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मरकाम की टीम में होंगे नए चेहरे ज्यादा, देवांगन की जगह लेंगे रवि घोष
लंबे जद्दोजहद के बाद आखिरकार पीसीसी चीफ मोहन मरकाम की नई टीम तैयार हो गई है। नई टीम में प्रदेश कार्यकारिणी से लेकर जिला अध्यक्ष तक के सभी पदों पर नए चेहरे ज्यादा नजर आएंगे। मरकाम की टीम का प्रमुख चेहरा उनके करीबी रवि घोष होंगे, जो वर्तमान में प्रभारी महामंत्री गिरीश देवांगन की जगह लेंगे। हालांकि उनकी नियुक्ति महामंत्री के रूप में होगी, फिर देवांगन की जगह प्रभारी महामंत्री बनाया जाएगा। महामंत्री से लेकर उपाध्यक्ष आैर सचिवों में अनुभवी, युवा आैर संघर्ष करने वाले नेताआें को जगह दी गई है। एआईसीसी से नई टीम को हरी झंडी मिल गई है।
कांग्रेस की सरकार बने डेढ़ साल से ज्यादा समय बीत चुका है। मुख्यमंत्री बनने के बाद भूपेश बघेल प्रदेश अध्यक्ष की कुर्सी छोड़ चुके हैं। उनके स्थान पर मोहन मरकाम को पीसीसी चीफ बनाया गया है। मरकाम के प्रदेश अध्यक्ष की कमान संभालने के साथ ही प्रदेश प्रभारी पीएल पुनिया ने कहा था कि नए अध्यक्ष के साथ ही पुरानी कार्यकारिणी भंग हो गई है। लेकिन संगठन के काम के संचालन के लिए नई कार्यकारिणी के गठित होते तक पुरानी टीम को ही सक्रिय रहने कहा गया था। कांग्रेस के प्रभारी महामंत्री गिरीश देवांगन ने कहा कि संगठन मंे वे काफी समय दे चुके हैं। बड़े नेताओं काे अपनी इच्छा से अवगत करा दिया है।
सभी जिलों में नए अध्यक्ष, 8 से ज्यादा में महिलाएं
पीसीसी की नई कार्यकारिणी के साथ जिलों के अध्यक्ष भी बदले जाने के संकेत हैं। लेकिन बताया गया है कि राजधानी रायपुर शहर और ग्रामीण समेत कुछ बड़े जिलों में संगठन के कामकाज के सुचारु संचालन के लिए पुराने अध्यक्षों को ही रिपीट किया जा सकता है। जबकि संकेत हैं कि प्रदेश के 8 से अधिक जिलों में अध्यक्ष की कमान महिलाआें को दिया जा रहा है।
ढाई सौ से अधिक लोगों की होगी नई टीम
उल्लेखनीय है कि पीसीसी ने विधानसभा चुनाव के ठीक पहले अपनी कार्यकारिणी गठित की थी। इस जंबो कार्यकारिणी में 11 उपाध्यक्ष, 22 महासचिव, 32 संयुक्त महासचिव, 134 सचिव, 46 संयुक्त सचिव, 7 सदस्य, 18 स्थायी आमंत्रित सदस्य, 61 विशेष आमंत्रित सदस्य बनाए गए थे।
दूसरे दल से आए नेताआें को ज्यादा तवज्जो नहीं
बताया गया है कि संगठन के विस्तार में लगभग सभी जिलों के नेताआें की पीसीसी में महत्व दिया गया है। लेकिन दूसरे दलों से आए नेताआें को ज्यादा महत्व नहीं दिया गया है। संगठन से जुड़े नेताआें का कहना है कि लगातार कांग्रेस पार्टी के लिए संघर्ष करने वालों क को ही संगठन में जगह दी गई है। कहीं-कहीं अपवाद भले हो सकता है।
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