कांग्रेस का संघीय ढांचे पर प्रहार : रमन इन्हें संविधान की समझ ही नहीं : मोहन

News - भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष व पूर्व सीएम डॉ. रमन सिंह ने एनआईए एक्ट के खिलाफ रिट दायर किए जाने पर कहा है कि प्रदेश...

Jan 16, 2020, 07:35 AM IST
Raipur News - chhattisgarh news congress strikes the federal structure raman does not understand the constitution mohan
भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष व पूर्व सीएम डॉ. रमन सिंह ने एनआईए एक्ट के खिलाफ रिट दायर किए जाने पर कहा है कि प्रदेश सरकार के दोहरे राजनीतिक चरित्र का परिचय मिल रहा है। प्रदेश में जबसे कांग्रेस की सरकार आई है, वह संघीय ढांचे पर लगातार प्रहार कर संवैधानिक प्रावधानों की अवहेलना पर उतारू है।

सीबीआई को प्रदेश में प्रतिबंधित करने के अलावा परिवहन एक्ट, सीएए और एनपीआर के मुद्दों पर भी राज्य सरकार, केंद्र से सीधा टकराव लेने की राजनीतिक अमर्यादा का प्रदर्शन कर चुकी है और अब एनआईए को उसके काम से रोकने की कोशिश कर प्रदेश सरकार कई संदेहों को भी जन्म देने का काम कर रही है। डॉ. सिंह ने कहा कि प्रदेश सरकार का यह कहना हैरतभरा है कि एनआईए एक्ट उस संघीय भावना के खिलाफ है जिससे केन्द्र और राज्य अपने संबंधित अधिकार क्षेत्र में स्वतंत्र माने जातेे हैं। जो सरकार तमाम राजनीतिक और संवैधानिक प्रावधानों की अवहेलना कर संघीय ढांचे को चुनौती दे रही है, वह अब संघीय ढांचे को लेकर सियासी नौटंकी पर उतारू हो रही है। डॉ. सिंह ने कहा कि केन्द्र में कांग्रेस के ही शासनकाल में बने एक्ट के खिलाफ अब प्रदेश सरकार का एनआईए को लेकर प्रलाप समझ से परे है।

15 साल में प्रशासनिक ढांचा क्याें गड़बड़ाया

रमन सिंह के बयान पर पलटवार करते हुए पीसीसी अध्यक्ष मोहन मरकाम ने कहा है कि रमन सिंहजी को संविधान और संसदीय ढांचे की समझ ही नहीं है। उनके इस बयान से खुलासा हो गया है कि 15 वर्षों के कार्यकाल में छत्तीसगढ़ में प्रशासनिक ढांचा क्यों गड़बड़ाया? रमन सिंह की संविधान के प्रति यही नासमझी इस गड़बड़ी के लिये जिम्मेदार है। वहीं मोदी सरकार ने अहंकार के चलते केन्द्रीय जांच एजेंसी के दुरूपयोग के उद्देश्य से ही संविधान में मनमाने विधि विरूद्ध संशोधन किये हैं। संघीय व्यवस्था और राज्य सरकार के क्षेत्राधिकार पर अतिक्रमण के खिलाफ छत्तीसगढ़ सरकार का सर्वोच्च न्यायालय जाना सर्वथा उचित एवं आवश्यक है। मरकाम ने कहा कि संविधान की सही व्याख्या सर्वोच्च न्यायालय का कार्य है। छत्तीसगढ़ सरकार यदि अपने संवैधानिक अधिकारों के लिये न्यायालय के शरण में गयी है तो यह तो संविधान और संघीय ढांचे के प्रति कांग्रेस सरकार के सम्मान का जीता जागता सबूत है। यदि राज्य सरकार अपने किसी अधिकार की स्थापना के लिये न्यायालय जाती है तो यह केन्द्र सरकार से टकराव नहीं है। याचिका दायर करने को रमन सिंह जी द्वारा सर्वोच्च न्यायालय में राज्य के अधिकारों के लिये संघीय ढांचे पर प्रहार निरूपित करना कहा जाना रमन सिंहजी का बेहद सतही एवं गलत बयान है।

कांग्रेस के महामंत्री शैलेश नितिन त्रिवेदी ने यह मामला केंद्र सरकार द्वारा लगातार संघीय अवधारणा के खिलाफ काम करने से जुड़ा हुआ है। इस मामले में गंभीरता से विचार करने के बाद इस याचिका की आवश्यकता पड़ी है ताकि राज्यों के अधिकारों पर एनआईए एक्ट की आड़ लेकर जो अतिक्रमण केंद्र सरकार के द्वारा किया जा रहा है भविष्य में न किया जा सके। त्रिवेदी ने कहा है कि झीरम मामले में एनआईए को जब जांच सौंपी गई थी उस समय राज्य की भाजपा सरकार के नोडल अफसरों ने लगातार जांच में बाधाएं डाली।



और जब केंद्र में मोदी सरकार बनी तो जांच की दिशा ही बदल गई।

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