इकोनॉमिस्ट ने लिखा - दिल्ली के वोटरों ने भाजपा की उग्रता को ठुकराया

News - भारतीय राजनीति में इससे पहले ऐसी सांप्रदायिक कट्‌टरता कभी नहीं देखी गई इसके बावजूद भाजपा की हार से पता लगता...

Feb 15, 2020, 07:16 AM IST
भारतीय राजनीति में इससे पहले ऐसी सांप्रदायिक कट्‌टरता कभी नहीं देखी गई

इसके बावजूद भाजपा की हार से पता लगता है कि उसके कमजोर प्रदर्शन के अन्य कारण हैं। यह चुनाव नागरिकता कानून से उठे व्यापक राष्ट्रीय अंसतोष की पृष्ठभूमि में हुआ था। भाजपा ने शाहीन बाग में धरना दे रही महिलाओं को विश्वासघात और आतंकवाद का पर्याय बताया। सांसद प्रवेश वर्मा ने केजरीवाल को खतरनाक आतंकवादी करार दिया। वित्त राज्य मंत्री ने गोली मारो के नारे लगवाए। फिर भी ऐसे अभियान पर कई हिंदी टीवी चैनलों ने बहुत कम प्रतिकूल टिप्पणियां कीं।

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पार्टी की हार के दो स्पष्ट कारण हैं। पहला- जिसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी वरीयता देना चाहेंगे- यह कि दिल्ली के वोटरों ने राष्ट्रीय और स्थानीय चुनावों के बीच अस्वाभाविक अंतर रखा है। इसमें सचाई भी है। आप ने स्कूलों की हालत सुधारी, स्थानीय क्लीनिक बनाए , मामूली रिश्वतखोरी पर अंकुश लगाया। आप का चुनाव चिन्ह झाड़ू घर की अच्छी देखभाल का प्रतीक है। वह नरेंद्र मोदी के राष्ट्रीय महत्व के विचार जैसा नहीं है।

आप को इस बार से ज्यादा सफलता 2015 में मिली थी। उस समय भाजपा को लोकसभा चुनाव जीते ज्यादा समय नहीं हुआ था। अब वह विराट पार्टी है। राजनीतिक चंदे का भारी हिस्से उसके खाते में आता है। बड़ी संख्या में टेलीविजन समाचार चैनल उसका समर्थन करते हैं। केंद्रीय मंत्रियों, दिल्ली पुलिस और चुनाव आयोग जैसी संस्थाओं पर नियंत्रण से उसका पलड़ा और अधिक भारी होता है।

इसके बावजूद भाजपा की हार से पता लगता है कि उसके कमजोर प्रदर्शन के अन्य कारण हैं। यह चुनाव नागरिकता कानून से उठे व्यापक राष्ट्रीय अंसतोष की पृष्ठभूमि में हुआ था। भाजपा ने शाहीन बाग में धरना दे रही महिलाओं को विश्वासघात और आतंकवाद का पर्याय बताया। सांसद प्रवेश वर्मा ने केजरीवाल को खतरनाक आतंकवादी करार दिया। वित्त राज्य मंत्री ने गोली मारो के नारे लगवाए। फिर भी ऐसे अभियान पर कई हिंदी टीवी चैनलों ने बहुत कम प्रतिकूल टिप्पणियां कीं।

दिल्ली विधानसभा के चुनाव में भारतीय जनता पार्टी की पराजय को मामूली आघात कहकर खारिज किया जा सकता है। दिल्ली की दो करोड़ आबादी देश की आबादी से 2% कम है। भाजपा को बुरी तरह हराने वाली अरविंद केजरीवाल के नेतृत्व की आम आदमी पार्टी का दिल्ली के बाहर कोई प्रभाव नहीं है। फिर भी, यह चुनाव परिणाम भाजपा की सामाजिक विभाजन की राजनीति पर शुरुआती जनमतसंग्रह है। यह चुनाव प्रचार की अधिक आक्रामक शैली की भी परीक्षा थी। अभियान के दौरान भाजपा ने भारतीय राजनीति में पहले कभी नहीं देखी गई सबसे मुुखर और भद्दी सांप्रदायिक कट्‌टरता का प्रदर्शन किया।

पार्टी की हार के दो स्पष्ट कारण हैं। पहला- जिसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी वरीयता देना चाहेंगे- यह कि दिल्ली के वोटरों ने राष्ट्रीय और स्थानीय चुनावों के बीच अस्वाभाविक अंतर रखा है। इसमें सचाई भी है। आप ने स्कूलों की हालत सुधारी, स्थानीय क्लीनिक बनाए , मामूली रिश्वतखोरी पर अंकुश लगाया। आप का चुनाव चिन्ह झाड़ू घर की अच्छी देखभाल का प्रतीक है। वह नरेंद्र मोदी के राष्ट्रीय महत्व के विचार जैसा नहीं है।

दिल्ली विधानसभा के चुनाव में भारतीय जनता पार्टी की पराजय को मामूली आघात कहकर खारिज किया जा सकता है। दिल्ली की दो करोड़ आबादी देश की आबादी से 2% कम है। भाजपा को बुरी तरह हराने वाली अरविंद केजरीवाल के नेतृत्व की आम आदमी पार्टी का दिल्ली के बाहर कोई प्रभाव नहीं है। फिर भी, यह चुनाव परिणाम भाजपा की सामाजिक विभाजन की राजनीति पर शुरुआती जनमतसंग्रह है। यह चुनाव प्रचार की अधिक आक्रामक शैली की भी परीक्षा थी। अभियान के दौरान भाजपा ने भारतीय राजनीति में पहले कभी नहीं देखी गई सबसे मुुखर और भद्दी सांप्रदायिक कट्‌टरता का प्रदर्शन किया।

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