पंचायतों को स्वच्छ बनाने 2700 सेज्यादा प्रोजेक्ट, सिर्फ 65 काम हुए पूरे

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Feb 15, 2020, 07:41 AM IST
राज्य स्वच्छ भारत मिशन के तहत पंचायतों को स्वच्छ बनाने के नाम पर लापरवाही उजागर हुई है। एक साल के भीतर 27 सौ से ज्यादा प्रोजेक्ट बनाए गए, लेकिन 65 डीपीआर के ही काम पूरे कर पाए। इसी तरह रायपुर में सैकड़ों प्रोजेक्ट
बनाने के बावजूद एक भी काम पूरा नहीं हुआ।


वर्ष 2019 में स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) के तहत डीपीआर प्रोजेक्ट की रिपोर्ट जारी हुई है। इस रिपोर्ट ने स्वच्छ भारत मिशन के दावों की पोल खोल दी है। पूरे प्रदेश में पंचायतों को स्वच्छ बनाने के नाम पर 2714 सॉलिड एंड लिक्विड वेस्ट मैनेजमेंट के डीपीआर बनाए गए। हालांकि 539 प्रोजेक्ट पर ही काम शुरू हो पाए, जबकि सिर्फ 65 प्रोजेक्ट ही एक साल के भीतर पूरे हो पाए। इसी तरह रायपुर में पंचायतों के लिए 240 प्रोजेक्ट बनाए गए। इनमें से 20 प्रोजेक्ट पर ही काम शुरू कर पाए। वहीं साल भर में एक भी काम पूरा नहीं कर पाए। हालांकि सरगुजा और राजनांदगांव ऐसे जिले हैं, जहां पर पंचायतें प्रदेश भर में काम करने के नाम पर अव्वल हैं। वहीं डीपीआर एप्रूवड भी 700 से ज्यादा हुए हैं।

ऐसे समझें, क्यों जरूरी है सॉलिड एंड लिक्विड वेस्ट मैनेजमेंट प्रोजेक्ट

स्वच्छ भारत मिशन के तहत पंचायतों में मकानों का डेटाबेस तैयार किया जाता है। जहां से कचरे के उठाव और फिर सूखा-गीला कचरा को अलग-अलग करना होता है। फिर किस तरह उस कचरे का निष्पादन किया जाएगा। यह सबकुछ डीपीआर में तैयार करना होता है। जिससे ग्राम पंचायतें साफ-सुथरी रह सकें। इसलिए यह प्रोजेक्ट प्रदेशभर में अनिवार्य किया गया है।

कचरा उठाव का प्लान बनाया, लेकिन निष्पादन के लिए नहीं बना पाए व्यवस्था

पंचायतों में घरों से कचरे उठाव का प्लान तैयार किया गया है, लेकिन निष्पादन प्रक्रिया नहीं अपनाई जाती है। जिसकी वजह से निष्पादन कार्य नहीं हो पा रहा है, जबकि गांवों में पंचायतों के पास जगह है। फिर भी निष्पादन का कार्य जनप्रतिनिधि नहीं करवा पाते हैं। यही वजह है कि स्वच्छ भारत मिशन के तहत ज्यादातर प्रोजेक्ट सफल नहीं हो पा रहे हैं।

रायपुर से बेहतर काम सरगुजा और राजनांदगांव में

रायपुर जिले में ही सबसे ज्यादा प्रोजेक्ट बनाने का लक्ष्य रखा गया। 240 प्रोजेक्ट में से 100 प्रोजेक्ट ही तैयार हो पाए। इनमें से 45 प्रोजेक्ट ही एप्रूवड हुए। जबकि राजनांदगांव ऐसा जिला है, जहां पर 139 डीपीआर बनाने का लक्ष्य रखा गया। जिसमें से 66 डीपीआर तैयार किए गए और सभी डीपीआर एप्रूवड भी हुए हैं। इसके अलावा 21 प्रोजेक्ट पर काम शुरू हुआ और 13 प्रोजेक्ट के काम पूरे भी हो गए। इसी तरह सरगुजा में 92 प्रोजेक्ट में से 46 प्रोजेक्ट शुरू हुए आैर 20 प्रोजेक्ट पूरे हो गए हैं।

अब पांच साल के लिए बनाएंगे प्रोजेक्ट


जानिए, जिलेवार सॉलिड एंड लिक्विड वेस्ट मैनेजमेंट प्रोजेक्टों के हाल


जिला टारगेट अधूरे काम पूर्ण कार्य

रायपुर 240 20 00

बालोद 80 15 00

बलौदाबाजार 205 47 00

बस्तर 72 16 00

बिलासपुर 56 56 00

रायगढ़ 150 08 00

राजनांदगांव 139 21 13

सरगुजा 92 46 20

DB star expose

रायपुर में ही 240 प्रोजेक्ट एक का भी काम पूरा नहीं

शौचालय निर्माण की जांच नहीं मॉनीटरिंग न होने से ज्यादा गड़बड़ियां

ग्राम पंचायतों में शौचालयों का निर्माण कराने के लिए मॉनीटरिंग की व्यवस्था नहीं की गई है। यहां तक कि शौचालय निर्माण की जांच भी नहीं होती है। जिसकी वजह से करोड़ों रुपए बजट मिलने के बावजूद भी उसका वेरिफिकेशन किए ही भुगतान कर दिया जाता है, जबकि स्पाॅट का वेरिफिकेशन भी अनिवार्य है। ज्यादातर गांव अब भी पूर्ण ओडीएफ नहीं है।

सबसे खराब प्रदर्शन गरियाबंद और बलरामपुर जिलों में

बलरामपुर में 120 डीपीआर बनाने का लक्ष्य रखा गया, लेकिन एक साल में सिर्फ 5 प्रोजेक्ट ही तैयार किए जा सके। इनमें एक भी काम शुरू नहीं हो पाया। न ही काम पूरा कर पाए। इसके अलावा गरियाबंद में 75 डीपीआर बनाने का लक्ष्य रखा गया। इनमें से सिर्फ 13 ही डीपीआर बना पाए। इनमें से दो पर ही काम शुरू कर पाए
लेकिन एक भी काम पूरा नहीं किया जा सका।

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