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7 अप्रैल को आएगा शहरी सफाई सर्वे का रिजल्ट रायपुर का दावा कमजोर

एक वर्ष पहले
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बड़े शहरों से सीधे मुकाबले की चुनौती भी है इस बार

रायपुर का उन शहरों से मुकाबला है जिनकी आबादी दस लाख या इससे ज्यादा है। इसलिए भी रायपुर के सामने बड़ी चुनौती है, क्योंकि इस लिस्ट में इंदौर, भोपाल जैसे शहर भी हैं। जो सफाई में लगातार अच्छा प्रदर्शन करते आ रहे हैं। इतना ही नहीं, इन शहरों ने सभी तरह के प्रोटोकॉल और स्टार रेटिंग सर्वे में दावेदारी की है। रायपुर ने केवल ओडीएफ और गार्बेज फ्री सिटी के लिए दावा किया है।

सिटी रिपोर्टर | रायपुर

शहरी स्वच्छ भारत सर्वेक्षण 2020 के नतीजों का ऐलान 7 अप्रैल को होगा। पिछली बार रायपुर को इसमें 41 वीं रैंक हासिल हुई थी। इस बार स्वच्छता से जुड़े आंकड़े जुटाने, सिटीजन फीडबैक और सफाई जागरूकता की मुहिम जैसे बिंदुओं में रायपुर ने पिछले सर्वेक्षणों की तुलना में बेहतर काम किया है। जबकि वेस्ट मैनेजमेंट और कचरे के प्रोसेसिंग प्लांट के वक्त पर तय नहीं होने के कारण शहर का दावा कमजोर भी पड़ सकता है।

स्वच्छता सर्वे के लिए पहली बार लीग कांसेप्ट रखा गया है। पहली और दूसरी लीग के नतीजे पहले ही आ चुके हैं। दस लाख से ज्यादा जनसंख्या वाले शहरों में रायपुर को पहले राउंड में 18 वां और दूसरे राउंड में 26 वां स्थान मिला है। पहली लीग में ओवरऑल रैंकिंग 254 और दूसरी लीग में 460 वीं पोजिशन रही है। दोनों लीग के बाद सफाई सर्वे के लिए जब टीम शहर में आई उस वक्त संकरी में कचरे की प्रोसेसिंग के लिए प्लांट नहीं बन पाया था। इस बार सर्वेक्षण की शर्तों में कचरे के प्रोसेसिंग के लिए प्लांट बनाने को अनिवार्य भी किया गया था। पिछले चार सर्वे के दौरान प्रोसेसिंग प्लांट को लेकर रायपुर को बार बार हिदायत भी मिलती रही है।

पहले दो लीग में शहर गंवा चुका है 400 नंबर : स्वच्छता सर्वेक्षण 2020 के दो तिमाही मुकाबलों में रायपुर 400 अंक पहले ही गंवा चुका है। इसके अलावा पानी के स्रोतों की सफाई के लिए रखे गए स्टार रेटिंग वाटर प्रोटोकॉल के लिए भी शहर ने दावेदारी नहीं की है। इससे 500 अंक पहले ही कम हो चुके हैं। इस तरह करीब एक हजार अंक की कमी जमीनी सर्वे से पहले ही हो चुकी है। इसलिए भी रायपुर के सामने इस बार पहले से ज्यादा कठिन चुनौती रही है।

सिटीजन फीडबैक में इस बार हुआ सुधार : पिछले चार सर्वेक्षणों की तुलना में इस बार सिटीजन फीडबैक में रायपुर शहर ने अपनी स्थिति में सुधार किया है। पिछले सर्वेक्षणों में जमीनी जांच में शहर को सफाई में नंबर वन इंदौर जितने ही अंक मिलते आ रहे हैं, लेकिन फीडबैक में हमेशा शहर पिछड़ते रहा है।
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