सुपेबेड़ा में किडनी खराब होने के लिए सिर्फ पानी ही नहीं, दूसरे भी कई कारण

News - देवभोग के सुपेबेड़ा में लोगों की किडनी खराब होने के लिए अकेले दूषित पानी जिम्मेदार नहीं है। इसके और भी कई कारण...

Jan 16, 2020, 07:35 AM IST
Raipur News - chhattisgarh news not only water but other reasons for kidney failure in supebeda
देवभोग के सुपेबेड़ा में लोगों की किडनी खराब होने के लिए अकेले दूषित पानी जिम्मेदार नहीं है। इसके और भी कई कारण हैं। ये जेनेटिक के साथ भूगर्भीय होने के संकेत हैं। आंध्रप्रदेश के श्रीकाकुलम भी इसी तरह के मरीज मिले हैं। एम्स के नेफ्रोलॉजिस्ट ने अपने प्रेजेंटेशन में बताया कि महासमुंद व ओडिशा के बलांगीर और कालाहांडी में इस तरह के मरीज मिले हैं।

लाभांडी स्थित एक होटल में बुधवार को इंटरनेशनल एसोसिएशन आफ नेफ्रोलॉजी के अध्यक्ष डॉ. विवेकानंद झा व इंडियन एसोसिएशन आफ नेफ्रोलॉजी के पूर्व अध्यक्ष डॉ. विजय खेर प्रदेश के नेफ्रोलॉजिस्ट, भूगर्भशास्त्री व पर्यावरणविद से रूबरू हुए। डॉ. झा व डॉ. खेर ने कहा कि इसमें कोई संदेह नहीं कि लोगों को स्वच्छ पानी की जरूरत है। देवभोग में उन्होंने मरीजों से बात की है। उसके बाद ही विशेषज्ञों ने कहा कि वहां किडनी खराब होने के लिए पानी के साथ दूसरे कारक भी जिम्मेदार है। विशेषज्ञों के अनुसार कृषक व मजदूर धूप में कड़ी मेहनत करते हैं। इससे शरीर का पानी निकल जाता है। ऐसा होने से किडनी में पर्याप्त ब्लड नहीं पहुंचता और किडनी खराब होने लगती है। बिना डॉक्टरी सलाह दर्द निवारक टेबलेट लेने से किडनी खराब हो जाती है। सीएचसी में आसानी से किडनी की जांच की जा सकती है। एम्स के नेफ्रोलॉजिस्ट डॉ. विनय राठौर ने इलाज के दौरान पाया कि महासमुंद व ओडिशा के कुछ जिलों के मरीजों की किडनी सुपेबेड़ा की तरह खराब हो रहे हैं।

बीमारी को जड़ से खत्म करना जरूरी : कार्यक्रम में नेफ्रोलॉजिस्ट ने सुपेबेड़ा में किडनी बीमारी को जड़ से खत्म करने पर बल दिया। डीएमई डॉ. एसएल आदिले, अंबेडकर अस्पताल के अधीक्षक डॉ. विनीत जैन के अलावा नेफ्रोलॉजिस्ट डॉ. एसए काले, डॉ. राजू साहू, डॉ. प्रवाष चौधरी, डॉ. सुनील धर्मानी, डॉ. सांईनाथ पत्तेवार, डॉ. शुभा दुबे के अलावा कम्युनिटी मेडिसिन के डॉ. निर्मल वर्मा, डॉ. कमलेश जैन, डॉ. अभिरूचि गेल्होत्रा ने भी विचार रखे।

सरकारी डॉक्टरों की पहुंच कम है, नए भेजेंगे- सचिव

स्वास्थ्य सचिव निहारिका बारीक ने कहा कि सुपेबेड़ा व अंदरूनी गांवों में सरकारी डॉक्टरों की पहुंच कम है। हम इन गांवों में डॉक्टर की पोस्टिंग करंेगे। संभव हुआ तो निजी डॉक्टरों की मदद लेंगे। उन्होंने दावा कि देवभोग इलाके में ओडिशा से पेनकिलर व अन्य दवा की सप्लाई हो रही है। हमने वहां से सैंपल लिए हैं और जांच के लिए लैब भेजी है। वहां से रिपोर्ट आने के बाद कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने विशेषज्ञों से पूछा कि ऐसा क्या करें कि किडनी बीमारी शुरुआत से पता चल जाए। उन्होंने इपिडिम्योलॉजिकल स्टडी व सर्विलेंस यूनिट लगाने पर भी जोर दिया। इससे बीमारी के कारण व नेचर का पता चलेगा कि कहीं यह जेनेटिक तो नहीं है या दूषित पानी से हो रहा है।

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