2500 से ज्यादा वारदातों में डॉग स्क्वॉड को किया शामिल, 20 फीसदी केस सुलझाने में ही मिली मदद

News - डीबी स्टार

Bhaskar News Network

Sep 14, 2019, 07:46 AM IST
Raipur News - chhattisgarh news dog squad involved in more than 2500 incidents only 20 helped in solving the case
डीबी स्टार
डीबी स्टार की टीम ने डॉग स्क्वाॅड से मिलने वाले मदद की हकीकत जानने के लिए पड़ताल की। इस दौरान खुलासा हुआ कि डॉग स्क्वॉड की टीम में 4 स्नेफर और एक ही ट्रैकर हैं। चारों स्नेफर डॉग सिर्फ वीआईपी ड्यूटी करते हैं। वहीं एक ट्रेकर डॉग को घटना के बाद स्पॉट पर ले जाया जाता है। हालांकि पिछले एक माह तक ट्रेकर डॉग को ट्रेनिंग के लिए भेजा गया था। इसलिए एक भी घटनाओं में डॉग स्क्वॉड की टीम नहीं पहुंच पाई। इसी तरह ट्रेकर ने सिर्फ चार से पांच घटनाओं में ही आरोपी तक पहुंचाने में पुलिस को मदद दिलाई है, जबकि इन पांचों डॉग पर प्रतिमाह 40 हजार रुपए से ज्यादा खर्च किए जाते हैं। वहीं पांच साल में इन डॉग पर 25 लाख रुपए खर्च किया गया, लेकिन ज्यादातर घटनाओं में डॉग स्क्वॉड की टीम नहीं पहुंचती है।

ऐसे समझें, क्यों पुलिस को नहीं मिल पाती पूरी मदद..

इन मामलों में आरोपियों तक पहुंचा स्क्वॉड





इन वारदातों के बाद नहीं पहुंचा डॉग स्क्वॉड

नकदी और लैपटाॅप चोरी : टिकरापारा में 30 से 31 जुलाई की मध्य रात्रि को एक व्यक्ति के घर पर चोरी हुई। घर का ताला तोड़कर अज्ञात चोर ने आलमारी के ताले को तोड़कर नकदी 40 हजार अौर एक लैपटॉप चोरी कर ले गए।

जेवर चुरा ले गए चोर : मोवा के दुबे कॉलोनी में 1 अगस्त को सूने मकान में चोरी की वारदात हुई। इसमें सोने-चांदी के जेवर और नकदी को चोर चुरा कर ले गए। जिस समय चोरी की वारदात हुई, उस दौरान घर पर कोई भी मौजूद नहीं था।

तिजोरी से 5 लाख ले गए : 30 से 31 जुलाई के मध्य में कोतवाली के एक दुकान में नकाबजनी की घटना हुई। कोई अज्ञात चोर प्रार्थी के ऑफिस दुकान का ताला तोड़कर तिजोरी से 5 लाख चोरी कर ले गए। घटना के बाद से अब खोजबीन नहीं की गई।

क्राइम सीन भी बिगड़ा

घटना के बाद आरोपी जिस रास्ते से निकलता है, उस रास्ते को डॉग स्क्वॉड की टीम पकड़ लेती है, लेकिन बारिश के दिनाें में सबसे ज्यादा परेशानियां होती हैं। साथ ही घटनास्थल पर लोग भी पहुंच जाते हैं और पुलिस की टीम भी पहुंच जाती है। ऐसे में मदद नहीं मिल पाती।

सीधी बात

बारिश में ज्यादा परेशानी होती है


बारिश में बहुत दिक्कतें होती हैं। घटना स्थल में इतने लाेगों का आना-जाना होता है कि फिर गंध पहचान नहीं पाते है।


नर को नर के साथ और मादा को मादा के साथ रखा जाता है। ऐसा नहीं है कि सभी को एक साथ रखा जाता है।


डाइट का डॉग मास्टर ही बता पाएंगे।

बड़ी घटनाओं में ही ले जाते हंै


स्नेफर चार और ट्रैकर एक ही


चंद्रप्रकाश तिवारी, आरआई, पुलिस लाइन

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