- Hindi News
- National
- Kendri News Chhattisgarh News Demand For Caste Census And Population Control Law Again Arose
फिर उठी जातिगत जनगणना और जनसंख्या नियंत्रण कानून की मांग
दो से ज्यादा बच्चों पर सरकारी सुविधा न मिले: भाजपा सांसद
देश में जातिगत जनगणना और प्रभावी जनसंख्या नियंत्रण कानून बनाने की मांग शुक्रवार को फिर संसद में उठी। राज्यसभा में समाजवादी पार्टी के विशंभर प्रसाद निषाद ने 2021 की जनगणना जातिवार कराए जाने और ओबीसी आरक्षण में क्रीमी लेयर की सीमा खत्म करने की मांग की। उन्होंने कहा कि देश में ओबीसी की आबादी 54% से अधिक है। 27% आरक्षण होने के बावजूद विभिन्न सेवाओं में उनका प्रतिनिधित्व काफी कम है। भारत में आखिरी बार जातिगत जनगणना 1931 में हुई थी।
वहीं, भाजपा सांसद हरनाथ सिंह यादव ने जनसंख्या नियंत्रण कानून लाने की मांग की। उन्होंने कहा कि जनसंख्या विस्फोट से संसाधनों पर दबाव बढ़ा है। इससे न सिर्फ बेरोजगारी बढ़ी है, बल्कि हर स्थान पर भीड़ ही दिखती है। 1951 में देश की आबादी 10 करोड़ 38 लाख थी जो 2011 में 121 करोड़ के पार पहुंच गई और 2025 तक 150 करोड़ के पार पहुंचने का अनुमान है। जनसंख्या गुणांक में बढ़ती है जबकि संसाधनों में कम बढ़ोतरी होती है। सरकार को ऐसा जनसंख्या नियंत्रण कानून बनाना चाहिए जो ‘हम दो हमारे दो\\\' पर आधारित हो और इसका पालन नहीं करने वालों को हर तरह की सुविधाओं से न सिर्फ वंचित करना चाहिए बल्कि किसी भी प्रकार के चुनाव लड़ने से भी रोका जाना चाहिए।
रिकॉर्ड: बिना लंच-डिनर ब्रेक के 12 घंटे तक चली लोकसभा की कार्यवाही
बजट सत्र के दौरान गुरुवार को लोकसभा में ऐतिहासिक समय तक कार्यवाही चलती रही। गुरुवार को बिना लंच और डिनर ब्रेक के लगातार 12 घंटे तक कामकाज हुआ। बजट सत्र के दूसरे भाग में इस साल की सबसे लंबी कार्यवाही लोकसभा में रात 11 बजकर 57 मिनट तक चलती रही, जो सामान्य कार्यवाही से करीब 6 घंटे ज्यादा है। लोकसभा ने गुरुवार को देर रात तक काम किया, जिसमें अनुदान मांगों पर बहस के दौरान 12 घंटों से ज्यादा का वक्त बीत गया। इस दौरान लंच और डिनर के लिए ब्रेक तक नहीं लिया गया। संसद के दोनों सदनों- लोकसभा और राज्यसभा में आम तौर पर सुबह 11 से शाम 6 बजे तक करीब 7 घंटे काम होता है।
लोकसभा: भाजपा ने अपने सांसदों को 16 मार्च के लिए व्हिप जारी किया
संसद के बजट सत्र का दूसरा चरण जारी है। भाजपा ने अपने लोकसभा सांसदों को 16 मार्च को सदन में उपस्थित रहने के लिए एक व्हिप जारी किया है। उस दिन केंद्रीय बजट से संबंधित विनियोग विधेयक पेश किया जाएगा। अनुदानों मांगों पर चर्चा के लिए निर्धारित अवधि समाप्त हो जाने के बाद लोकसभा अध्यक्ष गिलोटिन लागू करेंगे और इसके बाद सभी अनुदान मांगों पर मतदान किया जाएगा। इससे पहले लोकसभा में शुक्रवार को रेल मंत्रालय से संबंधित अनुदान मांगे पारित हुई। वहीं उत्तर प्रदेश के विभिन्न इलाकों में लगे नागरिकता संशोधन कानून विरोधी पोस्टरों को लेकर कांग्रेस ने लोकसभा में स्थगन प्रस्ताव भी दिया।
**
1 असमः एक जनवरी 2021 के बाद दो से अधिक बच्चे वाले व्यक्तियों को सरकारी नौकरी नहीं मिलेगी।
2 ओडिशाः दो से अधिक बच्चे वालों को शहरी स्थानीय निकाय के चुनाव लड़ने की इजाजत नहीं।
3 बिहारः दो बच्चों से ज्यादा होने पर नगर पालिका का चुनाव लड़ने की अनुमति नहीं है।
4 उत्तराखंडः टू चाइल्ड पॉलिसी सिर्फ नगर पालिका चुनावों तक सीमित रखी गई है।
5 महाराष्ट्रः दो से अधिक बच्चों पर ग्राम पंचायत और नगर पालिका चुनाव लड़ने पर रोक। सरकार में कोई पद भी नहीं मिल सकता। दो से ज्यादा बच्चे वालों को पब्लिक डिस्ट्रीब्यूशन सिस्टम के फायदे भी नहीं।
6 आंध्र प्रदेशः 1994 में पंचायती राज एक्ट के अनुसार दो से ज्यादा बच्चे होने पर किसी भी तरह का चुनाव नहीं लड़ सकते।
7 तेलंगानाः पंचायती राज एक्ट के अनुसार दो से अधिक बच्चे होने पर चुनाव नहीं लड़ सकते।
8 राजस्थानः दो से अधिक बच्चे होने पर सरकारी नौकरी के लिए अयोग्य। दो से अधिक बच्चे वाले तभी चुनाव लड़ सकते हैं, अगर दो में से कोई एक दिव्यांग हो ।
9 गुजरातः दो से अधिक बच्चे वाले पंचायत और नगर पालिका के चुनाव नहीं लड़ सकते।
10 मध्य प्रदेशः 2001 में टू चाइल्ड पॉलिसी के तहत सरकारी नौकरियों और स्थानीय चुनाव लड़ने पर रोक थी, लेकिन 2005 में फैसला बदला। सरकारी नौकरियों और न्यायिक सेवाओं में पॉलिसी लागू।
11 छत्तीसगढ़ः दो बच्चों से ज्यादा होने पर सरकारी नौकरियों और स्थानीय चुनाव लड़ने पर रोक थी, लेकिन 2005 में फैसला बदला। हालांकि सरकारी नौकरियों और न्यायिक सेवाओं में यह लागू है।
छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र समेत 11 राज्यों में लागू हैं नीतियां