अंबेडकर अस्पताल के ट्रामा सेंटर में न्यूरो सर्जन, पैरामेडिकल स्टाफ की होगी भर्ती

News - अंबेडकर अस्पताल के ट्रामा सेंटर में न्यूरो सर्जन नहीं होने से सिर में चोट वाले मरीजों का तत्काल इलाज नहीं हो पा...

Dec 04, 2019, 08:36 AM IST
अंबेडकर अस्पताल के ट्रामा सेंटर में न्यूरो सर्जन नहीं होने से सिर में चोट वाले मरीजों का तत्काल इलाज नहीं हो पा रहा है। इस परेशानी को दूर करने के लिए ट्रामा सेंटर को अपग्रेड करने का प्रस्ताव है। हेड इंजरी के मरीजों को तत्काल इलाज मिले, इसके लिए वहां न्यूरो सर्जन की भर्ती की जाएगी। इससे मरीजों के इलाज में आसानी होगी। न्यूरो सर्जन के साथ बाकी स्टाफ की भर्ती जरूरत के हिसाब से की जाएगी। प्रबंधन वर्तमान में 179 पदों पर भर्ती कर रहा है। चुने गए कर्मचारियों की ड्यूटी ट्रामा सेंटर में भी लगाई जाएगी।

ट्रामा सेंटर में आर्थोपीडिक, जनरल सर्जरी, मेडिसिन विभाग के डॉक्टरों की ड्यूटी रहती है। जबकि मल्टीपल इंजरी वाले मरीजों के इलाज के लिए न्यूरो सर्जन की जरूरत होती है। सड़क दुर्घटना में सबसे ज्यादा व बिना हेलमेट दुर्घटना में सिर में गंभीर चोट के केस आते हैं। न्यूरो सर्जरी समेत सभी सुपर स्पेशलयालिटी डीकेएस में शिफ्ट हो गया है। अंबेडकर में न्यूरो सर्जन की भर्ती की जाएगी। ट्रामा सेंटर का नोडल अफसर ऑर्थोपीडिक विभाग के प्रोफेसर को बनाया गया है। पहले हो चुकी कई बैठकों में सभी एचओडी ने मरीजों की राहत के लिए न्यूरो सर्जन की नियुक्ति का सुझाव दिया है, ताकि हेड इंजरी वाले मरीजों को राहत मिल सके।

डीकेएस में आठ न्यूरो सर्जन, फिर भी हो रही मरीजों को परेशानी

डीकेएस में आठ न्यूरो सर्जन सेवाएं दे रहे हैं। वहां एक प्रोफेसर के साथ दो एसोसिएट प्रोफेसर, चार असिस्टेंट प्रोफेसर व एक सीनियर रेसीडेंट हैं। यही नहीं एमसीएच की दो सीट भी शुरू हो चुकी है। इसमें दो जूनियर डॉक्टर हैं। डीकेएस व अंबेडकर अस्पताल नेहरू मेडिकल कॉलेज के अधीन है। ऐसे में वहां के न्यूरो सर्जन को रोस्टर-वाइस ड्यूटी लगाकर अंबेडकर के ट्रामा सेंटर में भर्ती मरीजों को राहत दी जा सकती है, लेकिन ऐसा नहीं हो रहा है।

डीकेएस में सीधे नहीं कर सकते भर्ती... डीकेएस में ट्रामा सेंटर नहीं होने के कारण हेड इंजरी वाले मरीजों को सीधे वहां नहीं भेज सकते। पहले मरीजों को अंबेडकर अस्पताल ले जाना होगा। इसके बाद मरीज का इलाज कर जरूरत के हिसाब से डीकेएस भेजा जा रहा है। कई बार डीकेएस पहुंचने के पहले मरीज की मौत हो जाती है।


नेहरू मेडिकल कॉलेज में असिस्टेंट प्रोफेसर के 39 समेत 89 पद खाली

अंबेडकर में असिस्टेंट प्रोफेसर के 39 समेत सीनियर, जूनियर रेसीडेंट व डेमोंस्ट्रेटर के 89 पद खाली है। वेतन कम होने का हवाला देकर डॉक्टर ज्वाइन नहीं करना चाहते। सोमवार को हुए वॉक इन इंटरव्यू में केवल दो डॉक्टर पहुंचे। इनमें एक को गायनी में असिस्टेंट प्रोफेसर व दूसरे को जूनियर रेसीडेंट स्किन में ज्वाइन करवाया गया। कार्डियोलॉजी विभाग केवल एक डॉक्टर के भरोसे हैं। जबकि डीकेएस में गेस्ट्रोलॉजिस्ट व न्यूरोलॉजिस्ट ही नहीं है।

नर्सों के फार्म भरने का आज अंतिम दिन, 2800 जमा हुए

हेल्थ रिपोर्टर | रायपुर

अंबेडकर अस्पताल में 100 पदों पर भर्ती के लिए मंगलवार को 600 नर्सों ने फार्म जमा किया। तीन दिनों में 2800 से ज्यादा फार्म जमा हो चुके हैं। बुधवार को नर्सों के फार्म जमा करने का आखिरी दिन है।

गुरुवार को 17 रेडियोग्राफर समेत ईसीजी टेक्नीशियन, ओटी टेक्नीशियन, टेक्नीकल असिस्टेंट स्टरलाइजेशन, ओटी सुपरवाइजर, लैब टेक्नीशियन, फार्मासिस्ट ग्रेड दो, एक्स-रे असिस्टेंट, ड्रेसर थिएटर के 31 पदों पर भर्ती के लिए फार्म जमा किए जाएंगे। इसके पहले एसीआई के 50 पदों पर भर्ती की गई थी। शनिवार को 1500 से ज्यादा नर्सों ने फार्म जमा किया। इससे अस्पताल की व्यवस्था चरमरा गई थी। डीकेएस व निजी अस्पतालों में कार्यरत संंविदा व दैनिक वेतनभोगी नर्स भी अंबेडकर में नौकरी करने के लिए कतार में है। भास्कर की पड़ताल में पता चला है कि डीकेएस में कार्यरत 200 से ज्यादा नर्सों ने अंबेडकर में आवेदन किया है। दरअसल अंबेडकर अस्पताल में भर्ती की जाने वाली नर्सों को हर माह 21 हजार रुपए मासिक वेतन दिया जाएगा।

डीकेएस में यह वेतन 10 हजार व 16 हजार रुपए महीना है। 11 दिसंबर को मेडिको सोशल वर्कर के लिए आवेदन जमा होंगे। शनिवार को डिग्री विवाद के कारण काफी विवाद हुआ था। पीआरओ के लिए भी 50 से ज्यादा आवेदन जमा हुए हैं। अस्पताल के उप अधीक्षक डॉ. अल्ताफ युसूफ मीर ने बताया कि फार्म जमा होने के बाद फार्मों की स्क्रूटिनी की जाएगी।

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