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लॉकडाउन के दौरान कंपनी के प्लांटों में नहीं होगा कोयला संकट, पर्याप्त स्टाक, डिमांड कम

Korba News - कोरोना के चलते देशव्यापी लॉकडाउन के चलते शहर में बिजली कंपनी के प्लांटों में कोयला की कमी बिजली उत्पादन में आड़े...

Mar 27, 2020, 07:05 AM IST

कोरोना के चलते देशव्यापी लॉकडाउन के चलते शहर में बिजली कंपनी के प्लांटों में कोयला की कमी बिजली उत्पादन में आड़े नहीं आएगी। गर्मी को देखते हुए बिजली प्लांटों में पहले से लगातार कोल स्टॉक मेंटेन करने की कोशिश जारी रही। जेनरेशन कंपनी के कोरबा पूर्व और एचटीपीपी में तो एक माह का कोल स्टॉक है। ऐसे में लॉकडाउन के दौरान बिजली कंपनी के प्लांटों के लिए कोयला संकट के हालात नहीं बनेंगे। पावर जेनरेशन कंपनी के जिले में तीन बिजली प्लांट हैं। इसके अलावा मड़वा प्लांट से भी बिजली उत्पादन होता है। वर्तमान में डीएसपीएम प्लांट में करीब एक सप्ताह का 35 हजार टन कोयला है। मड़वा में 11 दिन का कोयला है। जबकि कोरबा पूर्व व एचटीपीपी में कोल स्टॉक को लेकर स्थिति ज्यादा बेहतर है। 240 मेगावाट के कोरबा पूर्व में 76 हजार टन कोयला है, जो एक माह तक का स्टॉक है। जबकि एचटीपीपी में 4 लाख 9 हजार टन कोयला है। यहां भी करीब एक माह तक के लिए कोयला है। जिले की मानिकपुर, कुसमुंडा और गेवरा खदान से कंपनी के प्लांटों को कोयला आपूर्ति होती है।कंपनी के गारे पाल्मा खदान से भी उत्पादन हो रहा है। लॉकडाउन के दौरान भी आपूर्ति भी जारी है। कोरोना के चलते लॉकडाउन के कारण प्रदेश में इन दिनों बिजली की मांग पहले की अपेक्षा 300 से 400 मेगावाट तक की कमी है। सेंट्रल पूल से भी पहले से कम बिजली ले रहे हैं। प्रदेश में बिजली की मांग 3200 मेगावाट तक पहुंच रही है। जबकि बिजली की उपलब्धता इससे ज्यादा बनी हुई है। इसलिए प्रबंधन को मांग अनुसार बिजली आपूर्ति की समस्या नहीं है।

प्लांटों में बिजली उत्पादन पर नजर

प्लांट उत्पादन

कोरबा पूर्व 177 मेगावाट

एचटीपीपी 1000 मेगावाट

डीएसपीएम 372 मेगावाट

मड़वा 333 मेगावाट

बांगो हाइडल 40 मेगावाट

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