लोगों ने की पैनिक बाइंग, पर देश में 435 लाख टन का सरप्लस अनाज

News - जलवायु परिवर्तन से न सिर्फ ग्लोबल वार्मिंग की समस्या बढ़ी है, बल्कि दुनियाभर में खाद्य आपूर्ति भी बाधित हो सकती...

Mar 27, 2020, 07:01 AM IST
जलवायु परिवर्तन से न सिर्फ ग्लोबल वार्मिंग की समस्या बढ़ी है, बल्कि दुनियाभर में खाद्य आपूर्ति भी बाधित हो सकती है। शोधकर्ताओं का कहना है कि कठोर मौसम की वजह से सिर्फ एक देश में फसल के नष्ट होने से विश्वभर में खाद्य आपूर्ति बाधित हो गई हैै। वहीं भारत के संदर्भ में देखें तो सरकार ने कोरोना संकट के कारण 21 दिन का देशभर में लॉकडाउन कर दिया। हालांकि सरकार के अनुसार देश में खाद्य का पर्याप्त भंडार है।


शो धकर्ताओं ने अपने अध्ययन में पाया कि कैसे वैश्विक व्यापार और गेंहू की सप्लाई, जिसका इस्तेमाल मुख्य तौर पर रोटी, ब्रेड और पास्ता के लिए होता है, वह अमेरिका में चार साल के भीषण सूखे के कारण प्रभावित हो सकती है। अमेरिका अनाज के शीर्ष निर्यातकों में से एक है। शोधकर्ताओं ने दो मॉडलों का अध्ययन किया ये जानने के लिए कि देश अपनी जरूरतों को किस तरह से पूरी करता है। एक अंतरराष्ट्रीय रिसर्च टीम ने पाया कि अमेरिका का गेहूं भंडार चार साल बाद खत्म हो जाएगा, जबकि वैश्विक भंडार 31 फीसदी तक गिर सकता है। फ्रंटियर्स पत्रिका में छपे शोध के मुताबिक अमेरिका जिन 174 देशों को गेहूं निर्यात करता है, वहां फसलों के नष्ट होने के कारण भंडार में कमी आएगी।

क्लाइमेट चेंज से वैश्विक खाद्य आपूर्ति बाधित, कोरोना के बावजूद देश में पर्याप्त खाद्यान्न


दुग्ध की भी पर्याप्त उपलब्धता

भारत में 75 करोड़ लोगों को राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम प्रति यूनिट (व्यक्ति) 5 किलो अनाज हर महीने बेहद कम दरों (3 रुपए किलो चावल और 2 रुपए किलो पर गेहूं) देती है। पंजाब को छोड़ बाकी राज्यों में एक-एक महीने का राशन मिलता रहा है। भारत में सार्वजनिक वितरण प्रणाली के लिए अप्रैल महीने में 135 लाख टन चावल और 74.2 लाख टन गेहूं की जरूरत होगी। दुग्ध उत्पादन में भारत पिछले कई वर्षों से पहले पायदान पर है। डेयरी विकास बोर्ड के आंकड़ों के मुताबिक साल 2018-19 में भारत में 187.7 मिलियन टन दूध का उत्पादन हुआ था। बड़ी दुग्ध उत्पादन कंपनियां अभी से 15-17% ज्यादा प्रोडक्शन कर रही हैं।

ओलावृष्टि से बदली परिस्थितियां

कृषि वैज्ञानिकों और सरकार ने चालू सीजन में गेहूं के रिकॉर्ड उत्पादन का अनुमान भी जताया था, क्योंकि इस बार दक्षिणी पश्चिमी मानसून के दौरान लंबे समय बारिश होने से देश में गेहूं का रकबा बढ़ गया था। हालांकि मार्च आते-आते परिस्थितयां थोड़ी बदल गई हैं। कोरोना के साए के बीच देश के कई राज्यों में मार्च के महीने में भारी बारिश, ओलावृष्टि से फसलों को नुकसान पहुंचा है। देश में गेहूं, चावल और चीनी का लाखों टन बफर स्टॉक है। भारतीय खाद्य निगम की वेबसाइट के मुताबिक भारत के गोदामों में मार्च 2020 तक 584.97 लाख मीट्रिक टन गेहूं और चावल उपलब्ध है।

30 लाख टन चीनी का बफर स्टॉक

दुनिया और भारत में भी खाद्यान के काफी स्टॉक हैं। गेहूं और चावल के अलावा देश में 30 लाख टन चीनी का बफर स्टॉक है। अगर दालों की बात करें तो देश में दिसंबर 2019 में 16 लाख टन स्टॉक था, जिसमें से साढ़े 8 लाख टन वितरण पहले ही शुरू कराया जा चुका है, फिर भी बफर स्टॉक की मात्रा काफी है। जानकारों के अनुसार कृषि मंत्रालय ने इस साल गेहूं की रिकॉर्ड पैदावार 10.62 करोड़ टन होने का अनुमान जताया था। साल 2019 में देश में 10.36 करोड़ टन गेहूं पैदा हुआ था। साल 2018-19 में भारत ने गेहूं का 2,26,225 टन गेहूं का निर्यात भी किया था।


हमारे देश में अनाज और खाद्यान्न का पर्याप्त स्टॉक

इसी बीच कोरोना के प्रकोप के कारण देशभर में लॉकडाउन की स्थिति में लोग इस डर से बड़ी संख्या में खाद्य सामग्री खरीदकर संग्रहित कर रहे हैं कि कहीं बाद में दिक्कत न हो। लेकिन सरकार के आंकड़े कहते हैं कि ऐसा बिल्कुल नहीं है। सरकार के पास आने वाले समय के लिए पर्याप्त अनाज है। भारत सरकार का कहना है कि गोदाम में पर्याप्त अनाज है। केंद्रीय मंत्री रामविलास पासवान ने कहा है कि हमने राज्य सरकारों से कहा है कि वो एकसाथ 6 महीने का राशन कार्ड धारकों को दे दें। केंद्रीय मंत्री ने ये भी कहा कि सरकार के पास इस वक्त 435 लाख टन अधिशेष खाद्यान्न यानी सरप्लस अनाज है। इसमें 22.19 लाख टन गेहूं और 162.79 लाख टन चावल शामिल है।

भारत में ये रबी का सीजन है, जिसमें गेहूं, चना, सरसों, दालें आदि की बड़े पैमाने पर खेती होती है। ये रबी के सीजन में हार्वेस्टिंग यानी फसल कटाई का समय है। महाराष्ट्र और मध्यभारत के क्षेत्रों में गेहूं की नई फसल आ चुकी है, जबकि पंजाब, हरियाणा, यूपी बिहार समेत उत्तर भारत के राज्यों में अप्रैल के पहले हफ्ते में नई फसल आनी शुरू हो जाती है। इस तरह गोदामों में रखा अतिरिक्त लाखों टन अनाज बाजारों में आएगा।

कोरोना संकट में भारत

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