शिक्षक कम, इसलिए निजी स्कूलों की ओर रुझान

News - स्कूल शिक्षामंत्री डॉ. प्रेमसाय सिंह टेकाम ने कहा कि बच्चों व उनके माता-पिता का प्राइवेट स्कूलों की तरफ रुझान कम...

Jan 16, 2020, 07:35 AM IST
Raipur News - chhattisgarh news less teachers hence the trend towards private schools
स्कूल शिक्षामंत्री डॉ. प्रेमसाय सिंह टेकाम ने कहा कि बच्चों व उनके माता-पिता का प्राइवेट स्कूलों की तरफ रुझान कम करने के प्रयास किए जाएंगे। वे निजी स्कूलों को प्राथमिकता क्यों देते हैं इसकी वजह तलाशी जाएगी।

डॉ. टेकाम ने भास्कर से बातचीत में कहा कि वे यह समझते हैं कि सरकारी स्कूलों खासकर गांवों में विषय शिक्षकों की कमी की वजह से विद्यार्थियों को निजी स्कूलों में सुविधा मिलती है इसलिए वे वहां चले जाते हैं। इस कमी को पूरा किया जा रहा है। सरकार लगातार शिक्षकों की भर्ती कर रही है। बच्चों की अपनी समझ का विकास करने के लिए वे खुद सवाल तैयार करें और इसके उत्तर खोजे इसकी भी कोशिश करेंगे। मालूम हो कि असर की ताजा रिपोर्ट अर्ली ईयर में यह पाया गया है कि आंगनबाड़ी व प्री-प्राइमरी तक तो बच्चो सरकारी स्कूलों में एडमिशन लेते हैं, लेकिन इसके बाद वे जैसे-जैसे बड़ी कक्षाओं में जाते हैं वे निजी स्कूलों में एडमिशन लेना पसंद करते हैं। शिक्षामंत्री इसी का जवाब दे रहे थे। टेकाम ने यह भी कहा कि यदि हम एक महिला को शिक्षित करते हैं तो कई पीढ़ियां शिक्षित होती है। इसलिए उनका विभाग बालिका शिक्षा को और भी बढ़ावा देने पर विचार पर कर रहा है।

शिक्षा के अधिकार कानून में सरकारों से कहा गया है कि वे शत-प्रतिशत बच्चों को स्कूलों में एडमिशन हो इसके इंतजाम किए जाएं। लेकिन असर की रिपोर्ट में यह भी आया है कि 6 साल की उम्र तक तो 90 फीसदी या उससे ऊपर तक बच्चे आंगनबाड़ियों या प्री-प्राइमरी स्कूलों तक जाते हैं, लेकिन प्राइमरी स्कूल यानी पहली कक्षा में उस अनुपात में बच्चे इंरोल्ड नहीं हो रहे हैं। इस ड्राप आउट की तरफ सरकार को ध्यान देना चाहिए। यह बात भी सामने आई है कि छोटे बच्चों में बालिकाओं और बालकों के नामांकन पैटर्न अलग दिखे। जैसे बालक निजी स्कूलों में बालिकाएं सरकारी स्कूलों में ज्यादा एनरोल्ड हो रही हैं। इनमें 56.8 प्रतिशत लड़कियां व 50.4 प्रतिशत लड़के सरकारी पूर्व प्राथमिक या प्राथमिक विद्यालयों में हैं। जबकि 43.2 प्रतिशत लड़कियां और 49.6 प्रतिशत लड़के निजी संस्थानों में पढ़ रहे हैं। 6-8 साल के बच्चों में लड़कियों में 61.1 और 52.1 फीसदी लड़के सरकारी पूर्व प्राथमिक या प्राथमिक विद्यालयों में नामांकित हैं। असर ने सुझाव दिया है कि विद्यालय की शिक्षा के प्राथमिक वर्षों में बच्चों में पढ़ने व गणित करने की बुनियादी क्षमताओं को विकसित करना चाहिए।

कहां सर्वे : असर 2019 अर्ली ईयर्स में बच्चों को लेकर तथ्यात्मक प्रमाण जुटाए हैं। 24 राज्यों के 26 जिलों में सर्वे में 1514 गांवों तक पहुंचा गया। 30 हजार 425 घरों में दस्तक दी गई। 4 से 8 साल के 36 हजार 930 बच्चों से बात की गई। वहां से सैंपल्ड बच्चों के पूर्व-प्राथमिक और प्राथमिक स्कूलों में नामांकन की जानकारी संग्रह की गई। बच्चों ने संज्ञानात्मक विकास, प्रारंभिक भाषा व गणित और सामाजिक तथा भावनात्मक विकास की कुछ गतिविधियां कीं। हर गतिविधि बच्चे के साथ एक-एक करके उनके घर पर भी की गई।

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