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होलिका दहन... आज निकलेंगे हुरियारों के जुलूस

एक वर्ष पहले
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तस्वीर संजय नगर की है जहां लकड़ियों की जगह गोबर से बनी होलिका का दहन किया गया। इस पर होलिका और प्रहलाद की प्रतिमा भी रखी गई थी ।

पिलाई ठंडाई...

सराफा एसोसिएशन ने सदर बाजार में ठंडाई बांटी । कार्यक्रम में एसोसिएशन के अध्यक्ष हरख मालू, लक्ष्मीनारायण लाहोटी, प्रह्लाद सोनी, अनिल कुचेरिया मौजूद रहे।

फूलों की होली...

सिविल लाइंस सिंधी पंचायत के होली मिलन में सांसद सुनील सोनी शामिल हुए। ललित जैसिंघ ने बताया कि यहां फूलों की होली खेली गई।

तस्वीर कालीबाड़ी की है। यहां 7 फीट की होलिका एक हाथ में भक्त प्रह्लाद को तो दूसरे में कोरोना वायरस पकड़े हुए दिखी। इसे मूर्तिकार राकेश पुजारी ने बनाया है।

राठाैर चौक में शुभ मूहूर्त में होलिका दहन का कार्यक्रम हुआ। इस दौरान विधायक बृजमाेहन अग्रवाल समेत बड़ी संख्या में लोग होलिका की परिक्रमा करने के लिए पहुंचे। साथ ही विधिवत पूजा अर्चना भी की।

होलिका के हाथ में कोरोना...

बिखरे खुशियों के रंग...

कुरीतियों का दहन...

इधर, सोमवार से ही शहर में खुशियों के रंग बिखरने लगे थे। दोपहर में महिलाएं राठौर चौक में होलिका पूजन के लिए इकट्ठा हुईं जहां सभी ने अबीर-गुलाल लगाकर एक-दूसरे को पर्व की शुभकामनाएं दी।

अंध श्रद्धा निर्मूलन समिति ने महाकोशल कला वीथिका में सामाजिक कुरीतियों की होलिका जलाई। समिति के अध्यक्ष डॉ. दिनेश मिश्र ने बताया, अंधविश्वास के प्रति जागरूक करने यह आयोजन किया गया।

कम्युनिटी रिपोर्टर | रायपुर

प्रेम और सद्भाव के होली पर्व की पूर्व बेला में देर रात तक शहर में डेढ़ हजार से अधिक स्थानों पर होलिका दहन हुआ। बहुत से स्थानों पर पर्यावरण सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए गो काष्ठ व कंडों का उपयोग किया गया। कई चौराहों पर सजावट कर होलिका और भक्त प्रहलाद की प्रतिमाएं रखी गई थीं। बाद में प्रहलाद की प्रतिमाएं हटाकर होलिका को जलाया गया। लोगों ने एक-दूसरे को गुलाल लगाकर पर्व की शुभकामनाएं दीं। होली पर्व पर गुरुवार को अलग-अलग मोहल्लों से ढोल-बाजों के साथ हुरियारों के जुलूस निकले जाएंगे। जुलूस पर गुलाल और फूलों की बारिश कर स्वागत किया जाएगा। कई संगठनों ने लोगों से अपील की है कि वे केमिकल युक्त रंगों की जगह हर्बल रंगों का इस्तेमाल करें।

रोली-अक्षत चढ़ाकर पूजा फिर होलिका की परिक्रमा

भद्रा इस बार दोपहर 1.11 बजे ही समाप्त हो गई थी। लिहाजा, इस साल इसकी वजह से होलिका दहन में किसी तरह की बाधा नहीं आई। शहर में शाम से ही दहन का सिलसिला शुरू हो गया था, जो देर रात तक जारी रहा। लोगों ने होलिका दहन स्थलों पर पहुंचकर अबीर, गुलाल, रोली व अक्षत चढ़ाकर पूजा-अर्चना की। पूजा के साथ ही गुझिया, मिठाई व अन्य वस्तुओं का भोग लगाया। जौ की बालियों को हाथ में लेकर परिक्रमा की। उत्सव समितियों द्वारा होली मिलन व गीत-संगीत के आयोजन किए गए। होलिका दहन स्थलों पर फाग गीतों की धुन पर युवा थिरकते दिखे तो बच्चों ने एक-दूसरे पर रंगों की बौछार करना दहन के साथ ही शुरू कर दिया था।

चौबे कॉलोनी में दहन

चौबे कॉलोनी में होलिका दहन का कार्यक्रम रात 9 बजे किया गया। हाेलिका दहन में लकड़ी का उपयोग ना करते हुए इस बार कंडे आैर कपूर का उपयोग किया गया है। राजेश बिस्सा ने बताया कि इस बार ऑर्गेनिक होली मनाई जाएगी

परिक्रमा के लिए भीड़...

अर्थात- आग में जलकर होलिका तो भस्म हो गई पर भक्त प्रहलाद सुरक्षित रह गए।

हमेशा से बुराई पर अच्छाई की जीत होती रही है और आगे भी होती रहेगी।
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