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सड़क पर कर रहे स्केटिंग की प्रैक्टिस क्योंकि शहर में नहीं है रोड रेस ट्रैक
सिटी रिपोर्टर. रायपुर
ये तस्वीर है तेलीबांधा में रोड रेस स्केटिंग करते भिशांक बावने की। भीड़-भरी सड़क पर जान जोखिम में डालकर प्रैक्टिस कर रहे भिशांक ने बताया कि शहर में स्केटिंग का एक भी पब्लिक ट्रैक नहीं है। अगर होता तो जान खतरे में डालकर रोड पर प्रैक्टिस नहीं करता। दो साल से स्केटिंग कर रहे 15 साल के भिशांक अब तक स्टेट लेवल कॉम्पिटीशन में एक गोल्ड और दो सिल्वर मेडल जीत चुके हैं। उनका सपना नेशनल टूर्नामेंट में हिस्सा लेना है।
{ शहर में सिर्फ एक प्राइवेट स्कूल में 200 मीटर का रिंग ट्रैक है।
{ पुलिस ग्राउंड में बनी रिंग को भी खिलाड़ी रिंग ट्रैक की तरह यूज करते हैं। 160 मीटर के इस ट्रैक पर प्रैक्टिस करने खिलाड़ियों को हर महीने लगभग दो हजार रुपए फीस देनी पड़ती है।
{ आमतौर पर रिंग ट्रैक के आउटर एरिया में राेड रेस ट्रैक बनाया जाता है।
{ रोड रेस ट्रैक पर 45 से 65 किमी की स्पीड से स्केटिंग की जा सकती है।
{ स्केटिंग के दौरान ब्रेक लगाकर पूरी तरह रुकने के लिए खिलाड़ी को 10 से 15 सेकंंड लगते हैं।
दो तरह के होते हैं स्केटिंग ट्रैक
रिंग ट्रैक: इंटरनेशनल प्लेयर अमितेश मिश्रा ने बताया, स्केटिंग के दो तरह के ट्रैक होते हैं। रिंग ट्रैक और रोड रेस ट्रैक। रिंग ट्रैक अपर डिपर शेप में होता है। इसे रोलर स्केटिंग ट्रैक भी कहते हैं। ये सिंथेटिक मटेरियल का होता है।
रोड ट्रैक: रोड ट्रैक फ्लैट होता है। ये डामर रोड जैसा होता है।
जान जोखिम में डालकर तेलीबांधा रोड पर स्केटिंग करते खिलाड़ी भिशांक। फोटो: सुधीर सागर