बेंगलुरु में फंसी दंतेवाड़ा की बेटी, सीआरपीएफ ने भाई से मिलाया

Bastar Jagdalpur News - जब देश में आपात स्थिति होती है, जवान जरूरतमंदों का सहारा बनते हैं। नक्सलगढ़ दंतेवाड़ा में तो सीआरपीएफ टीम...

Mar 27, 2020, 06:46 AM IST
Dantewada News - chhattisgarh news dantewada39s daughter trapped in bengaluru crpf joins brother

जब देश में आपात स्थिति होती है, जवान जरूरतमंदों का सहारा बनते हैं। नक्सलगढ़ दंतेवाड़ा में तो सीआरपीएफ टीम ग्रामीणों का दिल जीत ही रही है, लेकिन दंतेवाड़ा के लोगों की आपात स्थिति में दूसरे राज्यों में भी मदद कर रही है। एक ऐसा ही मामला कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु से सामने आया है। कर्फ्यू और लॉक डाउन के बाद बेंगलुरु में फंसी दंतेवाड़ा की युवती शिल्पा सरकार की सीआरपीएफ के जवानों ने मदद कर उसे भाई के पास सुरक्षित पहुंचाया। शिल्पा ने जवानों के साथ खुद की फोटो भास्कर से शेयर की और पूरी कहानी बताई।

दरअसल शिल्पा बेंगलुरु की एक कम्पनी में जॉब करती है। उसका भाई भी बेंगलुरु में ही है। वह बोम्मनाहल्ली में रहती है। जबकि भाई बेंगलुरु के व्हाइट फील्ड में। दूरी 21 किमी है। शिल्पा पीजी में रहती है। बेंगलुरु में कोरोना संक्रमण फैलने के बाद भी ये दोनों ने दंतेवाड़ा नहीं आने का निर्णय लिया था।

बेंगलुरु में शिल्पा की मदद करने वाले सीआरपीएफ ग्रुप सेंटर के डीआईजी सानन्द कमल ने बताया कि सूचना मिली थी कि एक बेटी को मदद की जरूरत है। बेटी की सुरक्षा को देखते हुए जवानों को भेज उनकी मदद की। सीआरपीएफ हमेशा देशवासियों के सहयोग के लिए तत्पर है।

पीजी खाली कराया जा रहा था, समझ नहीं आया-कैसे जाऊं

कोरोना का संक्रमण जैसे ही फैलना शुरू हुआ, मां- पिता ने दंतेवाड़ा आने को कहा, लेकिन मैं इसलिए नहीं आई क्योंकि मेरा दंतेवाड़ा सुरक्षित है। बेंगलुरु में कोरोना का प्रकोप है। मैं बेंगलुरु से यात्रा कर दंतेवाड़ा आती, इस बीच कई लोगों से मेरा सम्पर्क होता। मेरे साथ ही मेरे दंतेवाड़ा में संक्रमण न आ जाए इसलिए मैंने दंतेवाड़ा नहीं आने का निर्णय लिया। जब 21 दिन के लॉक डाउन की घोषणा हुई, तो पीजी भी खाली कराया जाने लगा। मेरे साथ वाले सभी अपने- अपने घर जाने लगे मैं बहुत परेशान थी। ऐसे हालातों में बेंगलुरु से दंतेवाड़ा आ ही नहीं सकती। भाई ने अपने पास बुलाया लेकिन लॉक डाउन के कारण वहां तक जाना भी सम्भव ही नहीं था। रातभर नहीं सोई दंतेवाड़ा में माता- पिता, बेंगलुरु में भाई चिंतित थे। मेरा भी इसी चिंता से रो-रोकर बुरा हाल था। सीआरपीएफ के अधिकारियों को मेरे बारे में जानकारी मिली, तो मुझे सुरक्षित भाई के घर तक पहुंचाया। मेरा सारा भय उस वक्त खत्म हुआ जब लॉक डाउन के हालात में जवान मेरे साथ थे। बातचीत में पता चला जवान सीआरपीएफ ग्रुप सेंटर बेंगलुरु के हैं। ग्रुप सेंटर के अधिकारी व जवानों की मैं आभारी हूं।

जैसा कि शिल्पा ने दैनिक भास्कर को बताया

यहां हालत खराब है, फिर भी लोग घर से निकल ही रहे हैं


शिल्पा ने बताया कि बेंगलुरु में कोरोना के प्रकोप के कारण हालत खराब है। मैं जिस जगह रहती हूं वहां लोग अब भी घरों से बाहर घूम रहे हैं इसलिए खतरा और बढ़ गया है। जब तक हालात पूरी तरह सही नहीं होते, दंतेवाड़ा नहीं आऊंगी।

दंतेवाड़ा। बेंगलुरु में जवानों के साथ
दंतेवाड़ा की युवती शिल्पा।

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