दाखिला दिलाने सरकार सुप्रीम काेर्ट में

News - छत्तीसगढ़ के मूल निवासियों को मेडिकल कॉलेजों के पीजी कोर्स में एडमिशन नहीं मिल रहा है। केवल प्रदेश के मेडिकल...

Feb 15, 2020, 07:40 AM IST

छत्तीसगढ़ के मूल निवासियों को मेडिकल कॉलेजों के पीजी कोर्स में एडमिशन नहीं मिल रहा है। केवल प्रदेश के मेडिकल कॉलेजों में एमबीबीएस करने वाले छात्रों को ही पीजी में एडमिशन दिया जा रहा है। स्थानीय एमबीबीएस छात्रों को हो रहे नुकसान को देखते हुए राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। दरअसल हाईकोर्ट के एक आदेश के बाद ही इंस्टीट्यूशन डोमिसाइल यानी केवल प्रदेश में एमबीबीएस करने वाले छात्रों का पीजी में एडमिशन हो रहा है। यही कारण है कि राज्य सरकार हाईकोर्ट के निर्णय के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट गई है। प्रदेश के चार सरकारी मेडिकल कॉलेजों में पीजी की कुल 152 सीटें हैं। इनमें आधी यानी 76 सीटें आल इंडिया कोटे की है। छग के मूल निवासी महाराष्ट्र, कर्नाटक समेत दूसरे राज्यों में एमबीबीएस करते हैं। जब पीजी करने की बारी आती है तो मेरिट में होने के बावजूद उनका छग के कॉलेजों में एडमिशन नहीं होता। दरअसल तीन साल पहले शासन ने ऐसा नियम बनाया था, जिसमें केवल प्रदेश में एमबीबीएस करने वाले ही एमबीबीएस में एडमिशन लेंगे। पीजी में एडमिशन की प्रक्रिया मार्च में शुरू होगी, जो 18 मई तक चलेगी।

गरीब सवर्णों के लिए मेडिकल पीजी में 10%आरक्षण लेकिन सीटें नहीं मिलीं

मेडिकल कॉलेजों में संचालित पोस्ट ग्रेजुएट कोर्स में एडमिशन के लिए गरीब सवर्णों को 10 फीसदी आरक्षण दिया जाना है। इसके लिए फिलहाल मेडिकल कॉलेजों में सीटें ही उपलब्ध नहीं है। डीएमई कार्यालय ने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय को पत्र लिखकर गरीब सवर्णों के लिए 30 सीटों की मांग की है। इनमें पं. जवाहरलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज के लिए 27 व सिम्स बिलासपुर के लिए तीन सीटें हैं। उम्मीद की जा रही है कि काउंसिलिंग शुरू होने के पहले ये सीटें मिल सकती हैं। नेहरू मेडिकल कॉलेज में पीजी की कुल 129 सीटें हैं, लेकिन इनमें 108 डिग्री की है। वहीं सिम्स में 12 सीटें है।

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