सरकार ने बदली व्यवस्था तो दिलचस्प हो जाएगा महापौर चुनाव

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Bhaskar News Network

Oct 12, 2019, 07:46 AM IST
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नगरीय निकाय चुनाव में महापौर, नगर पालिका आैर नगर पंचायत अध्यक्ष पद के लिए होने वाला चुनाव सीधे न होकर पार्षदों के वोट से चुने जाने की सुगबुगाहट के बाद राजनीतिक दलों में सरगर्मी तेज हो गई है। यदि ऐसा हुआ तो विधायक भी पार्षद चुनाव लड़ते दिखें तो काेई अचरज की बात नहीं होगी।

छत्तीसगढ़ में निकाय चुनाव की सुगबुगाहट के साथ ही दावेदारों की फौज भी सामने आ रही है। कई नेता तो महापौर की दावेदारी करने के लिए बड़े नेताआें के आगे-पीछे होने लगे हैं लेकिन अब यदि व्यवस्था बदली तो पहली कसरत पार्षद टिकट पाने की होगी। इसमें सबसे ज्यादा परेशानी उन नेताआें को होगी जिनके वार्ड आरक्षित हो चुके हैं जिनका क्षेत्र बदल गया है क्योंकि पार्षद चुनाव जीतने के बाद ही वे महापौर की रेस में शामिल हो पाएंगे। इनमें ऐसे चेहरे भी शामिल हैं जो कभी महापौर आैर विधायक की टिकट की मांग कर रहे थे। हाल ही में मध्यप्रदेश ने यह व्यवस्था लागू कर दी है। छत्तीसगढ़ भी इसी दिशा में आगे बढ़ने की तैयारी में है। बताया गया है कि मेयर या अध्यक्ष पद के लिए किसी एक को प्रत्याशी बनाए जाने के बाद से गुटीय राजनीति हावी हो जाती है। इससे मेयर या अध्यक्ष पद के दावेदारों को दूसरे नेताआें का विरोध आैर भितरघात भी झेलनी पड़ती है। इसके कारण कई दमदार प्रत्याशी भी चुनाव हार चुके हैं। इन्ही सब बातों आैर गुटीय राजनीति को दूर करने के उद्देश्य से कांग्रेस सरकार इस बार इस व्यवस्था को बदलने की तैयारी कर रही है।

गली-मोहल्लों में बढ़ी सक्रियता: व्यवस्था बदलने की सुगबुगाहट के साथ ही रायपुर के गली-मोहल्लों में बड़े नेताआें की सक्रियता बढ़ गई है। इसके लिए कांग्रेस के नेता तो सक्रिय हैं ही। इस नियम का विरोध कर रहे भाजपा के नेताआें ने भी अपनी जोर-आजमाइश शुरू कर दी है। इनमें कई एेसे दिग्गज नेता भी दिखने लगे हैं जो सिर्फ अपने आकाआें के इर्द-गिर्द ही नजर आया करते थे। कुछ ने अभी से पार्षद टिकट की दावेदारी करनी भी शुरू कर दी है क्योंकि उन्हें लग रहा है कि पार्षद बनने के बाद महापौर बनने का रास्ता साफ होगा।

महापौर बनने विधायक तक पार्षद चुनाव लड़ने की तैयारी में, रायपुर समेत कई निकायों में दिग्गज उतरेंगे

सामान्य है राजधानी की सीट

रायपुर नगर निगम में मेयर सीट का आरक्षण हो चुका है। पिछली बार की तरह इस बार भी सामान्य वर्ग का महापौर निगम में बैठेगा। सामान्य सीट होने के कारण राजधानी में दावेदारों की संख्या भी काफी अधिक हो गई है क्याेंकि कांग्रेस आैर भाजपा दोनों ही पार्टी में ब्राह्मण आैर ठाकुर दावेदारों की संख्या काफी अधिक है। अब वे नेता जो निगम,मंडल की तलाश में लगे थे वे अब पार्षद टिकट की आस लगाए बैठे हैं।

कांग्रेस-भाजपा से इनकी दावेदारी

कांग्रेस से महापौर प्रमोद दुबे, विधायक द्वय विकास उपाध्याय, कुलदीप जुनेजा, एजाज ढेबर, श्रीकुमार मेनन, विकास तिवारी, ज्ञानेश शर्मा। भाजपा से -पूर्व मंत्री राजेश मूणत, सूर्यकांत राठौर, राजीव अग्रवाल, संजय श्रीवास्तव, अशोक पांडे, मृत्युंजय दुबे, मीनल चौबे।

अप्रत्यक्ष चुनाव होने पर नहीं बदलेगा महापौर-अध्यक्षों का आरक्षण

प्रदेश में महापौर और अध्यक्ष पद के चुनाव के तरीके को लेकर अभी तक स्थिति स्पष्ट नहीं हो पाई है। यानी जनता सीधे इन पदों पर उम्मीदवारों को चुनेगी या फिर अप्रत्यक्ष तरीके से पार्षदों के जरिए इन पदों पर उम्मीदवार चुने जाएंगे। प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष चुनाव को लेकर कयासों का दौर जारी है। अगर प्रदेश में अप्रत्यक्ष तरीके से महापौर या अध्यक्ष पद का चुनाव होता है, तो इस स्थिति में भी इनके लिए हुए आरक्षण की स्थिति में कोई बदलाव नहीं होगा।

पिछले महीने प्रदेश में नगरीय निकायों के लिए आरक्षण की प्रक्रिया हुई थी। जिसके बाद राज्य के 13 नगर निगमों में से 2 अनुसूचित जाति जिसमें एक महिला भी है। एक अनुसूचित जनजाति, तीन सीट ओबीसी जिसमें एक महिला सीट आरक्षित हुई है। जबकि दो सीट अनारक्षित महिला और पांच सीट अनारक्षित वर्ग के लिए रखी गई है। इसमें रायपुर नगर निगम में मेयर पद भी सामान्य है। अप्रत्यक्ष चुनाव की स्थिति में भी मेयर की कुर्सी अनारक्षित ही रहेगी। दरअसल, एक बार निकायों के मेयर और अध्यक्ष के आरक्षण की प्रक्रिया हो जाने के बाद अप्रत्यक्ष चुनाव की स्थिति में भी आरक्षण को यथावत ही रखा जाता है।





इसलिए कोई बदलाव नहीं होगा। चुने हुए पार्षदों के बीच से अनारक्षित वर्ग से मेयर का चुनाव होगा।

दिसंबर अंत तक चुनाव

प्रदेश में 151 नगरीय निकायों में दिसंबर के अंत तक चुनाव होंगे। इनमें 13 नगरनिगम, 44 नगरपालिका और 111 नगर पंचायतें हैं। इन सभी के लिए सितंबर के महीने में आरक्षण की प्रक्रिया पूरी हुई थी। वार्डों का आरक्षण भी पहले किया जा चुका है। प्रदेश सरकार ने अभी तक मेयर और अध्यक्ष पदों पर चुनाव सीधे होंगे या अप्रत्यक्ष तरीके से तय नहीं किया है।

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