पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें
  • Hindi News
  • National
  • Raipur News Chhattisgarh News Even Calling Corona 39kareena39 In Villages But The Same Amount Of Panic Closed In Half Till Ramayana Bhagwat Without Crowded Buses

गांवों में कोरोना को ‘करीना’ भी कह रहे, पर दहशत उतनी ही, रामायण-भागवत तक आधे में बंद, बिना भीड़ बसें

एक वर्ष पहले
  • कॉपी लिंक
{रायपुर से अभनपुर, कुरुद, आरंग, खरौद इत्यादि स्थानों पर चलने वाली 200 लोकल बसों में 40-50 ही चल रहीं, बसों को नहीं मिल रहे यात्री, तो खड़ी कर दी हैं बसें

कोरोना सिर्फ रायपुर के घर-घर की दहशत नहीं है, ये गांवों में एक-एक आदमी के ज़ेहन में घुस गया है। गांवों में कहीं ‘करुना’ तो कहीं ‘करीना’ जैसे लफ्ज सुनने को मिल जाएंगे, लेकिन चेहरे पर चिंता कोरोना की ही दिख रही है। बड़े बड़े बाज़ार और आंकड़ों से दूर छोटी-छोटी गुमटियां भी दस-बीस रुपए के धंधे के लिए घंटों इंतज़ार कर रही है। न पहले जैसे यात्री हैं और न ही रूटों पर लोकल बसें। सड़कें सूनी हैं और गांवों के चौपालों पर कोरोना की चर्चा। बंद के ऐलान के बाद भास्कर ने रायपुर से अभनपुर, कुरुद, राजिम, आरंग, खरौरा होते हुए कई गांवों का हाल जाना। इन गांवों में फिलहाल दहशत भले न हो, पर माथे पर चिंता ज़रूर है। जानिए कि तकरीबन इस 220 किलोमीटर के इस सफर का लाइव सीन-

राजिम-नवापारा में भागवत 5 दिन में ही बंद कर दिया गया।

रायपुर से पहुंचे अभनपुर के बस स्टैंड। सूना-सूना। छोटी सी फल्ली-चना की दुकान लगाए करीब 15-16 साल का जागेश्वर साहू। बोला-भैया, ऐसा बुरा समय पहले नहीं देखा। कुछ नहीं बिक रहा। क्योंकि बसें ही नहीं आ रहीं। यहां बेनीराम डहरिया बसों का पूरा कामधाम देखते हैं। बताते हैं कि रायपुर-राजिम के बीच 70 बसें चलती हैं। अभी सिर्फ 20-22 चल रही हैं। कुछ दुकानें खुलीं, कुछ बंद। यहां फलों की दुकान लगाने वाले संतोष अंसारी और कुछ और लोगों ने दिलचस्प बात बताई। पिछले दो-तीन दिनों से बस स्टैंड के पास जो सेलून हैं, उसे बंद रखा गया है। कारण ये कि बालों से कहीं कोई वायरस न फैल जाए। एहतियातन खुद से बंद रखा है। यहां से आगे निकले। एक गांव पर रुके चटौद। करीब 1400 की आबादी। सबको सूचना है कि कल बंद रखना है। मोड़ पर बैठे कुछ लोगों में जनता कर्फ्यू की बात हो रही थी। मुनादी भी हुई है। इस गांव की एक खास बात यहां के लोगों का अपने प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र को लेकर आत्मविश्वास है और वह इस लायक मिला भी। जब केंद्र में गए, तो लगा ही नहीं कि यह सरकारी अस्पताल है। कोरोना से निपटने के लिए जितने तरह के जतन किए जा सकते हैं, वो सारे यहां हो रहे थे। गार्डन, साफ-सफाई, हाइजनिक वातावरण, हैंडवाश, सेनेटाइजर, बायोमेडिकल डिस्पोजमेंट सबकुछ बेहद व्यवस्थित। यहां के डॉ. संजय साहू मिले। उनसे पता चला कि इस प्राथमिक केंद्र को राज्य का सबसे स्वच्छ केंद्र का पुरस्कार दो बार मिल चुका है और केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्‌डा ने भी इस केंद्र को सम्मानित किया है। उन्होंने बाकायदा इसके सर्टिफिकेट अपने आफिस में लगाए हुए हैं। करीब छह गांव इस अस्पताल के दायरे में है और मितानिनें घर घर जाकर लोगों को जानकारी दे रही हैं। यह जागरूक गांव की तरह व्यवहार कर रहा है।

बस स्टैंड में दे रहे सेनिटाइजर -छत्तीसगढ़ पेज

{राजिम में रोजाना पहुंचते थे करीब 700 श्रद्धालु, अब पहुंच रहे 30-40, इस बार ज्योति भी एक ही जलाई जाएगी, जबकि पहले जलती थी एक हजार से ज्यादा

सड़कों के किनारे ठेले वालों को हटवाया गया, पुलिस ने दुकानें बंद करवाई
खबरें और भी हैं...