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भद्राकाल में नहीं करना चाहिए कोई शुभ कार्य**
होलिका दहन के मुहूर्त में क्यों रखा जाता है भद्रा काल का विशेष ध्यान ?
विवेक राजपूत, रायपुर
हर तिथि के 2 भाग होते हैं। जिनको अलग-अलग नाम दिए गए हैं। जिनके अनुसार कृष्णपक्ष में सप्तमी और चतुर्दशी तिथि के पहले भाग को एवं तृतीया और दशमी तिथि के दूसरे भाग को भद्रा कहा जाता है। इसी तरह शुक्लपक्ष में अष्टमी और पूर्णिमा तिथि के पहले भाग एवं एकादशी और चतुर्थी तिथि के दूसरे भाग को भद्रा कहा जाता है। माना गया है कि जब भद्राकाल किसी त्योहार के पर्व काल में रहता है तो उस समय कोई पर्व से जुड़े शुभ और महत्वपूर्ण काम नहीं किए जाते हैं। विद्वानों के अनुसार किसी पर्व काल में भद्रा का आखिरी समय यानी मुख काल को छोड़ देना चाहिए। इसलिए रक्षाबंधन पर्व एवं फाल्गुन माह की पूर्णिमा पर होलिका दहन के समय भद्रा का विचार किया जाता है।
होली के बाद भाई दूज कब मनया जाएगा?
मेघना वर्मा, इंदौर
जिस प्रकार दिवाली के बाद भाई दूज मनाया जाता है उसी प्रकार होली के बाद भाई का तिलक करके होली की भाई दूज मनाई जाती है। इस बार यह 11 मार्च को है। होली की भाई दूज फाल्गुन मास की शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को मनाई जाती है। इस दिन बहन के भाई को तिलक करने से भाई ऊपर की सभी नकारात्मक शक्ति समाप्त हो जाती है। एक पौराणिक कथा के अनुसार भैया दूज पर खुद यमराज ने अपनी बहन यमुना के घर जाकर टीका लगवाया था और भोजन किया था। यमराज ने आशीर्वाद दिया कि इस दिन जो भाई अपनी विवाहित बहन के घर जा कर टीका करवाएगा और भोजन करेगा उसे अकाल मृत्यु का भय नहीं रहेगा।
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जवाब देंगे ज्योतिषाचार्य पं. मनीष शर्मा
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