लॉकडाउन: बाजार तक नहीं पहुंच रहा तरबूज

Anchalik News - लॉकडाउन के चलते शहर के किसानों को कई मुसीबतों का सामना करना पड़ा रहा है, खासकर तरबूज की खेती करने वाले किसानों को...

Mar 27, 2020, 06:30 AM IST
Balodabazar News - chhattisgarh news lockdown watermelons not reaching the market

लॉकडाउन के चलते शहर के किसानों को कई मुसीबतों का सामना करना पड़ा रहा है, खासकर तरबूज की खेती करने वाले किसानों को काफी आर्थिक नुकसान हो रहा है। लॉकडाउन में पुलिस प्रशासन की सख्ती के चलते कई जिलों में किसान सब्जी मंडियों तक नहीं पहुंचा पा रहे हैं जिसके चलते उनकी फसलें बर्बाद हो रही हैं। तरबूज का उत्पादन करने वाले किसानों की बाड़ियों में न तो व्यापारी पहुंच रहे हैं और न ही दलाल आ रहे हैं। ट्रांसपोर्ट व्यवस्था ठप होने से गांवों में बाड़ियों तक वाहन भी नहीं पहुंच पा रहे हैं। जिले में इस वर्ष 50 हेक्टेयर में किसानों द्वारा 30 हजार रुपये प्रतिकिलो की दर से बीज लाकर तरबूज की फसलें बोयी गई हैं। जिले में प्रतिवर्ष 1500 टन तरबूज का उत्पादन होता है।

ग्राम अर्जुनी के किसान फिरतू साहू ने भास्कर से अपनी व्यथा सुनाते हुए कहा कि हमने सुना है कि सरकार ने कहा है मंडियां खुली रहेंगी, किसान अपना काम कर सकेंगे लेकिन पुलिस का खौफ इतना है कि ट्रांसपोर्टर गाड़ी नहीं चलवा रहे हैं। मायूस फिरतू ने कहा कि हमने तरबूज की फसल लगाने के लिए 40 हजार रुपए उधार में लेकर फसल बाई है, अब फसल तैयार है तो उसे खरीदने वाला कोई नहीं है। जब फल, सब्जी, दूध जैसा सप्लाई करने को सरकार कह रही है तो परिवहन की भी व्यवस्था करनी चाहिए।

बल्दाकछर के किसान परमानंद ध्रुव ने भी बताया कि उसकी तरबूज की तैयार फसल खराब हो रही है। उसने 6 बीघा में तरबूज की फसल लगाई है जो तैयार है लेकिन शहरों से व्यापारी व दलाल कोई भी खरीदी करने नहीं आ रहे हैं। यहां से बिलासपुर, रायपुर, जांजगीर चांपा सहित आदि शहरों में तरबूज जाता है। यही दर्द किसान दीपक साहू, लखन सोनकर, साधु कन्नौजे, साधलाल पैकरा का भी था। उन्होंने बताया कि तरबूज की फसल तीस हजार रुपये प्रतिकिलो बीज लाकर बोई गई है। ऐसी स्थिति में तरबूज की फसल कहां ले जाकर बेचेंगे। उल्लेखनीय है कि वायरस के प्रकोप के चलते प्रदेश के सभी जिलों में लॉक डाउन चल रहा है, जिससे बाजारों के साथ-साथ सभी मंडियां भी बंद पड़ी हैं। किसान इस समस्या से चिंतित हैं।

422 एकड़ में 10 हजार टन तरबूज का उत्पादन, किसानों की अपील- धान की तरह समर्थन मूल्य पर खरीदे सरकार

पीएम सम्मान राशि मार्च में ही खातों में डाली जाएगी

उद्यानिकी विभाग के उपसंचालक कमलेश कुमार साहू ने बताया कि किसानों को परिवहन के संबंध में आ रही दिक्कतों से प्रशासन को अवगत करा दिया गया है। इसी नुकसान के चलते अप्रैल में मिलने वाली प्रधानमंत्री सम्मान राशि मार्च में ही किसानों के खातो में डाली जाएगी।

मंडी तक माल लाएं, पुलिस तंग नहीं करेगी: कलेक्टर


इस संबंध में कलेक्टर कार्तिकेय गोयल का कहना है कि तरबूज की बाड़ियों से परिवहन के अभाव में फसल का नहीं उठ पाना चिंताजनक है। किसानों से हमारी अपील है कि वे अपना परिवहन तथा मजदूरों की व्यवस्था कर फसल को मंडियों तक ला सकते हैं। मजदूरों से फसल के परिवहन के वक्त उन्हें हाथ धुलवाने तथा मास्क पहनने सहित अन्य जरूरी सावधानियों का ध्यान रखना होगा। हम वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए जिले में तैनात सभी पुलिस कर्मियों को यह हिदायत भी दे रहे हैं कि फसलों का परिवहन करते ऐसे किसी भी किसान को न रोका जाए। किसी भी किसान को कोई दिक्कत हो तो 07727 223697 कंट्रोल रूम के इस फोन नंबर पर संपर्क कर सकता है।


लवन | महानदी के पाल कछार में 422 एकड़ क्षेत्रफल में फैले 132 किसानों ने लगभग 10 हज़ार टन तरबूज का उत्पादन किया है जिसका मूल्य ₹10 करोड़ तक हो सकता है लेकिन इस वर्ष कोरोना वायरस के लॉकआउट के चलते तरबूज की फसल का परिवहन नहीं हो पा रहा है।

व्यापारी ले जाना चाहते भी हैं तो जिले सीमा पर नाकेबंदी के चलते बाहर नहीं ले जा सकते, जिससे किसान परेशान हैं। तिल्दा के किसानों ने प्रशासन को समस्या से अवगत कराने के बाद आत्मदाह की चेतावनी दी है। लवन से 5 किलोमीटर दूर महानदी के किनारे ग्राम परसापाली, डोंगरीडीह, डोंगरा, तिल्दा व लाटा के किसान इस समस्या के चलते सिर पकड़कर बैठे हैं। महानदी से तरबूज को निकालकर नदी के पार पर पिछले 1 सप्ताह से रखा है पर परिवहन के अभाव में वह खराब होने को है। किसानों ने शासन से मांग की है जिस तरह धान व गेहूं की समर्थन मूल्य पर खरीदी की जाती है उसी तरह तरबूज को भी समर्थन मूल्य पर खरीदा जाए। इसे कोल्ड स्टोरेज में रखने के बाद लोगों को बेचा जा सकता है।

तिल्दा के किसान नारायण धृतलहरे, रामा, ईश्वर, रामलाल, उत्तम, अमर सिंह, अमृतलाल, बंशराम, दीनबंधु, बनसू, गणेशराम, सोहन ने बताया कि एक सप्ताह के भीतर तरबूज फसल को खरीदार नहीं मिले तो हम आत्मदाह को मजबूर होंगे। किसानों ने बताया कि इस वर्ष नदी से तरबूज निकालने के लिए मजदूर नहीं मिल रहे हैं ।

लवन. लवन में महानदी के किनारे तीन दिन से तरबूज की फसल इसी तरह पड़ी है।

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