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नेशनल रैंकिंग : कमजोर रिजल्ट, रिसर्च समेत अन्य कारणों से इस बार भी उम्मीद कम

एक वर्ष पहले
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पिछली बार टॉप-100 से बाहर थी यूनिवर्सिटी

आर्ट्स और अन्य विभागों में रिसर्च प्रोजेक्ट के नाम पर कुछ नहीं

पहले साल टॉप-100 में था रविवि

शिक्षाविदों ने बताया कि एनआईआरएफ की ओर से चार-पांच साल से शिक्षण संस्थानों की रैंकिंग की जा रही है। इसके अनुसार लिस्ट भी जारी होती है। जिससे यह पता चलता है कि कौन सा संस्थान अच्छा है। इसमें तकनीकी संस्थानों के लिए अलग, उच्च शिक्षा से जुड़े संस्थानों के लिए अलग लिस्ट जारी होती है। पहले साल जब यह रैंकिंग शुरू हुई तब रविवि को टॉप-100 की सूची में रखा गया था। दूसरी बार जब लिस्ट जारी हुए तब विवि का प्रदर्शन खराब था। इसके बाद से लगातार गिरावट ही आ रही है।

रिसर्च पेपर में कई विभाग कमजोर

रविवि का रिजल्ट पिछले कुछ बरसों से कमजाेर रहा है। ग्रेजुएशन प्रथम वर्ष में 30 से 35 प्रतिशत छात्र ही पास हो रहे हैं। न सिर्फ रिजल्ट, बल्कि रिसर्च के मामले में भी रविवि फिसड्डी साबित हो रहा है। शिक्षाविदों का कहना है कि इसमें भी गिरावट आयी है। साइंस के कुछ विभागों को छोड़ दिया जाए तो आर्ट्स और अन्य विभागों में रिसर्च प्रोजेक्ट के नाम पर कुछ भी नहीं है। वहीं दूसरी ओर रिसर्च पेपर पब्लिकेशन के मामले में भी कई विभाग कमजोर हैं। हालांकि, कुछ सुधार भी हुए हैं लेकिन इसका रैंकिंग पर कितना असर पड़ेगा यह कहना मुश्किल है।

एजुकेशन रिपोर्टर | रायपुर

छत्तीसगढ़ के प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थानों में से एक, पं.रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय का स्थान देश में कितना है यह बताने के लिए अप्रैल में लिस्ट आएगी। पिछली बार नेशनल रैंकिंग में रविवि टॉप-100 में भी जगह नहीं बना पाया था। उसे नेशनल इंस्टीट्यूशनल रैंकिंग फ्रेमवर्क (एनआईआरएफ) की रैंकिंग में 151 से 200 स्थान के बीच रखा गया था। कमजोर रिजल्ट और रिसर्च की वजह से इस भी उम्मीदें ज्यादा नहीं है। टॉप-100 तक पहुंचना कठिन माना जा रहा है।

एनआईआरएफ की रैंकिंग को लेकर कुछ महीने पहले राज्य के शिक्षण संस्थानों से विभिन्न तरह की जानकारियां मांगी गई थी। इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के अलावा रविवि और राज्य के दूसरे अन्य विश्वविद्यालयों ने जानकारी भेज दी है। इसमें शिक्षकों की संख्या, छात्र संख्या, रिजल्ट समेत अन्य को लेकर जानकारी मांगी गई है। शिक्षाविदों का कहना है कि पिछले कुछ बरसों से नेशनल रैंकिंग की लिस्ट अप्रैल के पहले सप्ताह में जारी होती रही है। इस बार भी लिस्ट आने का समय लगभग पहले जैसा ही होगा। क्योंकि, शिक्षण संस्थानों से जानकारी भेजी जा चुकी है। इसके अनुसार लिस्ट तैयार किया जा रहा है। शिक्षाविदों का कहना है कि राज्य के अन्य राजकीय विश्वविद्यालयों की स्थिति भी अच्छी नहीं है। इसलिए दूसरे विवि से भी उम्मीदें कम है।
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