बाहरी उम्मीदवारों के खिलाफ कांग्रेस में बगावत भाजपा में भी अपनों के टिकट के लिए खींचतान

News - कांग्रेस में पार्षद टिकट के लिए संघर्ष चरम पर पहुंच गया है। ऐसी बातें छनकर अा रही हैं कि कम से कम पांच मौजूदा...

Dec 04, 2019, 08:41 AM IST
Raipur News - chhattisgarh news rebellion in congress against external candidates pulls for bjp39s own ticket
कांग्रेस में पार्षद टिकट के लिए संघर्ष चरम पर पहुंच गया है। ऐसी बातें छनकर अा रही हैं कि कम से कम पांच मौजूदा पार्षदों का टिकट काटा जा रहा है। इनमें मौजूदा एमअाईसी सदस्यों में से एक-दो नाम भी लिए जा रहे हैं। सूत्रों के अनुसार कांग्रेस संभवत: बुधवार को रायपुर समेत अधिकांश नगर निगमों के पार्षद प्रत्याशियों के नाम फाइनल कर देगी। उधर, राजधानी के कुछ वार्डों में बाहरी प्रत्याशियों के खिलाफ खुली बगावत शुरू हो गई है। मंगलवार को श्यामाप्रसाद मुखर्जी वार्ड के कुछ कांग्रेस कार्यकर्ता बाहरी उम्मीदवार के विरोध में झंडे-बैनर लेकर निकल गए। यही नहीं, कुछ वार्डों में मौजूदा पार्षदों का इस अाधार पर कड़ा विरोध हो रहा है कि विधानसभा चुनाव में इन्होंने पार्टी के पक्ष में काम नहीं किया था।

मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और प्रदेश प्रभारी पीएल पुनिया के नेतृत्व में प्रत्याशियों के चयन के लिए मंगलवार राजीव भवन में प्रदेश चुनाव समिति की मैराथन बैठक हुई। देर शाम तक चली बैठक में जिला चयन समिति, विधायकों की तरफ से आए नामों पर मंथन हुआ। एक तरफ बंद कमरे में वरिष्ठ नेता एक-एक प्रत्याशियों के नाम पर जूझते रहे। उधर, राजीव भवन के बाहर अलग-अलग दावेदारों और उनके समर्थकों ने दिनभर नारेबाजी की। इसी दौरान बाहरी प्रत्याशी वापस जाओ के नारों के साथ वहां एक जुलूस भी पहुंच गया। टिकट को लेकर कांग्रेस में घमासान का आलम यह है कि एक विधायक ने उनके क्षेत्र के एक पार्षद के टिकट का खुलकर विरोध कर दिया है। गौरतलब है, इस बार कांग्रेस ने टिकट वितरण में विधायकों की राय को काफी तवज्जो दिया जा रहा है। यही वजह है कि इसकी काफी चर्चा है। दूसरी तरफ, महापौर प्रमोद दुबे के भगवतीचरण शुक्ल वार्ड से प्रत्याशी बनाए जाने की चर्चा है। इनके अलावा कुछ और नेताओं के टिकट तय माने जा रहे हैं। कुछ नाम भी उछले हैं, लेकिन स्थिति प्रदेश चुनाव समिति की बैठक के बाद ही साफ होगी।

शहर सरकार

70 वार्डों में दोनों दलों के अधिकांश टिकट आज रात तक संभव

राजीव भवन के सामने।

राजधानी पर भाजपा में भी तगड़ा मंथन

220 नामों पर अाधी रात तक माथापच्ची

सिटी रिपोर्टर | रायपुर

राजधानी के 70 वार्डों के प्रत्याशी चुनने के लिए भाजपा के दिग्गजों ने मंगलवार को शाम 6 बजे से अाधी रात तक कुशाभाऊ ठाकरे परिसर में मंथन किया। पार्टी में भी हर वार्ड से औसतन तीन और कुल मिलाकर ढाई सौ से ज्यादा नाम हैं। इनमें से भी अाधे वार्डों में अपनी-अपनी पसंद को लेकर खींचतान चली। देर रात पार्टी सूत्रों ने बताया कि राजधानी के अधिकांश वार्डों के भाजपा प्रत्याशियों की घोषणा बुधवार को शाम तक की जा सकती है। केवल वही वार्ड छूटेंगे, जहां निगम के नेताओं के नाम हैं और उन्हें लेकर खींचतान भी है।

ठाकरे परिसर में बुधवार को हुई बैठक में विधायक बृजमोहन अग्रवाल के अलावा जिलाध्यक्ष राजीव अग्रवाल समेत संजय श्रीवास्तव, सच्चिदानंद उपासने और जयंती पटेल अादि मौजूद थे। विधानसभावार अलग-अलग वार्डों के नाम पर चर्चा शुरू की गई। देर रात तक प्रमुख नेता डटे रहे, लेकिन सूची को अंतिम रूप नहीं दिया जा सका था। सूत्रों के मुताबिक श्रीवास्तव, जिलाध्यक्ष अग्रवाल, प्रफुल्ल विश्वकर्मा, सुभाष तिवारी, रमेश ठाकुर आदि के वार्डों में दावेदारों के नाम को लेकर काफी खींचतान की स्थिति बन रही है। एक-दो वार्ड ऐसे हैं, जहां कई बड़े नेताओं के नाम हैं, इसलिए उन वार्डों पर एक नाम तय नहीं किया गया है। जिले की समिति जो नाम तय करेगी, उस पर संभागीय समिति अंतिम फैसला लेगी।

