पांच पेड़ों से बना पचपेढ़ी, मराठा शासकों ने बनवाया नाका

News - धमतरी मार्ग में स्थित यह चौराहा पचपेढ़ी नाका के नाम से जाना जाता है। अंग्रेजों के जमाने से पहले यहां पर पेड़ लगाए गए...

Nov 10, 2019, 07:46 AM IST
धमतरी मार्ग में स्थित यह चौराहा पचपेढ़ी नाका के नाम से जाना जाता है। अंग्रेजों के जमाने से पहले यहां पर पेड़ लगाए गए थे। पहले उसे लोग पचपेढ़ी कहा जाता था, लेकिन अंग्रेजों ने चारों दिशाओं में नाका बनाया। उसमें से एक नाका यह भी है, जिसे पचपेढ़ी नाका के नाम से पुकारा जाने लगा। हालांकि वहां पर आज पांच पेड़ अस्तिव में नहीं है। इसके अलावा इन्हीं नाका के नाम पर एक और आमानाका पड़ा है। आमानाका भी अंग्रेजों के समय में ही रखा गया है। जिसे आज भी पचपेढ़ीनाका के नाम से जाना जाता है।

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लगभग 250 साल पहले बनाया गया नाका

पहले जिन-जिन जगहों का नाम अधूरा था, लेकिन उसे मराठा शासकों के जमाने में नाका के नाम से जाना जाने लगा। लगभग 250 साल पहले इसे नाका घोषित किया गया। पूर्व में यही मार्ग दूसरे शहर के तरफ आवाजाही करने वाले मार्ग को जोड़ता था। यही बस्तर जाने का मार्ग है।

बाजारों और नाकों से रेकी

इतिहासविद् डॉ. आरके बेहार बताते हैं अंग्रेजों के जमाने में शहर के प्रमुख बाजारों और नाकों के आसपास क्षेत्र में सक्रियता रहती थी। इसके चलते ही नाकों का निर्माण कराया गया। ताकि वहां से होकर आने-जाने वाले लोगों ही नहीं बाहर से आने वाले लोगों की भी निगरानी और रेकी की जा सके। इसके चलते ही यहां पर अंग्रेज अफसर तैनात रहते थे।

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शहर में प्रवेश के लिए वैसे तो कई मार्ग हैं। मगर पचपेढ़ी नाका से ही अब भी लोग प्रवेश करते हैं। इसके पास ही बाद में रिंगरोड का निर्माण किया गया। इसके चलते लोग इसे लोग नेशनल हाइवे के नाम से भी पहचानते हैं। लेकिन यहां की पुरानी पहचान अब भी लोगों की जुबान पर है।

बड़ा व्यापारिक केन्द्र

जिस जगह को पहले केवल पचपेढ़ी नाम से जाना गया और बाद में नाका बनने से नई पहचान पचपेढ़ी नाका के रूप में मिली। अब यह क्षेत्र केवल इस पुरानी पहचान का मोहताज नहीं है। क्योंकि अब यहां पर कई ऐसे बड़े संस्थान भी शुरू हो गए हैं। दूसरे राज्यों से लोग आज भी यहां आते हैं। यह क्षेत्र पहले की अपेक्षा ज्यादा विकसित हुआ है।

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