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एक साल में नहीं हो सकी फायर फाइटर सिस्टम की जांच, अब अफसरों को नोटिस देने की तैयारी
अफसरों की एक दर्जन से ज्यादा टीम भी नहीं कर पाई जांच पूरी
राजधानी के सभी बड़े कांप्लेक्स, अपाटर्मेंट अाैर कमर्शियल शापिंग सेंटराें में फायर फाइटर सिस्टम की जांच शुरू नहीं हो सकी है। एक साल पहले आदेश जारी होने के बाद से अब तक जांच करने की दिशा में कोई प्रयास नहीं किए गए अलबत्ता प्रशासन ने सभी सरकारी विभागों के अफसरों की एक दर्जन से ज्यादा टीमें जरूर बनाई थी। इन सभी अफसरों को जोनवार शहर के छोटे-बड़े भवनों में लगे फायर फाइटिंग सिस्टम की जांच करनी थी। जांच के बाद कलेक्टर को रिपोर्ट सौंपी जानी थी। अब इस मामले में होली के बाद उन सभी अफसरों को कारण बताओ नोटिस जारी करने की तैयारी है, जिन्होंने अपने क्षेत्र के भवनों की जांच नहीं की। जवाब से संतुष्ट नहीं होने पर उन पर अनुशासनात्मक कार्रवाई भी की जाएगी।
जिला प्रशासन को शिकायत मिली है कि शहर अधिकतर भवनों में फायर फाइटर सिस्टम कंडम हो चुके हैं। कुछ पुराने के होने के कारण पड़े पड़े डंप हुए और कुछ को अपडेट नहीं किए जाने के कारण वे खराब हो गए। शिकायत के बाद इन सभी बड़े भवनों के जिम्मेदारों को नोटिस देकर सिस्टम ठीक करने को कहा गया था। प्रशासन की नोटिस का भी ज्यादातर भवन के मालिकों और उनके जिम्मेदारों पर कोई असर नहीं पड़ा। कई भवन ऐसे हैं जहां नोटिस मिलने के बाद भी सिस्टम अपडेट नहीं किया गया है। ऐसे ही सभी भवनों की जांच अफसरों की टीम को दोबारा करनी थी, लेकिन अफसर खुद इसे गंभीरता से नहीं ले रहे हैं। कई टीम के अफसर भवनों की जांच करने फील्ड में नहीं उतरे। इससे कलेक्टर भी नाराज हैं। उन्होंने इसकी मॉनिटरिंग का जिम्मा एडीएम विनीत नंदनवार को दी है। उन्हें सभी टीम से जांच रिपोर्ट लेकर कलेक्टर को सौंपनी है। अफसरों को जांच रिपोर्ट बनाने के लिए फरवरी तक का समय दिया गया था। लेकिन तय समय बीतने के बाद रिपोर्ट जमा नहीं की गई।
अलग-अलग जांच को लेकर भी कई सवाल
राजधानी के भवनों में फायर फाइटर सिस्टम लगे हैं या नहीं इसकी जांच के लिए पहले निगम अफसरों की टीम बनाई गई। इस टीम ने जांच भी शुरू कर दी। कुछ महीनों तक यह जांच भी चली, लेकिन बाद में प्रशासन ने निगम और प्रशासन के अफसरों की टीम बना दी। इसके बाद भवनों की जांच फिर से शुरू हो गई। एक ही क्षेत्र में भवनों की अलग-अलग जांच करने में भी कई सवाल खड़े हुए। यही वजह है कि जिस भवन की पहले जांच हो गई थी उसकी दोबारा नहीं की गई। इसके कारण भी तय समय में जांच रिपोर्ट नहीं बन पाई।