बृजमोहन निवास पर भीड़।

बंगलों में भी जुटने लगे दावेदार

राजधानी के प्रमुख नेताओं के घरों-बंगलों में भी देर रात तक दावेदारों की भीड़ जुटने लगी है। शहर में फिलहाल बृजमोहन अग्रवाल ही विधायक है इसलिए दावेदारों की भीड़ उनके बंगले में ज्यादा है। इसके अलावा त्रिपुरा के राज्यपाल रमेश बैस, सांसद सुनील सोनी और पूर्व मंत्री राजेश मूणत समेत अन्य नेताओं के यहां भी दावेदार पहुंच रहे हैं।

आयोग ने 27 हजार से ज्यादा थैलों में पहली बार लगवाए हैंडल, इसी में जाएगी सामग्री

राज्य निर्वाचन आयोग इस बार चुनाव में सरकारी अमले को चुनाव सामग्री ले जाने के लिए करीब 31 लाख रुपए के थैले बांटेगा। आयोग ने 27 हजार से ज्यादा थैले बनवाए हैं। इसमें करीब दो दर्जन से ज्यादा चुनाव काम में आने वाली सामग्री जैसे स्टेशनरी, अमिट स्याही, पेन, पेंसिल, पीठासीन की डायरी, बैलेट पेपर, गोंद जैसी चीजें रखीं जाएगी। स्टेशनरी और अन्य सामग्रियों का खर्च अभी नहीं जोड़ा गया है। दरअसल, बैलेट बॉक्स के साथ चुनाव सामग्री ले जाने के लिए सरकारी अमले को तमाम तरह की दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।

सरकारी अमले को पूरी सामग्री कैरी करने में आसानी हो इसके लिए 15 साल में पहली बार आयोग के थैलों में हैंडलिंग के लिए मोटी बद्दियां भी लगाई गई हैं। सूती कपड़े में दो किस्म और दो अलग साइजों में छोटे बड़े थैले बनवाए गए हैं। बड़े थैले की कीमत करीब 149 रुपए है। जबकि छोटे थैले की लागत 74 रुपए के आसपास है। 26 बाई 36 इंच के साइज में बड़े बैग तैयार करवाए गए हैं। जबकि छोटे बैग का आकार 18 बाई 21 इंच का है। बड़े थैलों में बैलेट बॉक्स भी रखे जा सकते हैं। जबकि छोटे साइज के बैग में स्टेशनरी और दूसरी जरूरी चीजें रखी जा सकेंगी। ऐसे मतदान केंद्र जहां मतदाताओं और प्रत्याशियों की संख्या ज्यादा हैं, वहां बड़े बैग में सामग्रियां पहुंचाने की रणनीति बनाई गई है। इस बार उम्मीदवारों की तादाद के मुताबिक दो तरह के बैलेट बॉक्स भी प्रयोग किए जाएंगे।

सपा ने साइकिल चुनाव चिन्ह मांगा

निकाय चुनाव में समाजवादी पार्टी पूरे प्रदेश में अपने प्रत्याशियों को उतारेगी। मंगलवार को पार्टी ने आयोग को ज्ञापन सौंपकर साइकिल चुनाव चिन्ह की मांग की है। राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने यूपी से अविनाश कुशवाह को प्रत्याशी तय करने यहां भेजा है।

पोलिंग मटेरियल किट का प्रयोग

पिछले विधानसभा चुनाव के दौरान सरकारी अमले की सहूलियत के लिए छत्तीसगढ़ से ही पहली बार पोलिंग मटेरियल किट का प्रयोग हुआ था। बाद में इसे पूरे देश में लोकसभा चुनाव के दौरान लागू किया गया था। राज्य का ये प्रयोग आयोग की बेस्ट प्रेक्टिस में भी आया था।

लोकसभा चुनाव के दौरान करीब डेढ़ करोड़ रुपए की पोलिंग मटेरियल किट बांटी गई थी। ऐसे मतदान केंद्र जहां पर मच्छरों की समस्या थी। वहां के लिए मच्छरदानी बांटने जैसे प्रयोग भी विधानसभा चुनाव में किए गए थे। राज्य निर्वाचन आयोग इससे आधे से भी कम लागत में स्थानीय निकाय चुनाव के लिए पोलिंग मटेरियल रखने के लिए थैले बांटने वाला है।

पार्षद प्रत्याशियों के चुनाव खर्च का आयोग को चार बार ब्यौरा देंगे प्रेक्षक

पार्षद प्रत्याशियों के चुनाव खर्च पर आयोग के व्यय प्रेक्षक चार बार प्रतिवेदन सौंपेगे। राजधानी में मंगलवार को व्यय प्रेक्षकों की ट्रेनिंग हुई। इसमें राज्य निर्वाचन आयुक्त ठाकुरराम सिंह ने प्रत्याशियों के छोटे बड़े खर्चों पर बारीकी से हिसाब किताब रखने की हिदायत दी। उन्होंने प्रेक्षकों को चार बार प्रत्याशियों के खर्च का ब्यौरा सौंपने के लिए भी कहा है। पहला ब्यौरा नामांकन प्रक्रिया खत्म होने के चार दिन के अंदर, दूसरा वोटिंग से दो दिन पहले, तीसरा वोटिंग खत्म होने के एक दिन बाद और फाइनल ब्यौरा चुनाव के रिजल्ट आने के एक माह के अंदर सौंपना होगा। प्रेक्षक प्रत्याशियों के चुनाव खर्च की बारीक पड़ताल करेंगे।



तीन लाख से ज्यादा आबादी वाले नगर निगमों में चुनाव खर्च की सीमा 5 लाख और तीन लाख से कम आबादी के नगर निगमों के तीन लाख रुपए की खर्च सीमा है। जबकि नगरपालिका के लिए डेढ़ लाख और नगर पंचायत के लिए 50 हजार रुपए की व्यय सीमा है।

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