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बर्फी में मानक से ज्यादा दूध पाउडर, जलेबी में लकड़ी पेंट करने वाला कलर, मिक्चर भी निकला मिसब्रांड

एक वर्ष पहले
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राजधानी में त्योहारी सीजन में मिठाई से लेकर खाने-पीने की चीजों में मिलावट किए जाने का खुलासा हुआ है। लैब वैन में 67 प्रकार के खाद्य पदार्थों की सैंपलिंग की गई। इनमें से 27 सैंपल अमानक पाए गए हैं। जिसमें मिठाई से लेकर मिक्चर तक शामिल हैं।

डीबी स्टार और खाद्य एवं औषधि प्रशासन की संयुक्त टीम ने शहर में दो दिनों तक त्योहारी सीजन में बिकने वाली सामाग्रियों की जांच-पड़ताल करने के लिए पहुंची। इस दौरान मिठाइयों के सैंपल लिए गए। इसी तरह मिक्चर और नाश्ते की सामाग्रियों की जांच की गई। जिसकी टेस्टिंग लैब वेन में कराई गई। इसमें पता चला कि बर्फी में मानक से ज्यादा दूध पाउडर मिलाया गया है। वहीं, ज्यादा दूध पाउडर मिलाने की वजह से मिठाई के टेस्ट बदल जाते हैं। इसी तरह जलेबी में भी अखाद्य रंग मिलाने का खुलासा हुआ है। जिसे गाय छाप रंग के नाम से जाना जाता है। वहीं रंग को जलेबी में मिक्स किया जाता है, जबकि वह लकड़ी पेंट करने वाला रंग है। इससे सेहत को काफी नुकसान होता है। साथ ही मिक्चर भी मिसब्रांड पाए गए हैं। मिक्चर में मैनुफैक्चरिंग की तारीख भी नहीं लिखी गई है।

पैकेट इसलिए मिसब्रांड

रायपुर शहर के ज्यादातर दुकानों में बिकने वाले पैकेट आइटम मिसब्रांड मिले हैं। मिसब्रांड यानी उसमें मैनुफैक्चरिंग डेट और लेवलिंग नहीं मिले, जबकि उसमें लेवल संबंधी सारी जानकारी होना अनिवार्य है। फिर भी ऐसी लापरवाही व्यापारी लंबे समय से कर रहे हैं। कार्रवाई के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति ही हो रही है।

लैब में भी भेजे सैंपल

अलग-अलग जगहों से सैंपल लिए गए। जिसमें खाने-पीने की चीजों की सैंपलिंग की गई। इसमें मिसब्रांड से लेकर सबस्टैंडर्ड चीजें पाई गई। साथ ही जिन चीजों की प्राथमिक चेकअप कराई गई, उन्हें दोबारा लैब में भी भेजा गया है।
- बेनीराम साहू, सहायक आयुक्त, खाद्य एवं औषधि विभाग

नियम तेल को बेचने का फिर भी नहीं बेचते

दरअसल, समोसा, कचौरी और पकौड़े तलने वाले तेल को बेचने का नियम है। यानी शासन ने आदेश जारी किया था कि 21 रुपए लीटर में पकौड़े तलने वाले तेल को खरीदेगी। यानी एक बार के बाद उस तेल को व्यापारी खाद्य एवं औषधि विभाग को ही बेच सकते हैं, लेकिन ज्यादातर व्यापारी तेल नहीं बेचते हैं।

रंग वाली मिठाइयां सबसे ज्यादा घातक

फूड सेफ्टी ऑफिसर आशीष यादव बताते हैं कि रंग वाली मिठाई सबसे घातक होती है। ऐसे रंग कई दुकान में मिले। जिसे नष्ट करवाया गया और नसीहत दी गई कि दोबारा इस तरह के रंगों को मिक्स किए जाने पर कार्रवाई की जाएगी। दरअसल, ऐसे रंग सेहत के लिए सबसे घातक होते हैं।

इनकी सैंपलिंग की

दो दिनों में शहर के अलग-अलग हिस्से जिसमें रावाभांठा के दुकानों से सैंपल लिए गए। इसके अलावा बिरगांव मार्केट से भी सैंपल लिए गए हैं। जिसमें खोवा, मैदा, बेसन, मूंगदाल, क्रीमरोल, बिस्किट, बर्फी, मगज लड्‌डू, बेसन लड्‌डू, नमकीन, बालुशाई समेत अन्य चीजों के सैंपल कलेक्ट कर जांच की गई।

_photocaption_ एक के बजाय पांच-पांच बार तल रहे समोसे और कचौरी, नहीं बदलते तेल
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{ बर्फी में मानक से ज्यादा दूध पाउडर को मिक्स किया गया।

{ जलेबी रंग में ज्यादा मात्रा में कलर मिक्स किया जाता हैं, जो कि लकड़ी पेंट करने के काम आता है।

{ बेसन के सैंपल भी अमानक हैं। जिसमें पता चला है कि हल्के कण बन गए थे।

{ नमकीन भी मिसब्रांड निकला है, जिसमें मैनुफैक्चरिंग की डेट ही नहीं है। यानी कब बनाया गया और कब तक चलेगा। इसकी जानकारी भी नहीं है।



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