कंकाली तालाब के पानी से कैसे दूर होती है स्किन डिसीज, इस टॉपिक पर बनाया मॉडल, बने विनर

News - पं. रविशंकर शुक्ल यूनिवर्सिटी में पिछले हफ्ते 27वीं राज्य स्तरीय राष्ट्रीय बाल विज्ञान कांग्रेस का आयोजन किया...

Dec 04, 2019, 08:45 AM IST
पं. रविशंकर शुक्ल यूनिवर्सिटी में पिछले हफ्ते 27वीं राज्य स्तरीय राष्ट्रीय बाल विज्ञान कांग्रेस का आयोजन किया गया। यहां 26 जिलों के लगभग 130 स्टूडेंट्स ने जूनियर और सीनियर कैटेगरी में मॉडल्स प्रदर्शित किए। जूनियर कैटेगरी में सोसाइटी, कल्चर और लाइवलीहुड थीम पर मॉडल प्रजेंट कर नारायणपुर के स्टूडेंट्स विनर रहे। वहीं, कंकाली तालाब में नहाने से स्किन प्रॉब्लम कैसे दूर होती है टाॅपिक पर रिसर्च करने वाले स्टूडेंट्स को सीनियर कैटेगरी में विनर चुना गया। जूनियर कैटेगरी में 6 और सीनियर में 10 स्टूडेंट्स का सलेक्शन हुआ है।

शहर में ऐसी मान्यता है कि कंकाली तालाब में नहाने से फोड़े-फुंसी सहित त्वचा संबंधी कई बीमारी ठीक होती है। स्टूडेंट्स इस पर रिसर्च कर रहे हैं। रिसर्च के पहले चरण में उन्हांेने कंकाली सहित अन्य कुछ तालाब के पानी का टेस्ट कराया है, जिसमें उन्हें अन्य तालाब की तुलना में कंकाली तालाब में सल्फेट की मात्रा ज्यादा मिली है। मायाराम सुरजन स्कूल के स्टूडेंट्स ने गोदना आर्ट से हेल्थ पर पड़ने वाले सकारात्मक प्रभाव और जेवरा-सिरसा के स्टूडेंट्स ने डायबिटिक पेशेंट के लिए चपटी और गुरमटिया चावल पर रिसर्च की है। सभी विनर्स 25 से 31 दिसंबर तक केरल में होने वाले नेशनल कॉन्टेस्ट में हिस्सा लेंगे। पढ़िए चार मॉडल्स के बारे में जो जिंदगी आसान बनाने में हो सकते हैं कारगर।

डायबिटिक पेशेंट के लिए चपटी और गुरमटिया चावल है अच्छा विकल्प, नॉर्मल रहता है ग्लूकोज लेवल

तालाब में दूसरे केमिकल का पता लगाएंगे स्टूडेंट्स

पुरानी बस्ती स्थित कंकाली तालाब के पानी पर रिसर्च करने वाले 11वीं क्लास के स्टूडेंट नीरज दानी और विशाल सोनी ने बताया कि हम रिसर्च के जरिए ये जानना चाहते हैं कि आखिर इस तालाब के पानी में ऐसा कौन-सा केमिकल या पदार्थ है जो स्किन प्रॉब्लम को दूर करता है। नीरज ने बताया कि शहर में कई लोग इसे आस्था से जोड़कर देखते हैं। हमने कंकाली तालाब के पानी का टेस्ट कराया जिसमें सल्फेट की मात्रा मिली। इसके बाद बूढ़ातालाब, महाराजबंध और कुशालपुर तालाब के पानी में भी हमें सल्फेट मिला लेकिन कंकाली तालाब की तुलना में कम मिला। स्टूडेंट्स यह पता लगा रहे हैं कि सिर्फ कंकालीपारा तालाब में नहाने से ही क्यों स्किन डिसीज ठीक होती हैं।

गोदना आर्ट के लिए 15 तरह की जड़ी-बूटी से तैयार करते हैं स्याही

रायपुर स्थित मायाराम सुरजन स्कूल के स्टूडेंट्स ने गोदना आर्ट पर सर्वे किया है। जिसमें उन्होंने पाया गया कि गोदना आर्ट शृंगार के साथ हेल्थ के लिए भी उपयोगी है। गोदना के लिए इस्तेमाल की जाने वाली स्याही लगभग 15 जड़ी-बूटी को मिलाकर तैयार की जाती है। स्टूडेंट्स ने प्राेजेक्ट के जरिए बताया कि इसे जांघ में गोदवाने से लकवा, हाथ में गोदवाने से हृदय, किडनी, लीवर और घुटने में गोदवाने से गैस संबंधी बीमारी नहीं होती है। इसके अलावा माथे पर गोदना गोदवाने से मानसिक शांति मिलती है।

डायबिटिक पेशेंट को डॉक्टर्स हमेशा चावल खाने से परहेज करने की सलाह देते हैं। दुर्ग जिले के स्टूडेंट्स टीना सार्वे और वीणा साहू ने राज्य में मिलने वाले चपटी और गुरमटिया चावल पर रिसर्च कर मॉडल प्रजेंट किया है। उन्होंने अपने रिसर्च में पाया है कि इन चावल में ग्लाइसिक इंडेक्स कम होता है जो शरीर में ग्लूकोज के स्तर को बढ़ने नहीं देता। इससे ब्लड में ग्लूकोज की मात्रा नहीं बढ़ती। इसे खाने से मोटापा या डायबिटीज होने की संभावना कई गुना कम हो जाती है। हालांकि मोटा चावल होने के कारण लोग इसे कम खाना पसंद करते हैं। स्टूडेंट्स ने बताया कि इसे क्रॉस ब्रीडिंग और ट्रांसजेनेसिस की मदद से खाने योग्य बनाया जा सकता है।

मछलीपालन में आदिवासियों की मदद करेगा ये मॉडल

नारायणपुर जिले के स्टूडेंट सानिया कोर्राम और ऋषिता ध्रुव ने सोसाइटी, कल्चर और लाइवलीहुड थीम पर मॉडल प्रजेंट किया। उन्होंने इसके जरिए बताया कि आदिवासी आज भी पुरानी पद्धति से मछलीपालन कर रहे हैं। कम लागत में ज्यादा मुनाफा देने के मकसद से उन्हाेंने ये मॉडल बनाया है। सानिया ने बताया, आदिवासी छोटे तालाब में मछली पालते हैं जिसकी कारण पानी जल्दी गंदा हो जाता है। ऐसे में उन्हें पंप के जरिए ऑक्सीजन दी जाती है, जिसमें कई यूनिट बिजली खर्च होती है और बिल भी ज्यादा आता है। तालाब के पास सोलर एनर्जी पैनल लगाकर मछलीपालन को आसान बनाया जा सकता है। इसके कई फायदे हैं। सोलर एनर्जी से न सिर्फ बिजली की अापूर्ति पूरी होगी।

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