राजधानी में प्रदूषण मानीटरिंग का सिस्टम खराब, इसलिए नहीं सुधरी हवा की क्वालिटी

News - सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरमेंट ने क्लीन एयर प्रोग्राम में शामिल देशभर के 122 शहर जिनमें रायपुर भी है, के बारे में...

Feb 15, 2020, 07:40 AM IST

सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरमेंट ने क्लीन एयर प्रोग्राम में शामिल देशभर के 122 शहर जिनमें रायपुर भी है, के बारे में हाल में जारी एक रिपोर्ट में साफ किया गया है कि यहां प्रदूषण को मापने का सिस्टम ही खामियों से भरा हुअा है। नई दिल्ली में ब्रीदिंग स्पेस नाम से आई इस रिपोर्ट में रायपुर शहर की खामियों को लेकर तथ्य नहीं दिए गए हैं। लेकिन भास्कर ने इस किताब के को-राइटर अविकल सोमवंशी से बातचीत की, तो उन्होंने बताया कि शहर की अाबोहवा को मापने और नियंत्रण का सिस्टम ही बिगड़ा हुअा है। इसे नहीं सुधारा तो यहां प्रदूषण कम होने में बहुत वक्त लग जाएगा।

ब्रीदिंग स्पेस नाम से रिपोर्ट रिपोर्ट के अनुसार रायपुर में इंडियन नेशनल एयर क्वालिटी स्टैंडर्स यानी हवा की गुणवत्ता के लिए जो मानक बनाए गए हैं, हवा की मॉनीटरिंग उनके अनुरूप नहीं है। खासतौर पर पीएम 2.5 की मॉनिटरिंग के लिए कोई सैटअप नहीं है, पीएम 2.5 के जरिए हवा में घुली जहरीली गैसों की स्थिति का आकलन किया जा सकता है। इस लिहाज से देखे तो रोजाना कितनी जहरीली हवा हमारे फेफड़ों में समा रही है। इसको मापा ही नहीं जा रहा है। ये बेहद चिंताजनक स्थिति है क्योंकि इसके कारण ही हम वास्तविक तौर पर आबोहवा सही है या नहीं बता नहीं सकते हैं। मानकों के मुताबिक किसी भी शहर में आबोहवा की स्थिति को मापने के लिए कम से कम 104 दिन की मॉनिटरिंग होनी चाहिए। लेकिन 2018 के मुताबिक रायपुर में पीएम 10 की मॉनिटरिंग केवल 76 दिन, सल्फर डाइऑक्साइड और नाइट्रोजन ऑक्साइड की मॉनिटरिंग केवल 59 दिन ही हुई है।

माॅनीटरिंग 104 दिन जरूरी पर ये सच्चाई

{मॉनिटर कबीर नगर

{साल दिन

{2016 70

{2017 58

{2018 73

स्मार्ट पोल का डाटा नामंजूर

शहर में इंटीग्रेटेड ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम के तहत जो यूनीपोल लगाए गए हैं। उसका डेटा को केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड आबोहवा की स्थिति के लिए शामिल नहीं करता है। क्योंकि इनके माध्यम से सेंसर बेस्ड मॉनिटरिंग नहीं होती है। साथ ही यूनीपोल का डाटा एयर क्वालिटी मॉनिटरिंग के अनुरूप भी नहीं होता है। 2018 की स्थिति में रायपुर शहर में कबीर नगर और सरोना में सेंसर बेस्ड मॉनिटरिंग की जा रही थी।

पीएम 10 का मानक स्तर 20 से 30 फीसदी कम करना होगा

रिपोर्ट के मुताबिक रायपुर को अगले चार सालों में 2024 तक पीएम 10 के स्तर में 20 से 30 फीसदी तक गिरावट करनी होगी। पीएम 10 धूल के कुछ मोटे कण हैं, जिनका व्यास 2.5 माइक्रोमीटर से 10 माइक्रोमीटर तक रहता है। ऐसे कण सामान्य तौर पर वाहनों के ईंधन, धूल, घरेलू ईंधन निर्माण कार्यों से निकलने वाली धूल-धुएं में पाए जाते हैं और अासानी से शरीर के भीतर जाकर बीमारियों की वजह बनते हैं। इन्हें रोकने के लिए राजधानी में एयर क्वालिटी मॉनिटरिंग का मल्टीपल सेंसर आधारित सिस्टम बनाना होगा। यही नहीं, पीएम 2.5 यानी महीन धूल की रीयल टाइम मानीटरिंग के लिए भी अधोसंरचना बनानी होगी।

{मॉनिटर सरोना

{साल दिन

{2016 59

{2017 57

{2018 76

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