस्पैच टन में)

दिनांक उत्पादन डिस्पैच (रेल मार्ग से)

25 मार्च 220000 42200

24 मार्च 221000 44800

23 मार्च 219000 28600

22 मार्च 233000 45800

21 मार्च 226000 22200

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